{"_id":"58fe37674f1c1bdd0bc0c0bc","slug":"panchayat-raj-s-dream-is-incomplete","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचायत राज का सपना अधूरा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचायत राज का सपना अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Mon, 24 Apr 2017 11:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ग्राम पंचायत में मिनी सरकार बनाकर ग्रामीणों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने का पंचायतराज का सपना आज तक पूरा नहीं हो पा रहा है। हालत इतने बदतर हैं कि पंचायतों के पास अपने भवन और कर्मचारी तक नहीं हैं। पंचायत को बैठकें स्कूलों या फिर किराए की दुकानों में करनी पड़ रही हैं। इसके अलावा एक कर्मचारी औसतन सात पंचायतों का काम देख रहा है।
जिले की 308 ग्राम पंचायतों में से 38 पंचायतें ऐसी हैं, जिनके पास या तो अपने भवन ही नहीं है या फिर वह खंडहर हो चुके हैं। जिसकी वजह से पंचायत के कार्य किराए की दुकानों, प्राथमिक विद्यालयों या फिर अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं के रूप में लेकर किए जा रहे हैं। इसके अलावा प्रत्येक पंचायतस्तर पर एक ग्राम पंचायत सचिव होना चाहिए, लेकिन 308 पंचायतों का जिम्मा महज 43 सचिव देख रहे हैं। पंचायतों की इस हाल पर न ग्रामीणों को सुविधाएं मिल रही हैं और न विकास कार्य एवं ग्रामीणों की समस्याएं हल हो रही हैं।
खानपुर-लक्सर में 11 पंचायतें भवन विहिन
खानपुर ब्लॉक जिले का सबसे पिछड़ा ब्लॉक माना जाता है। इसकी 23 पंचायतों में से 17 के पास भवन हैं, लेकिन छह पंचायतों (खानपुर, जोगावाला, दल्लावाला, चंदपुरी बांगर, गिद्धावाली और कान्हेवाली) के पास अपने भवन नहीं है। एडीओ पंचायत सत्यनाराण रतूड़ी ने बताया कि भवन बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर जिला पंचायतराज अधिकारी को भेजे हैं। बजट मिलते ही भवनों का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। लक्सर ब्लॉक के बाढ़ीटीप, रामपुर रायघटी ग्राम पंचायत के पास भी अपने भवन नहीं हैं। ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों लादपुर कलां, दाबकी कलां एवं खेड़ी कलां के पंचायतों के भवन खंडहर हो चुके हैं।
विज्ञापन
पंचायतभवन पर नहीं मिलते अधिकारी
वीडीओ आदि को महीने में दो दिन संबंधित पंचायत भवन में बैठने के आदेश हैं, लेकिन शायद ही किसी भवन में कोई वीडीओ दो दिन मौजूद रहता है। जिसके चलते गांव में पंचायत के भवन आदि सुविधाएं होने के बाद भी किसी खास मौके पर अधिकारी व जनप्रतिनिधी भवन में मिलते हैं। बाकी दिनों में पंचायत सचिव, प्रधान के यहीं बैठकर अपना समय गुजारते हैं। इससे प्रधान से राजनीतिक द्वेष रखने वाले ग्रामीणों को अपने काम कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
प्रमाण पत्र के लिए भी ब्लॉक की दौड़
ग्राम पंचायतों में जन्म-मृत्य प्रमाण पत्र भी मिलने चाहिए थे, लेकिन ग्रामीणों को इसके लिए ब्लॉक कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके अलावा कई बार परिवार रजिस्ट्रर की नकल लेने के लिए भी पंचायत सचिव ग्रामीणों को ब्लॉक मुख्यालय बुला रहे हैं। जिससे जरूरी इस दस्तावेज के लिए ग्रामीणों का समय एवं पैसा दोनों बर्बाद हो जा रहा है।
स्कूलों में करनी पड़ रही बैठकें
रुड़की एडीओ पंचायत सुखवीर सिंह चौहान ने बताया कि मरगूबपुर, हलवाहेड़ी, टोड़ा एहतमाल में पंचायतघर नहीं है। इसके अलावा ब्रहमपुर शंकरपुरी और नन्हेड़ा अनंतपुर ग्राम पंचायत भवन खंडहर हैं। नारसन विकास खंड के एडीओ पंचायत एनडी जोशी ने बताया कि थिथौला, निजामपुर, नाथूखेड़ी, आमखेड़ी, सुसाड़ी, टिकौला कलां, नूरपुर, बुड़पुर एवं बसवाखेड़ी में भवन नहीं है। उन्होंने बताया कि पंचायतों की बैठकों के लिए स्कूलों में जाना पड़ता है।
पंचायतघरों को बनाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजे हैं, बजट मिलते ही पंचायत घरों का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। बात रही कर्मचारियों की तो सरकार से कर्मचारी मिलते हैं तो पंचायत स्तर पर नियुक्तियां कर दी जाएंगी।
रमेशचंद त्रिपाठी, जिला पंचायत राज अधिकारी, हरिद्वार
जिले की 308 ग्राम पंचायतों में से 38 पंचायतें ऐसी हैं, जिनके पास या तो अपने भवन ही नहीं है या फिर वह खंडहर हो चुके हैं। जिसकी वजह से पंचायत के कार्य किराए की दुकानों, प्राथमिक विद्यालयों या फिर अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं के रूप में लेकर किए जा रहे हैं। इसके अलावा प्रत्येक पंचायतस्तर पर एक ग्राम पंचायत सचिव होना चाहिए, लेकिन 308 पंचायतों का जिम्मा महज 43 सचिव देख रहे हैं। पंचायतों की इस हाल पर न ग्रामीणों को सुविधाएं मिल रही हैं और न विकास कार्य एवं ग्रामीणों की समस्याएं हल हो रही हैं।
विज्ञापन
खानपुर-लक्सर में 11 पंचायतें भवन विहिन
खानपुर ब्लॉक जिले का सबसे पिछड़ा ब्लॉक माना जाता है। इसकी 23 पंचायतों में से 17 के पास भवन हैं, लेकिन छह पंचायतों (खानपुर, जोगावाला, दल्लावाला, चंदपुरी बांगर, गिद्धावाली और कान्हेवाली) के पास अपने भवन नहीं है। एडीओ पंचायत सत्यनाराण रतूड़ी ने बताया कि भवन बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर जिला पंचायतराज अधिकारी को भेजे हैं। बजट मिलते ही भवनों का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। लक्सर ब्लॉक के बाढ़ीटीप, रामपुर रायघटी ग्राम पंचायत के पास भी अपने भवन नहीं हैं। ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों लादपुर कलां, दाबकी कलां एवं खेड़ी कलां के पंचायतों के भवन खंडहर हो चुके हैं।
विज्ञापन
पंचायतभवन पर नहीं मिलते अधिकारी
वीडीओ आदि को महीने में दो दिन संबंधित पंचायत भवन में बैठने के आदेश हैं, लेकिन शायद ही किसी भवन में कोई वीडीओ दो दिन मौजूद रहता है। जिसके चलते गांव में पंचायत के भवन आदि सुविधाएं होने के बाद भी किसी खास मौके पर अधिकारी व जनप्रतिनिधी भवन में मिलते हैं। बाकी दिनों में पंचायत सचिव, प्रधान के यहीं बैठकर अपना समय गुजारते हैं। इससे प्रधान से राजनीतिक द्वेष रखने वाले ग्रामीणों को अपने काम कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
प्रमाण पत्र के लिए भी ब्लॉक की दौड़
ग्राम पंचायतों में जन्म-मृत्य प्रमाण पत्र भी मिलने चाहिए थे, लेकिन ग्रामीणों को इसके लिए ब्लॉक कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके अलावा कई बार परिवार रजिस्ट्रर की नकल लेने के लिए भी पंचायत सचिव ग्रामीणों को ब्लॉक मुख्यालय बुला रहे हैं। जिससे जरूरी इस दस्तावेज के लिए ग्रामीणों का समय एवं पैसा दोनों बर्बाद हो जा रहा है।
स्कूलों में करनी पड़ रही बैठकें
रुड़की एडीओ पंचायत सुखवीर सिंह चौहान ने बताया कि मरगूबपुर, हलवाहेड़ी, टोड़ा एहतमाल में पंचायतघर नहीं है। इसके अलावा ब्रहमपुर शंकरपुरी और नन्हेड़ा अनंतपुर ग्राम पंचायत भवन खंडहर हैं। नारसन विकास खंड के एडीओ पंचायत एनडी जोशी ने बताया कि थिथौला, निजामपुर, नाथूखेड़ी, आमखेड़ी, सुसाड़ी, टिकौला कलां, नूरपुर, बुड़पुर एवं बसवाखेड़ी में भवन नहीं है। उन्होंने बताया कि पंचायतों की बैठकों के लिए स्कूलों में जाना पड़ता है।
पंचायतघरों को बनाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजे हैं, बजट मिलते ही पंचायत घरों का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। बात रही कर्मचारियों की तो सरकार से कर्मचारी मिलते हैं तो पंचायत स्तर पर नियुक्तियां कर दी जाएंगी।
रमेशचंद त्रिपाठी, जिला पंचायत राज अधिकारी, हरिद्वार