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Roorkee News: दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म का किया पूजन
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श्री श्रेयांसनाथ भगवान (मंगलौर वाले बाबा) के मंदिर में दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन जैन समाज की ओर से उत्तम त्याग के धर्म के रूप में भक्ति भाव से मनाया गया। इसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। विशेष रूप से प्रथम अभिषेक नमन जैन और राजेश जैन की ओर से किया गया। महा शांतिधारा अमित जैन प्रक्षाल जैन की ओर से की गई।
भोपाल से पधारे पंडित अमन जैन द्वारा बताया कि त्याग धर्म की व्याख्यान करते हुए त्याग धर्म का स्वरूप कविवर द्यानतराय की ओर से रचित पंक्तियों द्वारा दान चार प्रकार, चार संघ को दीजिए। धन बिजली उनहार, नर-भव लाहो लीजिए। उत्तम त्याग कह्यो जग सारा, औषध शाष्त्र अभय सहा। उन्होंने बताया कि दान चार प्रकार का होता है जीवन दान, आहार दान, औषधि दान और शास्त्र दान होते है और दान का कोई पात्र है तो उसको ही देना उचित है।
बिना पात्र के दान देना सही दान नहीं कहलाता है। इंदौर मध्य प्रदेश में चल रहे चातुर्मास जगत पूज्य निर्यापक श्रमण सुधा सागर महाराज द्वारा भक्तों को दान की विशेष महिमा बताई गई। गुरु देव समस्त जन जाती के लिए अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, गोशाला और तीर्थ क्षेत्र बनाने में भक्तों के धन का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। ऐसे संतों के दर्शन करने जाना जरूर जाना चाहिए।
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पंडित की ओर से बताया गया कि प्रभु के सिर पर छत्र लगाने से शास्त्रों में बताया गया है कि प्रभु की छत्र छाया बनी रहती है। मूल नायक भगवान के मस्तक पर छत्र लगाने का विशेष मंत्र होता है। मंगल आरती तान्या जैन द्वारा की गई। कार्यक्रम में अरिहंत जैन, पंकज जैन, अनुज जैन, गौरव जैन, सचिन जैन, अजय, अखिल, उत्कर्ष, सम्यक, सिद्धार्थ, शशांक, प्रेरणा जैन, ऋतु, ईरा, पूनम, सारिका और रश्मि आदि मौजूद रहे।
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भोपाल से पधारे पंडित अमन जैन द्वारा बताया कि त्याग धर्म की व्याख्यान करते हुए त्याग धर्म का स्वरूप कविवर द्यानतराय की ओर से रचित पंक्तियों द्वारा दान चार प्रकार, चार संघ को दीजिए। धन बिजली उनहार, नर-भव लाहो लीजिए। उत्तम त्याग कह्यो जग सारा, औषध शाष्त्र अभय सहा। उन्होंने बताया कि दान चार प्रकार का होता है जीवन दान, आहार दान, औषधि दान और शास्त्र दान होते है और दान का कोई पात्र है तो उसको ही देना उचित है।
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बिना पात्र के दान देना सही दान नहीं कहलाता है। इंदौर मध्य प्रदेश में चल रहे चातुर्मास जगत पूज्य निर्यापक श्रमण सुधा सागर महाराज द्वारा भक्तों को दान की विशेष महिमा बताई गई। गुरु देव समस्त जन जाती के लिए अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, गोशाला और तीर्थ क्षेत्र बनाने में भक्तों के धन का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। ऐसे संतों के दर्शन करने जाना जरूर जाना चाहिए।
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पंडित की ओर से बताया गया कि प्रभु के सिर पर छत्र लगाने से शास्त्रों में बताया गया है कि प्रभु की छत्र छाया बनी रहती है। मूल नायक भगवान के मस्तक पर छत्र लगाने का विशेष मंत्र होता है। मंगल आरती तान्या जैन द्वारा की गई। कार्यक्रम में अरिहंत जैन, पंकज जैन, अनुज जैन, गौरव जैन, सचिन जैन, अजय, अखिल, उत्कर्ष, सम्यक, सिद्धार्थ, शशांक, प्रेरणा जैन, ऋतु, ईरा, पूनम, सारिका और रश्मि आदि मौजूद रहे।