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Roorkee News: नारसन में नीलगाय का आतंक, किसानों की फसलें बरबाद
Mon, 11 May 2026 05:42 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Mon, 11 May 2026 05:42 PM IST
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- फसलों को बरबाद होने से बचाने के लिए रात में खतों पर जाने को मजबूर हो रहे किसान
नारसन। क्षेत्र में नीलगायों की बढ़ती संख्या किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। नीलगायों के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि सड़कों पर अचानक वाहनों के सामने आने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
क्षेत्र के किसान जितेंद्र, सुमित, भूरा, वसीम, राशिद और धर्मेंद्र ने बताया कि नीलगाय न केवल फसल खाती हैं बल्कि उसे रौंदकर भी बर्बाद कर देती हैं। किसानों को दिन-रात इस बात की चिंता रहती है कि कहीं नीलगायों का झुंड उनके खेतों में न पहुंच जाए। कई किसान रात में भी खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
किसान संदीप, जयदीप, प्रमोद और प्रदीप का कहना है कि कई बार नीलगायों को भगाने के लिए खेत में जाने पर वे निडर होकर वहीं खड़ी रहती हैं और हमला करने तक की कोशिश करती हैं। किसानों ने खेतों के चारों ओर तारबाड़ लगाने का प्रयास किया, लेकिन अधिक खर्च होने के कारण अधिकांश किसान ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।
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नारसन के बूढ़पुर जट्ट, ब्रहमपुर जट्ट, मोहम्मदपुर जट्ट, खेड़ा जट्ट, नारसन कला, टिकोला कला, नारसन खुर्द, सकौती और नगला कोयल गांवों के जंगलों में बड़ी संख्या में नीलगाय देखी जा रही हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सीमा से सटे उलहेड़ी परगना में करीब 50 नीलगायों के दो झुंड किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बने हुए हैं। किसानों ने प्रशासन से इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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नारसन। क्षेत्र में नीलगायों की बढ़ती संख्या किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। नीलगायों के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि सड़कों पर अचानक वाहनों के सामने आने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
क्षेत्र के किसान जितेंद्र, सुमित, भूरा, वसीम, राशिद और धर्मेंद्र ने बताया कि नीलगाय न केवल फसल खाती हैं बल्कि उसे रौंदकर भी बर्बाद कर देती हैं। किसानों को दिन-रात इस बात की चिंता रहती है कि कहीं नीलगायों का झुंड उनके खेतों में न पहुंच जाए। कई किसान रात में भी खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
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किसान संदीप, जयदीप, प्रमोद और प्रदीप का कहना है कि कई बार नीलगायों को भगाने के लिए खेत में जाने पर वे निडर होकर वहीं खड़ी रहती हैं और हमला करने तक की कोशिश करती हैं। किसानों ने खेतों के चारों ओर तारबाड़ लगाने का प्रयास किया, लेकिन अधिक खर्च होने के कारण अधिकांश किसान ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।
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नारसन के बूढ़पुर जट्ट, ब्रहमपुर जट्ट, मोहम्मदपुर जट्ट, खेड़ा जट्ट, नारसन कला, टिकोला कला, नारसन खुर्द, सकौती और नगला कोयल गांवों के जंगलों में बड़ी संख्या में नीलगाय देखी जा रही हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सीमा से सटे उलहेड़ी परगना में करीब 50 नीलगायों के दो झुंड किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बने हुए हैं। किसानों ने प्रशासन से इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।