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मंगलौर में काजी-हाजी फिर आमने-सामने
अमर उजाला ब्यूरो मंगलौर
Updated Mon, 23 Jan 2017 10:16 PM IST
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मंगलौर विधानसभा सीट पर दो पुराने प्रतिद्वंद्वी चौथी बार आमने-सामने होंगे। कांग्रेस ने एक बार फिर पिछली चुनाव में सात सौ मतों से हारे काजी निजामुद्दीन को टिकट देकर बसपा प्रत्याशी से पुराना हिसाब किताब चुकता करने को मौका दिया है। जबकि भाजपा की ओर से ऋषिपाल बालियान को मैदान में उतारने से मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
वर्ष 2002 में लक्सर विधानसभा सीट से अलग कर मंगलौर सीट बनाई गई थी। उसके बाद से मंगलौर विधानसभा सीट पर काजी निजामुद्दीन और हाजी सरवत करीम अंसारी आमने-सामने हैं। इस सीट में मंगलौर नगर के अलावा 30 गांवों को शामिल किया गया था। पहले चुनाव में काजी निजामुद्दीन ने बसपा प्रत्याशी के तौर पर कांग्रेस प्रत्याशी सरवत करीम अंसारी को हराया था। वर्ष 2007 में काजी फिर बसपा के प्रत्याशी बने तो कांग्रेस ने फिर से सरवत करीम को प्रत्याशी बनाया। जीत इस बार भी काजी के हिस्से आई। जबकि सरवत करीम को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। वर्ष 2012 में भी दोनों में मुकाबला हुआ। इस बार काजी कांग्रेस के टिकट पर उतरें।
जबकि सरवत बसपा के प्रत्याशी बने। यह बदलाव उन्हें रास आया और वह दो बार के विधायक निजामुद्दीन को हरा कर पहली बार विधायक बने। इस बार (वर्ष 2017) एक बार फिर से काजी और हाजी आमने-सामने होंगे। कांग्रेस-बसपा दोनों ही दलों ने पुराने धुरंधरों पर दांव लगाया है। जबकि भाजपा ने इस बार ऋषिपाल बालियान के रूप में नए चेहरे को टिकट दिया है। हालांकि बालियान किसान नेता रहे हैं और रालोद से चुनाव भी लड़ चुके हैं। मालूम हो कि काजी इस बार पिछले चुनाव में सात सौ मतों से मिली हार का बदला लेना चाहेंगे। जबकि हाजी सरवत दूसरी बार विधायक बनने के लिए जी थोड़ मेहनत करेंगे। ऋषिपाल बालियान मंगलौर में पहली बार भाजपा का खाता खोलने के लिए जोर आजमाइश करेंगे।
वर्ष 2002 में लक्सर विधानसभा सीट से अलग कर मंगलौर सीट बनाई गई थी। उसके बाद से मंगलौर विधानसभा सीट पर काजी निजामुद्दीन और हाजी सरवत करीम अंसारी आमने-सामने हैं। इस सीट में मंगलौर नगर के अलावा 30 गांवों को शामिल किया गया था। पहले चुनाव में काजी निजामुद्दीन ने बसपा प्रत्याशी के तौर पर कांग्रेस प्रत्याशी सरवत करीम अंसारी को हराया था। वर्ष 2007 में काजी फिर बसपा के प्रत्याशी बने तो कांग्रेस ने फिर से सरवत करीम को प्रत्याशी बनाया। जीत इस बार भी काजी के हिस्से आई। जबकि सरवत करीम को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। वर्ष 2012 में भी दोनों में मुकाबला हुआ। इस बार काजी कांग्रेस के टिकट पर उतरें।
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जबकि सरवत बसपा के प्रत्याशी बने। यह बदलाव उन्हें रास आया और वह दो बार के विधायक निजामुद्दीन को हरा कर पहली बार विधायक बने। इस बार (वर्ष 2017) एक बार फिर से काजी और हाजी आमने-सामने होंगे। कांग्रेस-बसपा दोनों ही दलों ने पुराने धुरंधरों पर दांव लगाया है। जबकि भाजपा ने इस बार ऋषिपाल बालियान के रूप में नए चेहरे को टिकट दिया है। हालांकि बालियान किसान नेता रहे हैं और रालोद से चुनाव भी लड़ चुके हैं। मालूम हो कि काजी इस बार पिछले चुनाव में सात सौ मतों से मिली हार का बदला लेना चाहेंगे। जबकि हाजी सरवत दूसरी बार विधायक बनने के लिए जी थोड़ मेहनत करेंगे। ऋषिपाल बालियान मंगलौर में पहली बार भाजपा का खाता खोलने के लिए जोर आजमाइश करेंगे।
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