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मंगलौर सीएचसी को ही है इलाज की जरूरत

Sun, 23 May 2021 11:41 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 23 May 2021 11:41 PM IST
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Mangalore CHC only needs 'treatment'
महामारी के बीच कस्बे का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। केंद्र में डॉक्टरों के साथ ही अन्य सुविधाओं का भी टोटा है। मजबूरी में मरीज प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं। इस महामारी में जब प्राइवेट अस्पताल में मरीजों को बेड नहीं मिल रहे हैं तो वे आखिरी उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
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मंगलौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कस्बे और आसपास की करीब एक लाख की आबादी निर्भर है। पहले यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र था। बाद में इसे मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिलाया था। सरकार ने केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो दिया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां हमेशा स्टाफ और संसाधनों का टोटा है। मरीजों को सुविधाएं न मिलने पर बैरंग लौटना पड़ता है। वर्तमान में यहां प्रसव के अलावा कोई सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र में इस समय छह डॉक्टर और मात्र दस बेड हैं। जबकि आबादी के हिसाब से यहां कम से कम 30 बेड 12 डॉक्टरों की दरकार है। डॉक्टरों में भी दो संविदा पर हैं और बाल रोग विशेषज्ञ एक सप्ताह में तीन दिन ही सेवाएं देते हैं। बदहाली का आलम ये है कि स्वास्थ्य केंद्र से क्षेत्र के कई उप केंद्र भी अटैच हैं। इसकी व्यवस्था भी मंगलौर सीएचसी को ही करनी पड़ती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएचसी अधीक्षक को मात्र दो साल का अनुभव है, जबकि उन्हें पूरे सीएचसी की जिम्मेदारी दे दी गई है। ऐसे में अनुभव की कमी के चलते केंद्र पर अव्यवस्थाएं फैली हैं।
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शोपीस बनी एक्स-रे मशीन
सीएचसी में कई माह पूर्व एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराई गई थी। साथ ही एक टेक्नीशियन भी तैनात किया गया था। मगर आज तक यहां इंजीनियर मशीन को सेट करने नहीं पहुंचा। ऐसे में ये मशीन कई महीने से शोपीस बनी हुई है। वहीं, जच्चा-बच्चा के लिए शुरू की गई एंबुलेंस सेवा खुशियों की सवारी भी शोपीस बनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र का जेनरेटर भी वर्षों से धूल फांक रहा है। सुविधाओं के अभाव में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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क्या कहते हैं लोग
स्वास्थ्य केंद्र में जन सुविधाओं का अभाव है। इस कारण मरीजों को भारी परेशानियां उठानी पड़ती है। कोरोना के इलाज के नाम पर सीएचसी में कुछ सुविधा नहीं है। यहां स्टाफ और अन्य सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है।
-मोहम्मद असलम, समाजसेवी
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के ग्रामीणों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस कारण मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। केंद्र के अधीक्षक मरीजों के साथ आए दिन बदसलूकी करते हैं। सरकार को शीघ्र ही इस पर ध्यान देना चाहिए।
-शाकिर अंसारी, समाजसेवी
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सरकार को जल्द ही मंगलौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि इस सीएचसी पर करीब एक लाख की आबादी निर्भर है। यहां सुविधाएं होंगी तो आसपास से आए मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा।
-सैयद आदिल, समाजसेवी
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महिलाओं को सीएचसी में डिलीवरी की बेहतर सुविधाएं दी जाती हैं। हर महीने करीब 200 डिलीवरी कराई जाती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 45 लोग रोज ओपीडी का लाभ उठा रहे हैं। एक्स-रे मशीन और जेनरेटर के लिए लगातार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उम्मीद है कि जल्द एक्स-रे मशीन और जेनरेटर चालू करवा दिए जाएंगे।
-विपिन कुमार, केंद्र प्रबंधक
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सरकार मंगलौर सीएचसी में जो बेहतर हो सकता है, उसके लिए कदम उठा रही है। जल्द ही मंगलौर सीएचसी में अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके लिए वे लगातार प्रयास कर रही हैं। सरकार के मंत्री भी खुद सभी सीएचसी का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। इसलिए जल्द स्थिति बेहतर होगी।

-डॉ मधु सिंह, अध्यक्ष मंडी समिति मंगलौर
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सरकार और जिला प्रशासन को लगातार सीएचसी के बारे में अवगत कराया गया है। विधायक निधि और अपने निजी संसाधनों से सीएचसी का कायाकल्प कराऊंगा। सरकार यदि मंगलौर सीएचसी पर ध्यान देती तो यहां की स्थिति और बेहतर हो सकती थी।
-काजी निजामुद्दीन, मंगलौर विधायक
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