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Roorkee News: सीमित साधनों से बदहाल विद्यालय को बनाया शिक्षा का मंदिर
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भंगेड़ी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय-दो की प्रधानाध्यापक ने किया स्कूल का कायाकल्प
उत्कृष्ट कार्यों के चलते शिक्षिका कई पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित
कभी गांव के बदहाल स्कूलों में गिना जाने वाला प्राथमिक विद्यालय नंबर-दो आज गांव ही नहीं बल्कि जिले में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापक के अथक प्रयास से सीमित संसाधनों में भी वर्तमान में स्कूल में बच्चों के लिए ज्यादातर सुविधाएं मौजूद हैं। अपने इन्हीं प्रयासों के चलते स्कूल की हेडमास्टर कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं।
भंगेड़ी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर-दो की प्रधानाध्यापक बीना कौशल वर्ष 2000 में विद्यालय में बतौर सहायक अध्यापक तैनात थीं। वर्ष 2005 में उन्हें हेडमास्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। उस समय स्कूल के कमरे जर्जर हालत में थे। स्कूल में पानी, शौचालय, फर्नीचर सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं नदारद थीं। ऐसे में स्कूल में छात्रों की संख्या भी सीमित थी।
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कई साल विभाग के भरोसे रहने से सूरत नहीं बदली तो प्रधानाध्यापक बीना कौशल ने स्वयं स्कूल का कायाकल्प करने की ठानी। सीमित साधनों के बीच उन्होंने विद्यालय में पानी, बिजली, पंखे आदि लगवाए। इसके बाद उन्होंने सत्य धर्म बोध मिशन एनजीओ से संपर्क कर भवन, प्रांगण और झूले आदि लगवाएं। वर्तमान में स्कूल एक प्राइवेट स्कूल जैसी सुविधाओं से लैस है। बच्चों के लिए कंप्यूटर लैब, फर्नीचर, शौचालय आदि की सुविधाएं मौजूद हैं।
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बतौर प्रधानाध्यापक बीना कौशल उत्कृष्ट कार्यों के चलते 2015 में शिक्षक संगठन की ओर से दिए जाने वाले स्व. पद्म सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 2019 में उन्हें तत्कालीन एसडीएम नमामी बंसल सम्मानित कर चुकी हैं। 2018 में शिक्षा विभाग की ओर से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें तैलन पुरस्कार दिया गया। वहीं पिछले वर्ष शैलेश मटियानी पुरस्कार मिला है। यहां बढ़ी सुविधाओं का ही नतीजा है कि आज विद्यालय में बच्चों की संख्या 135 है।
कुछ सुविधाओं की अब भी दरकार
विद्यालय में इस समय भी बच्चों के लिए एक भवन की जरूरत है। इसके बाद विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। वहीं बच्चों के लिए एक इनवर्टर की जरूरत है क्योंकि बिजली गुल होने पर बच्चे कक्षा में पसीना-पसीना हो जाते हैं। परिसर के बाहर साफ-सफाई की जरूरत है। इन चीजों के लिए लगातार एनजीओ और अन्य संगठनों से संपर्क किया जा रहा है।