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Roorkee News: भगवान वासुपूज्यनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया
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पर्वाधिराज दसलक्षण महापर्व के दसवें और अंतिम दिन शुक्रवार को जैन समाज की ओर से उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की श्रद्धा और उल्लास के साथ पूजा-अर्चना की गई। अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर भगवान वासुपूज्यनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर में निर्वाण लड्डू भी चढ़ाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष धार्मिक विधानों के साथ हुआ। प्रभु पार्श्वनाथ भगवान को सिर पर धारण कर पांडुकशिला पर विराजमान करने और प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य सौधर्म इंद्र बने पंकज जैन और श्रेयांस जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य अनुज जैन को मिला।
श्रद्धालुओं ने विधिविधान से भगवान की पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ अर्जित किया। भोपाल से आए पंडित अमन ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि ब्रह्मचर्य आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने श्रद्धालुओं को मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज के सानिध्य में चल रही धार्मिक गतिविधियों और नवदीक्षित मुनियों की दीक्षा के बारे में भी जानकारी दी।
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इस दौरान 27 सितंबर को प्रस्तावित भव्य शोभायात्रा की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और रूपरेखा को लेकर समाज के लोगों ने चर्चा की। साथ ही सभी श्रद्धालुओं से शोभायात्रा में शामिल होने का आह्वान किया गया। संध्याकालीन मंगल आरती दीप्ति जैन ने की।
इसके बाद दसलक्षण महामंडल के समापन पर जैन समाज की ओर से पूर्णाहुति के साथ हवन किया गया। कार्यक्रम में अरिहंत जैन, पंकज जैन, गौरव जैन, अजय जैन, राजेश जैन, प्रक्षाल, उत्कर्ष, ऋतु, ईरा आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष धार्मिक विधानों के साथ हुआ। प्रभु पार्श्वनाथ भगवान को सिर पर धारण कर पांडुकशिला पर विराजमान करने और प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य सौधर्म इंद्र बने पंकज जैन और श्रेयांस जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य अनुज जैन को मिला।
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श्रद्धालुओं ने विधिविधान से भगवान की पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ अर्जित किया। भोपाल से आए पंडित अमन ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि ब्रह्मचर्य आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने श्रद्धालुओं को मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज के सानिध्य में चल रही धार्मिक गतिविधियों और नवदीक्षित मुनियों की दीक्षा के बारे में भी जानकारी दी।
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इस दौरान 27 सितंबर को प्रस्तावित भव्य शोभायात्रा की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और रूपरेखा को लेकर समाज के लोगों ने चर्चा की। साथ ही सभी श्रद्धालुओं से शोभायात्रा में शामिल होने का आह्वान किया गया। संध्याकालीन मंगल आरती दीप्ति जैन ने की।
इसके बाद दसलक्षण महामंडल के समापन पर जैन समाज की ओर से पूर्णाहुति के साथ हवन किया गया। कार्यक्रम में अरिहंत जैन, पंकज जैन, गौरव जैन, अजय जैन, राजेश जैन, प्रक्षाल, उत्कर्ष, ऋतु, ईरा आदि मौजूद रहे।