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सरकारी भूमि में किया जा रहा था अवैध निर्माण, ध्वस्तीकरण के आदेश
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सलेमपुर राजपुताना औद्योगिक क्षेत्र में नगर निगम की बंजर भूमि पर अवैध निर्माण किया गया है। मौके पर पहुंची नगर निगम की जांच टीम ने इसकी पुष्टि है। रिपोर्ट मिलने के बाद नगर आयुक्त ने निर्माण को ध्वस्त कराने के आदेश दिए हैं।
बृहस्पतिवार को कुछ लोगों ने सहायक नगर आयुक्त से मिलकर नगर निगम की भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत की थी। उन्होंने पत्र सौंपकर एक पार्षद प्रतिनिधि पर कब्जा करने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ताओं में शामिल राजेंद्र चौधरी ने बताया कि पार्षद की ओर से लोगों को भ्रमित कर बताया जा रहा था कि यह सरकारी जमीन है। इस पर नगर निगम की ओर से निर्माण कराया जा रहा है। उनका आरोप था कि इस संबंध में मेयर को भी अवगत कराया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामला संज्ञान में आने के बाद नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने अधिशासी अभियंता रचना पायल के नेतृत्व में सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार प्रीतम सिंह और टैक्स इंस्पेक्टर रवींद्र पंवार समेत तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। शुक्रवार को समिति ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की तो अवैध निर्माण की पुष्टि हुई। समिति की ओर से नगर आयुक्त को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि यह भूमि खसरा संख्या 991 है और नगर निगम की भूमि है। इस पर लगभग ढाई फीट ऊंची ईंटों की नींव भरी गई है, जो अवैध है। नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया कि जांच में निर्माण अवैध पाया गया है। इसे ध्वस्त कराने के आदेश दिए गए हैं।
...तो अवैध निर्माण के लिए हुई थी करोड़ों में बेचने की डील
सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लोगों की आंखों में धूल झोंककर सरकारी जमीन पर निर्माण कर संपत्ति बेचने की तैयारी थी। सूत्रों के अनुसार, इसमें कुछ जनप्रतिनिधि भी शामिल थे। उन्होंने पहले ही जमीन पर निर्माण कर इसे करोड़ों में बेचने की तैयारी कर ली थी, लेकिन लोगों की शिकायत के बाद सारा मामला खुल गया। जिस जगह नगर निगम की बंजर भूमि पर निर्माण किया जा रहा था, यह औद्योगिक क्षेत्र से सटी हुई है। बताया जा रहा है यहां चहारदीवारी कर कई दुकानों के निर्माण की योजना था। चूंकि, इसमें नगर निगम से जुड़े जनप्रतिनिधियों का भी हस्तक्षेप था, इसलिए शुरुआती निर्माण के दौरान लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा था कि यह निर्माण नगर निगम की ओर से ही कराया जा रहा है। नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया कि जांच में पुष्टि हुई है कि नगर निगम की जमीन पर अवैध रूप से निर्माण किया गया है।
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बृहस्पतिवार को कुछ लोगों ने सहायक नगर आयुक्त से मिलकर नगर निगम की भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत की थी। उन्होंने पत्र सौंपकर एक पार्षद प्रतिनिधि पर कब्जा करने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ताओं में शामिल राजेंद्र चौधरी ने बताया कि पार्षद की ओर से लोगों को भ्रमित कर बताया जा रहा था कि यह सरकारी जमीन है। इस पर नगर निगम की ओर से निर्माण कराया जा रहा है। उनका आरोप था कि इस संबंध में मेयर को भी अवगत कराया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामला संज्ञान में आने के बाद नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने अधिशासी अभियंता रचना पायल के नेतृत्व में सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार प्रीतम सिंह और टैक्स इंस्पेक्टर रवींद्र पंवार समेत तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। शुक्रवार को समिति ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की तो अवैध निर्माण की पुष्टि हुई। समिति की ओर से नगर आयुक्त को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि यह भूमि खसरा संख्या 991 है और नगर निगम की भूमि है। इस पर लगभग ढाई फीट ऊंची ईंटों की नींव भरी गई है, जो अवैध है। नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया कि जांच में निर्माण अवैध पाया गया है। इसे ध्वस्त कराने के आदेश दिए गए हैं।
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...तो अवैध निर्माण के लिए हुई थी करोड़ों में बेचने की डील
सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लोगों की आंखों में धूल झोंककर सरकारी जमीन पर निर्माण कर संपत्ति बेचने की तैयारी थी। सूत्रों के अनुसार, इसमें कुछ जनप्रतिनिधि भी शामिल थे। उन्होंने पहले ही जमीन पर निर्माण कर इसे करोड़ों में बेचने की तैयारी कर ली थी, लेकिन लोगों की शिकायत के बाद सारा मामला खुल गया। जिस जगह नगर निगम की बंजर भूमि पर निर्माण किया जा रहा था, यह औद्योगिक क्षेत्र से सटी हुई है। बताया जा रहा है यहां चहारदीवारी कर कई दुकानों के निर्माण की योजना था। चूंकि, इसमें नगर निगम से जुड़े जनप्रतिनिधियों का भी हस्तक्षेप था, इसलिए शुरुआती निर्माण के दौरान लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा था कि यह निर्माण नगर निगम की ओर से ही कराया जा रहा है। नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया कि जांच में पुष्टि हुई है कि नगर निगम की जमीन पर अवैध रूप से निर्माण किया गया है।
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