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आधी दरों पर जारी 4.5 के कार्यों की मेयर कराएंगे आईआईटी से जांच
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टेंडर की लगभग आधी दरों पर किए गए करीब साढ़े चार करोड़ के निर्माण कार्यों की जांच मेयर गौरव गोयल आईआईटी रुड़की से कराएंगे। उन्होंने नगर निगम के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर निर्देशित किया है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कोर कटिंग सैंपल की आईआईटी से सभी तकनीकी जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट सही आने पर ही भुगतान जारी होगा। उनका कहना है कि सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
एक दिसंबर को नगर निगम की ओर से करीब साढ़े चार करोड़ के 54 निर्माण कार्यों के टेंडर जारी किए गए थे। इनमें अधिकांश कार्य सड़कों के निर्माण से संबंधित हैं, लेकिन इन टेंडरों में निर्माण कार्य के लागत की जितनी राशि दर्शाई गई थी, ठेकेदारों ने इस राशि से करीब 42 फीसदी कम पर इन्हें अपने नाम जारी कराया है। हालांकि, यह प्रक्रिया नियमानुसार है और इससे नगर निगम को भारी बचत भी होगी। वहीं, निर्माण कार्यों की नियमावली के अनुसार आगणन कर टेंडर से जुड़े कार्यों की राशि निर्धारित की जाती है। ऐसे में सवाल उठाए जा रहे हैं कि जो ठेकेदार आधी दरों पर काम करेंगे, वे नियमानुुसार सड़क की गुणवत्ता दे पाएंगे या नहीं।
मेयर गौरव ने बताया कि इससे नगर निगम को बचत होगी। इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन निर्माण के बाद यदि सड़क सालभर में ही टूट जाएगी तो जो भी भुगतान नगर निगम करेगा, वह भी बेकार जाएगा। ऐसे में सड़कों की गुणवत्ता टेंडर के नियम और शर्तों के अनुसार सुनिश्चित कराई जानी आवश्यक है। इसी के मद्देनजर अधिशासी अभियंता को पत्र जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कोर कटिंग सैंपल के जरिये आईआईटी रुड़की से सैंपल का नॉन डिस्ट्रिक्टिव टेस्ट, कंप्रेसिव स्ट्रेंथ, ग्रेडिंग, इंपैक्ट वैल्यू की जांच कराई जाए। पत्र में मेयर की मौजूदगी में टेस्ट कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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एक दिसंबर को नगर निगम की ओर से करीब साढ़े चार करोड़ के 54 निर्माण कार्यों के टेंडर जारी किए गए थे। इनमें अधिकांश कार्य सड़कों के निर्माण से संबंधित हैं, लेकिन इन टेंडरों में निर्माण कार्य के लागत की जितनी राशि दर्शाई गई थी, ठेकेदारों ने इस राशि से करीब 42 फीसदी कम पर इन्हें अपने नाम जारी कराया है। हालांकि, यह प्रक्रिया नियमानुसार है और इससे नगर निगम को भारी बचत भी होगी। वहीं, निर्माण कार्यों की नियमावली के अनुसार आगणन कर टेंडर से जुड़े कार्यों की राशि निर्धारित की जाती है। ऐसे में सवाल उठाए जा रहे हैं कि जो ठेकेदार आधी दरों पर काम करेंगे, वे नियमानुुसार सड़क की गुणवत्ता दे पाएंगे या नहीं।
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मेयर गौरव ने बताया कि इससे नगर निगम को बचत होगी। इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन निर्माण के बाद यदि सड़क सालभर में ही टूट जाएगी तो जो भी भुगतान नगर निगम करेगा, वह भी बेकार जाएगा। ऐसे में सड़कों की गुणवत्ता टेंडर के नियम और शर्तों के अनुसार सुनिश्चित कराई जानी आवश्यक है। इसी के मद्देनजर अधिशासी अभियंता को पत्र जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कोर कटिंग सैंपल के जरिये आईआईटी रुड़की से सैंपल का नॉन डिस्ट्रिक्टिव टेस्ट, कंप्रेसिव स्ट्रेंथ, ग्रेडिंग, इंपैक्ट वैल्यू की जांच कराई जाए। पत्र में मेयर की मौजूदगी में टेस्ट कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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