{"_id":"5d5ae95d8ebc3e898a1bbdc7","slug":"iit-roorkee-roorkee-news-drn3168485194","type":"story","status":"publish","title_hn":"नदी जल विवादों का समाधान राजनीतिक निहितार्थ समझकर हों: राजू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नदी जल विवादों का समाधान राजनीतिक निहितार्थ समझकर हों: राजू
विज्ञापन
आईआईटी रुड़की के जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग की ओर से सोमवार को प्रो. एएन खोसला स्मृति व्याख्यान दिया गया। मुख्य वक्ता आईआईटी रुड़की के पूर्व उपनिदेशक और सिविल इंजीनियर विभाग के पूर्व संकाय सदस्य प्रोफेसर केजी रंगा राजू ने नदी जल विवाद विषय पर अपना संबोधन दिया।
प्रोफेसर राजू ने कहा कि ऐसे विवादों के समाधान में राजनीतिक निहितार्थ को समझकर उसके तकनीकी और कानूनी मुद्दों को हल कराना नितांत आवश्यक होता है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर दो जिलों के बीच वरुणा नहर विवाद, राष्ट्रीय स्तर पर दो राज्यों के बीच कृष्णा नदी जल विवाद के सुलझाने में अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए विवादों को सुलझाने की बारीकियों से अवगत कराया। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर एके चतुर्वेदी ने कहा कि संस्था के लिए गर्व का विषय है कि आज हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐसे विशेषज्ञ के व्यक्तिगत अनुभवों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि आज जब देश में जल विवाद एक प्रमुख समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। ऐसे में प्रोफेसर राजू द्वारा अपने अनुभवों को हम सभी के साथ साझा करने से इस विषय में और अधिक जानकारी मिली है। जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एमएल कंसल ने बताया कि प्रोफेसर एएन खोसला को रुड़की विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति होने के साथ-साथ ओडिशा राज्य के 11वें राज्यपाल होने का गौरव प्राप्त है। उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1954 में पद्य भूषण तथा 1977 में प्रतिष्ठित पद्य विभूषण की उपाधि से नवाजा जा चुका है।
विज्ञापन
प्रोफेसर राजू ने कहा कि ऐसे विवादों के समाधान में राजनीतिक निहितार्थ को समझकर उसके तकनीकी और कानूनी मुद्दों को हल कराना नितांत आवश्यक होता है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर दो जिलों के बीच वरुणा नहर विवाद, राष्ट्रीय स्तर पर दो राज्यों के बीच कृष्णा नदी जल विवाद के सुलझाने में अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए विवादों को सुलझाने की बारीकियों से अवगत कराया। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर एके चतुर्वेदी ने कहा कि संस्था के लिए गर्व का विषय है कि आज हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐसे विशेषज्ञ के व्यक्तिगत अनुभवों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि आज जब देश में जल विवाद एक प्रमुख समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। ऐसे में प्रोफेसर राजू द्वारा अपने अनुभवों को हम सभी के साथ साझा करने से इस विषय में और अधिक जानकारी मिली है। जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एमएल कंसल ने बताया कि प्रोफेसर एएन खोसला को रुड़की विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति होने के साथ-साथ ओडिशा राज्य के 11वें राज्यपाल होने का गौरव प्राप्त है। उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1954 में पद्य भूषण तथा 1977 में प्रतिष्ठित पद्य विभूषण की उपाधि से नवाजा जा चुका है।
विज्ञापन