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गुर्जर रेजीमेंट बनाने के लिए पदयात्रा निकाली
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झबरेड़ा। भारतीय सेना में गुर्जर रेजीमेंट बनवाने, शहीद गुर्जरों के इतिहास को स्कूलों पाठ्यक्रम में शामिल कराने, अन्य मांगों को लेकर शहीदों के गांव की शहीद स्थलों की मिट्टी को कलश में एकत्रित कर यात्रा पदयात्रा शुरू हुई। इस दौरान पदयात्रा का जगह-जगह पर स्वागत किया गया।
एक मार्च से कुंजा बहादुरपुर गांव से पदयात्रा शुरू की गई। पदयात्रा से पूर्व फरवरी माह में शहीद स्मारकों की मिट्टी को एक कलश में एकत्रित किया जाएगा। बीते 22 मार्च को कलश को सिर पर रखकर पदयात्रा निकाली जाएगी। यह पदयात्रा दिल्ली में जंतर मंतर पर पहुंचेगी। इस पदयात्रा का सभी गुर्जर संगठन समर्थन कर रहे हैं। गुर्जर आर्मी के संयोजक चौधरी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि भारत में सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई गुर्जरों ने कुंजा बहादुरपुर गांव से शुरू की थी, अंग्रेजों ने पूरे गांव को शहीद कर दिया था, कुछ लोगों को सुनहरा के बरगद के पेड़ पर लाकर फांसी दे दी थी। ऐसे ही अन्य बहादुर गुर्जरों की गाथाएं बहुत से गांव में हैं, उन बहादुर जांबाज अमर शहीदों की याद में सेना में गुर्जर रेजीमेंट का बनाया जाना बहुत जरूरी है, शहीदों के शौर्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना जरुरी है।
इस मौके पर डॉ. रामपाल सिंह राजपाल सिंह, संदीप कुमार, सोनू कुमार, अंकित चौधरी, प्रमोद चौधरी, संदीप, गौरव, गौतम सिंह, मोहकम सिंह, राहुल चौधरी, जितेंद्र कुमार, सोनू गुर्जर, अनिल कुमार, मकर सिंह, अंकुर राठौर, विक्रम, शिवपाल, भीम गुर्जर आदि मौजूद थे।
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एक मार्च से कुंजा बहादुरपुर गांव से पदयात्रा शुरू की गई। पदयात्रा से पूर्व फरवरी माह में शहीद स्मारकों की मिट्टी को एक कलश में एकत्रित किया जाएगा। बीते 22 मार्च को कलश को सिर पर रखकर पदयात्रा निकाली जाएगी। यह पदयात्रा दिल्ली में जंतर मंतर पर पहुंचेगी। इस पदयात्रा का सभी गुर्जर संगठन समर्थन कर रहे हैं। गुर्जर आर्मी के संयोजक चौधरी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि भारत में सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई गुर्जरों ने कुंजा बहादुरपुर गांव से शुरू की थी, अंग्रेजों ने पूरे गांव को शहीद कर दिया था, कुछ लोगों को सुनहरा के बरगद के पेड़ पर लाकर फांसी दे दी थी। ऐसे ही अन्य बहादुर गुर्जरों की गाथाएं बहुत से गांव में हैं, उन बहादुर जांबाज अमर शहीदों की याद में सेना में गुर्जर रेजीमेंट का बनाया जाना बहुत जरूरी है, शहीदों के शौर्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना जरुरी है।
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इस मौके पर डॉ. रामपाल सिंह राजपाल सिंह, संदीप कुमार, सोनू कुमार, अंकित चौधरी, प्रमोद चौधरी, संदीप, गौरव, गौतम सिंह, मोहकम सिंह, राहुल चौधरी, जितेंद्र कुमार, सोनू गुर्जर, अनिल कुमार, मकर सिंह, अंकुर राठौर, विक्रम, शिवपाल, भीम गुर्जर आदि मौजूद थे।
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