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Roorkee News: उर्स से पहले मेहमानखाना बंद, जायरीनों की सुविधा पर उठे सवाल
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दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उर्स के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीनों के ठहरने की व्यवस्था के लिए दरगाह प्रशासन की ओर से विभिन्न स्थानों पर जर्मन हैंगर लगाए जा रहे हैं। वहीं दरगाह कार्यालय के सामने स्थित मेहमानखाने (मुसाफिरखाने) को टिन के बैरिकेड लगाकर बंद किए जाने से स्थानीय लोगों और जायरीनों में नाराजगी देखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि 13 अगस्त को चांद दिखाई देने के साथ मेहंदी डोरी की रस्म के बाद उर्स का आगाज होने की संभावना है। ऐसे में बारिश के मौसम के बीच मेहमानखाने को बंद किए जाने से बाहर से आने वाले जायरीनों के ठहरने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मेहमानखाने में ठहरे लोगों को भी वहां से हटाकर बाहर कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उर्स के दौरान बड़ी संख्या में जायरीन कलियर पहुंचते हैं और मेहमानखाना उनके लिए महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र रहा है। उनका मानना है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए बने इस भवन को बंद करने के बजाय व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाना चाहिए। हालांकि दरगाह प्रशासन का कहना है कि जायरीनों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
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विभिन्न स्थानों पर जर्मन हैंगर तैयार किए जा रहे हैं ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने में परेशानी न हो। तहसीलदार रुड़की एवं दरगाह प्रबंधक विकास अवस्थी ने बताया कि मेहमानखाने में कुछ लोगों ने लंबे समय से कब्जा जमा रखा था जिसकी लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के आधार पर भवन को खाली कराकर फिलहाल बंद किया गया है। उन्होंने कहा कि उर्स के दौरान भीड़ बढ़ने पर जरूरत के अनुसार मेहमानखाना दोबारा खोल दिया जाएगा।
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बताया जा रहा है कि 13 अगस्त को चांद दिखाई देने के साथ मेहंदी डोरी की रस्म के बाद उर्स का आगाज होने की संभावना है। ऐसे में बारिश के मौसम के बीच मेहमानखाने को बंद किए जाने से बाहर से आने वाले जायरीनों के ठहरने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मेहमानखाने में ठहरे लोगों को भी वहां से हटाकर बाहर कर दिया गया है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि उर्स के दौरान बड़ी संख्या में जायरीन कलियर पहुंचते हैं और मेहमानखाना उनके लिए महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र रहा है। उनका मानना है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए बने इस भवन को बंद करने के बजाय व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाना चाहिए। हालांकि दरगाह प्रशासन का कहना है कि जायरीनों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
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विभिन्न स्थानों पर जर्मन हैंगर तैयार किए जा रहे हैं ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने में परेशानी न हो। तहसीलदार रुड़की एवं दरगाह प्रबंधक विकास अवस्थी ने बताया कि मेहमानखाने में कुछ लोगों ने लंबे समय से कब्जा जमा रखा था जिसकी लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के आधार पर भवन को खाली कराकर फिलहाल बंद किया गया है। उन्होंने कहा कि उर्स के दौरान भीड़ बढ़ने पर जरूरत के अनुसार मेहमानखाना दोबारा खोल दिया जाएगा।