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धूल फांक रही एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीन
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सीएचसी में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे मशीनें तो लगवा दी गई हैं, लेकिन इन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। एक्सरे मशीन चलाने के लिए टेक्नीशियन और अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के चलते मरीजों को निजी अस्पतालों या फिर दूसरे शहरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अस्पताल में दोनों मशीनें इस समय धूल फांक रही है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नारसन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वैसे तो एक्सरे मशीन और अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा है। कुछ समय पहले तक मरीज इन मशीनों का लाभ भी उठा रहे थे, लेकिन कुछ समय से दोनों मशीनें धूल फांक रही हैं। वजह, एक्सरे मशीन चलाने के लिए टेक्नीशियन और अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में दोनों ही मशीनें इस समय बेकार पड़ी हैं। स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले मरीज और दुर्घटना में घायल मरीजों के भी एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। केंद्र पर तैनात चिकित्सक ऐसे मरीजों को या तो निजी अस्पताल रेफर कर रहे हैं या फिर रुड़की सिविल अस्पताल भेजा जा रहा है। ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों और घायलों का समय पर उपचार शुरू नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। यही नहीं, गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए मंगलौर, रुड़की या मुजफ्फरनगर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से दोनों मशीनों के लिए स्टाफ देने की मांग की है। वहीं, सीएचसी की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अचिंतन गर्ग का कहना है कि अस्पताल की ओर से जिलास्तर पर पत्र लिखकर टेक्नीशियन और रेडियोलॉजिस्ट की मांग की गई है।
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नारसन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वैसे तो एक्सरे मशीन और अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा है। कुछ समय पहले तक मरीज इन मशीनों का लाभ भी उठा रहे थे, लेकिन कुछ समय से दोनों मशीनें धूल फांक रही हैं। वजह, एक्सरे मशीन चलाने के लिए टेक्नीशियन और अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में दोनों ही मशीनें इस समय बेकार पड़ी हैं। स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले मरीज और दुर्घटना में घायल मरीजों के भी एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। केंद्र पर तैनात चिकित्सक ऐसे मरीजों को या तो निजी अस्पताल रेफर कर रहे हैं या फिर रुड़की सिविल अस्पताल भेजा जा रहा है। ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों और घायलों का समय पर उपचार शुरू नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। यही नहीं, गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए मंगलौर, रुड़की या मुजफ्फरनगर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से दोनों मशीनों के लिए स्टाफ देने की मांग की है। वहीं, सीएचसी की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अचिंतन गर्ग का कहना है कि अस्पताल की ओर से जिलास्तर पर पत्र लिखकर टेक्नीशियन और रेडियोलॉजिस्ट की मांग की गई है।
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