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डोरेमोन गन से लेकर वाटर टैंक होली के रंग बिखरने को तैयार
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रुड़की में होली को लेकर सजा बाजार।
- फोटो : ROORKEE
रंगों के महा पर्व होली को लेकर बाजार गुलजार बने हैं। होलिका पूजन पर प्रयुक्त होने वाले रंग बिरंगी होली हार व बेर के साथ ही पिचकारी व रंगों की दुकानें जगह-जगह सज गई है।
होली की खरीदारी को लेकर बाजारों में भारी रौनक बनी हुई है। ग्रामीण अंचलों से भी लोग होली की खरीदारी करने के लिए कस्बे में उमड़ रहे हैं। बाजारों में रंगों व चाइनीज पिचकारियों की भरमार है। मेन बाजार व अन्य स्थानों पर लगी रंगों व पिचकारी की दुकानों पर पांच रुपये से लेकर 500 रुपये तक की पिचकारी मौजूद है। डोरेमोन गन, डक व वाटर टैंक सरीखी पिचकारियां बच्चों के विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के मुखौटे भी बच्चों को पसंद बने हुए हैं। इस बार बाजार में चाइनीज गुलाल भी मौजूद है।
होली खेले, पर जरा संभलकर
लक्सर। रंगों के त्योहार पर डॉक्टर सभी को केमिकल युक्त रंगों से बचने की नसीहत दे रहे हैं। उनका कहना है कि केमिकल युक्त रंग त्वचा, आंख, किडनी, लीवर, फेफड़ों में इंफेक्शन पैदा करने के साथ बीमारियों को जन्म देते हैं। इसलिए हर्बल रंगों से होली खेलनी चाहिए। वहीं डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि हरे, काले, नारंगी, सफेद समेत केमिकल रंगों में पारा, क्रोमियम आयोडाइड, कांच के महीन टुकड़े आदि मिलाए जाते हैं। यह रासायनिक तत्व सीधे-सीधे किडनी, लीवर और फेफड़ों में इंफेक्शन पैदा करते हैं। साथ ही बीमारियों को भी जन्म देते हैं। इससे आंखों में धुंधपन, अस्थमा और त्वचा से जुड़ी विभिन्न बीमारियां होने की संभावना रहती है।
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होली की खरीदारी को लेकर बाजारों में भारी रौनक बनी हुई है। ग्रामीण अंचलों से भी लोग होली की खरीदारी करने के लिए कस्बे में उमड़ रहे हैं। बाजारों में रंगों व चाइनीज पिचकारियों की भरमार है। मेन बाजार व अन्य स्थानों पर लगी रंगों व पिचकारी की दुकानों पर पांच रुपये से लेकर 500 रुपये तक की पिचकारी मौजूद है। डोरेमोन गन, डक व वाटर टैंक सरीखी पिचकारियां बच्चों के विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के मुखौटे भी बच्चों को पसंद बने हुए हैं। इस बार बाजार में चाइनीज गुलाल भी मौजूद है।
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होली खेले, पर जरा संभलकर
लक्सर। रंगों के त्योहार पर डॉक्टर सभी को केमिकल युक्त रंगों से बचने की नसीहत दे रहे हैं। उनका कहना है कि केमिकल युक्त रंग त्वचा, आंख, किडनी, लीवर, फेफड़ों में इंफेक्शन पैदा करने के साथ बीमारियों को जन्म देते हैं। इसलिए हर्बल रंगों से होली खेलनी चाहिए। वहीं डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि हरे, काले, नारंगी, सफेद समेत केमिकल रंगों में पारा, क्रोमियम आयोडाइड, कांच के महीन टुकड़े आदि मिलाए जाते हैं। यह रासायनिक तत्व सीधे-सीधे किडनी, लीवर और फेफड़ों में इंफेक्शन पैदा करते हैं। साथ ही बीमारियों को भी जन्म देते हैं। इससे आंखों में धुंधपन, अस्थमा और त्वचा से जुड़ी विभिन्न बीमारियां होने की संभावना रहती है।
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