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आखिर इतने सालों तक मौन क्यों रही भाजपा की सरकार

Tue, 13 Sep 2022 10:09 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 13 Sep 2022 10:09 PM IST
सार

पिरान कलियर स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक में देश-विदेश के लाखों लोगों की अटूट श्रद्धा है।इस पर हजरत बाबा फरीद गंज शकर ने उन्हें सब्र की इंतिहा पार करने वाला यानी साबिर नाम दिया।वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के बयान से लाखों लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है।

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For 12 years, the langar was distributed to the people, did not eat a single grain of food himself

विस्तार

पिरान कलियर स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक में देश-विदेश के लाखों लोगों की अटूट श्रद्धा है। धर्म और जाति का भेदभाव मिटाकर हर साल लाखों श्रद्धालु यहां सजदा करते हैं। सालाना उर्स में पाकिस्तान समेत विभिन्न मुल्कों के जायरीन जियारत करने पहुंचते हैं। साबिर पाक को अल्लाह के वली के रूप में दर्जा मिला है। कहा जाता है कि 12 साल तक पिरान कलियर में गूलर के पेड़ के नीचे भूखे रहकर लंगर बांटते रहे। उनके सब्र की इंतिहा देखकर उन्हें साबिर के नाम से नवाजा गया था।
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मुस्लिम धर्म ग्रंथों में साबिर पाक की इबादत, उनके चमत्कार और सेवाभाव के अनेक किस्से हैं। इसके अनुसार उनका जन्म करीब 810 वर्ष पूर्व अफगानिस्तान के हिरात शहर में हुआ था। तब साबिर का पैदाइशी नाम अलाउद्दीन अली अहमद था। 12 वर्ष की उम्र में ही इनके वालिद हजरत अब्दुल रहीम दुनिया से चले गए। परिवार की माली हालत काफी खराब हो चुकी थी तब साबिर पाक की तालीम के लिए इनकी मां बीबी जमीला इन्हें पाकिस्तान के पाक पटट्न शरीफ में अपने भाई हजरत बाबा फरीद गंज शकर के यहां छोड़कर लौट गई।
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बताया जाता है कि तब बाबा फरीद ने साबिर पाक को लंगर बांटने का हुकुम दिया ताकि वे खुद भी खाना खाते रहें। अलाउद्दीन अली अहमद 12 वर्षों तक लंगर बांटते रहे और खुद अन्न का एक दाना नहीं खाया। जब अलाउद्दीन अली अहमद की वालिदा वापस अपने भाई बाबा फरीद गंज शकर के पास पहुंची तो बेटा सूखकर कांटा हो चुका था। जब बेटे से पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें तो लंगर बांटने का आदेश दिया गया था, खाने का नहीं। इस पर हजरत बाबा फरीद गंज शकर ने उन्हें सब्र की इंतिहा पार करने वाला यानी साबिर नाम दिया। साथ ही अपना खलीफा यानी उत्तराधिकारी घोषित कर दिया और इसके बाद पिरान कलियर भेज दिया।
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यहां भी साबिर पाक की जुबान से निकले शब्द पत्थर की लकीर बनने लगे। कलियर में जंगलों के बीच स्थित गूलर के पेड़ के नीचे साबिर पाक ने इबादत शुरू की। उनके शरीर पर दीमक तक लग गई। इस पर बाबा फरीद ने स्वयं के मुरीद होने आए हजरत बाबा शमसुद्दीन को साबिर पाक के पास भेजा लेकिन यहां आकर बाबा शमसुद्दीन उनके मुरीद हो गए। 692 हिजरी 13 रबीउलअव्वल को इनका दुनिया से पर्दा हो गया। इसके करीब दो सौ वर्ष बाद शाह अब्दुल कुद्दुस गंगोही ने साबिर पाक की दरगाह में उर्स मनाने की शुरुआत की। तब से अब तक कलियर में हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक का उर्स मनाया जाता है। इसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा नौचंदी जुमेरात और अन्य तमाम मौके पर भी साबिर पाक में बड़ी संख्या में जायरीन जुटते हैं।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स की ओर से पिरान कलियर को लेकर दिए गए बयान पर क्षेत्र समेत तमाम जनप्रतिनिधियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने एक धार्मिक स्थल को लेकर इस तरह के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे बदनाम करने की साजिश बताया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि पिछले कई सालों से राज्य में भाजपा की सरकार है तो अब तक मौन क्यों रही।
पिरान कलियर नशाखोरी, मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति का अड्डा बन गया है। यह ज्ञान भाजपा प्रवक्ता को वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनने के बाद प्राप्त हुआ। कलियर शरीफ आए दिन मेले होने के कारण अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहता है। एसएसपी, सीओ रुड़की और एसपी देहात रुड़की कार्यालय 10 मिनट की दूरी पर है। भाजपा प्रवक्ता ने निजी राजनीति चमकाने के लिए कलियर शरीफ को बदनाम करने का काम किया है।
- काजी निजामुद्दीन, पूर्व विधायक मंगलौर
पिरान कलियर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के बयान से लाखों लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है। यदि कलियर में पहले से ही अपराध हो रहे थे तो अब तक सरकार मौन क्यों रही। साफ है कि साजिश के तहत धार्मिक स्थल को बदनाम किया जा रहा है। इसे किसी सूरत में बरदाश्त नहीं किया जाएगा।
-फुरकान अहमद, विधायक पिरान कलियर
साबिर पाक की वजह से ही पिरान कलियर का वजूद है। वहां हर धर्म के लोग पहुंचते हैं। इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल गलत है। हिंदुस्तान में कोई एक भी ऐसी जगह नहीं है जहां अपराध न हों। पिरान कलियर को लेकर इस तरह की बयानबाजी कहां तक जायज कही जा सकती है।
- अनवर जमाल काजमी, समाजसेवी
यह पिरान कलियर को बदनाम करने की साजिश है। सच्चाई वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स के दावों के विपरीत है। चंद घटनाओं से पूरे क्षेत्र को बदनाम नहीं किया जा सकता।
- नाजिम त्यागी, कांग्रेस सभासद
इस तरह के बयानों से बचना चाहिए। यदि आरोपों में किसी तरह वास्तविकता भी है तो उसे सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। इससे अच्छा होता कि इन समस्याओं को जिम्मेदार अफसरों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से दूर किया जाता।
- दानिश, सभासद
सियासत से हटकर जनता के लिए सोचना होगा : नूरी
वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स को पत्र भेजने वाले दारुल उलूम कादरिया सबरिया के प्रबंधक मौलाना गुलाम नबी नूरी ने बताया कि करीब तीन साल पहले उनके मदरसे के बाहर तमाम झुग्गी-झोपड़ियां थीं। इन झोपड़ियों में और इनकी आड़ में असामाजिक तत्व देर रात तक इलाके में मंडराते थे। तब यहां आने में भी डर लगता था। तब उन्होंने तत्कालीन एडीजी को पत्र भेजा। इसके बाद प्रशासन ने सभी झोपड़ियों को हटाया। उन्होंने बताया कि उसी दौरान उनके मदरसे के पास एक गेस्ट हाउस था। उसमें गलत काम होते थे और मदरसे के बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था। मजबूरी में उन्हें वह गेस्ट हाउस ही खरीदना पड़ा। अब भी कई गेस्ट हाउस में बाहर के लोग बेरोकटोक पहुंच रहे हैं, जिनसे माहौल खराब होता है। मौलाना का कहना है कि अपराध, अपराध ही रहेगा, चाहे वह किसी भी धर्म में हो। सभी को सियासत से हटकर जनता के हित में सोचना होगा। व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन की एक कमेटी बनाई जानी चाहिए। जो क्षेत्र की सभी गतिविधियों पर नजर रखे और कार्रवाई करा सके।
जायरीन और स्थानीय लोगों की देन नहीं है नशा : शफक्कत अली
पिरान कलियर नगर पंचायत के चेयरमैन प्रतिनिधि शफक्कत अली का कहना है कि जिस तरह अवैध कारोबार की बात कही गई है वह पूरे प्रदेश में हैं फिर कलियर को ही बदनाम क्यों किया जा रहा है। जहां गलत होता है, पुलिस प्रशासन कार्रवाई करता है। बालिग बच्चों के घूमने पर कानून भी कुछ नहीं कर सकता। रही बात कलियर पर बुलडोजर चलाने की तो सबसे ज्यादा वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर देहरादून में कब्जा है। बुलडोजर चलाना है तो सबसे पहले वहां चलाएं।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कई साल पहले नशे का कारोबार काफी बढ़ गया था। इस पर धीरे-धीरे अंकुश लगा है। नशे के सामान की खरीद और बिक्री से जियारत करने आने वाले लोगों का लेना देना नहीं है। पिरान कलियर में मुसाफिरखाना और रैन बसेरे में तकरीबन एक हजार लोग फर्श पर बिस्तर डालकर रहते हैं। इनमें से अधिकांश ऐसे हैं जिन्हें छह माह से साल भर तक हो चुका है। इनका दरगाह प्रबंधन न तो रजिस्ट्रेशन में एंट्री करता है और न ही इनके बारे में कोई जानकारी रखता है। ये अपराध की दृष्टि से गलत है। पिरान कलियर क्षेत्र में सैकड़ों झुग्गी-झोपड़ियां है। इनमें सालों से फकीर भी रह रहे हैं और परिवार के साथ भी लोग रहते हैं। नशे का धंधा करने वाले लोग इन लोगों को अपना आसानी से निशाना बना लेते हैं। ऐसे में जन जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है। इसके लिए नगर पंचायत, दरगाह प्रशासन और वक्फ बोर्ड को मिलकर काम करना चाहिए।
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