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अब जान सकेंगे, आपके शहर की हवा में हैं कितना प्रदूषण
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रुड़की। अगले महीने से रुड़की वाले भी जान सकेंगे कि वह जिस हवा में सांस ले रहे हैं, उसमें वायु प्रदूषण का स्तर कितना है। रुड़की स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में वायु प्रदूषण की जांच के लिए स्टेशन स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए कुछ मशीनें भी मंगवा ली गई हैं। बताया जा रहा है कि 15 दिसंबर तक प्रदूषण की जांच का काम शुरू हो जाएगा।
अभी तक जिले में मात्र हरिद्वार शहर और सिडकुल में ही वायु प्रदूषण की जांच की व्यवस्था है। जबकि, रुड़की में हर दिन हाईवे पर लगने वाले जाम के चलते वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। पर, शहर में वायु प्रदूषण जांच की व्यवस्था नहीं होने से आज तक किसी को यह जानकारी नहीं है कि वे जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वह कितनी शुद्ध है। इसे देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वायु की गुणवत्ता की जांच शुरू करने जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्रीय कार्यालय में स्टेशन स्थापित करने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपये की मशीनें खरीदी गई हैं। स्टेशन से एक सप्ताह में करीब 48 घंटे का डाटा रिकॉर्ड किया जाएगा। उम्मीद है 15 दिसंबर तक जांच शुरू हो जाएगी। इसके बाद हर दिन का वायु प्रदूषण का डाटा जारी किया जा सकेगा।
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वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)
दरअसल, वायु में फैले उन कणों की प्रदूषण विभाग जांच करता है, जो हमारी सांस के जरिये शरीर के भीतर पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदूषण के इन कणों में पीएम 10 अपेक्षाकृत मोटे कण होते हैं, जबकि पीएम 2.5 इससे महीन होते हैं। यह सांस के जरिये आसानी से शरीर के भीतर चले जाते हैं। ये कण सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के रूप में वायु में मौजूद रहते हैं। ऐसे में जब वायु प्रदूषण की जांच करते हैं तो इसके लिए इंडेक्स का सहारा लिया जाता है। साथ ही पीएम 10, पीएम 2.5, सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड का औसत निकाला जाता है। इस औसत वैल्यू को वायु प्रदूषण सूचकांक यानी एक्यूआई कहा जाता है। जो प्रदूषण के स्तर का एक पैमाना है।
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अभी तक जिले में मात्र हरिद्वार शहर और सिडकुल में ही वायु प्रदूषण की जांच की व्यवस्था है। जबकि, रुड़की में हर दिन हाईवे पर लगने वाले जाम के चलते वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। पर, शहर में वायु प्रदूषण जांच की व्यवस्था नहीं होने से आज तक किसी को यह जानकारी नहीं है कि वे जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वह कितनी शुद्ध है। इसे देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वायु की गुणवत्ता की जांच शुरू करने जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्रीय कार्यालय में स्टेशन स्थापित करने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपये की मशीनें खरीदी गई हैं। स्टेशन से एक सप्ताह में करीब 48 घंटे का डाटा रिकॉर्ड किया जाएगा। उम्मीद है 15 दिसंबर तक जांच शुरू हो जाएगी। इसके बाद हर दिन का वायु प्रदूषण का डाटा जारी किया जा सकेगा।
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वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)
दरअसल, वायु में फैले उन कणों की प्रदूषण विभाग जांच करता है, जो हमारी सांस के जरिये शरीर के भीतर पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदूषण के इन कणों में पीएम 10 अपेक्षाकृत मोटे कण होते हैं, जबकि पीएम 2.5 इससे महीन होते हैं। यह सांस के जरिये आसानी से शरीर के भीतर चले जाते हैं। ये कण सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के रूप में वायु में मौजूद रहते हैं। ऐसे में जब वायु प्रदूषण की जांच करते हैं तो इसके लिए इंडेक्स का सहारा लिया जाता है। साथ ही पीएम 10, पीएम 2.5, सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड का औसत निकाला जाता है। इस औसत वैल्यू को वायु प्रदूषण सूचकांक यानी एक्यूआई कहा जाता है। जो प्रदूषण के स्तर का एक पैमाना है।
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