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हवाओं के रूप में ग्लोबल वार्मिंग का ग्लेशियर पर पड़ रहा असर
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ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव ग्लेशियरों पर गर्म हवाओं के रूप में पड़ रहा है। गंगोत्री ग्लेशियर पर वर्ष भर में ठंडी हवाओं के मुकाबले दस प्रतिशत ज्यादा गर्म हवाएं बह रही हैं। ये ग्लेशियरों को पिघलाने और इनके पीछे खिसकने के कारणों में से एक है। ये बात रुड़की स्थित जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) के वैज्ञानिकों की ओर से गंगोत्री ग्लेशियर पर किए गए अध्ययन में सही साबित हुई है।
दुनिया भर के वैज्ञानिक बढ़ते तापमान को लेकर चिंतित है। वहीं कई नए शोधों में यह बात भी सामने आ रही है कि गर्म हवाओं ने अपना दायरा बढ़ाया है। इसके चलते जो क्षेत्र ठंड के लिए जाने जाते हैं उनमें भी पहले की अपेक्षा गर्मी का अहसास हो रहा है। इसकी जद में ग्लेशियर भी हैं। वैैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान बढ़ने से गर्म हवाएं बह रही हैं जो ग्लेशियर को पिघला रही हैं।
एनआईएच के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोहर अरोड़ा ने बताया कि गर्म हवाएं ग्लेशियर को नुकसान पहुंचाती हैं। करीब डेढ़ साल पहले गंगोत्री में बहने वाली हवाओं के तापमान को लेकर किए गए एक अध्ययन में केटाबेटिक एवं एनाबेटिक विश्लेषण किया गया। जब ठंड बढ़ती है तो हवाएं केटाबेटिक यानी ऊपर से नीचे की ओर बहती है और जब गर्मी बढ़ती है तो हवाएं एनाबेटिक यानी नीचे से ऊपर की ओर ग्लेशियर के स्लोप में प्रवाह करती है। अध्ययन में पाया गया कि गंगोत्री ग्लेशियर में साल भर में बहने वाली अपेक्षाकृत गर्म हवाओं का रुख 60 प्रतिशत नीचे से ऊपर की ओर है। इसके मुकाबले 40 प्रतिशत हवाओं का रुख ऊपर से नीचे की ओर होता है। उन्होंने बताया कि हवा की प्रकृति का असर ग्लेशियर पर पड़ता है। हवा तेज चलने से भी ग्लेशियर पिघलते हैं और घाटी में नीचे से ऊपर की ओर बहने वाली गर्म हवाएं भी ग्लेशियर पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।
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दुनिया भर के वैज्ञानिक बढ़ते तापमान को लेकर चिंतित है। वहीं कई नए शोधों में यह बात भी सामने आ रही है कि गर्म हवाओं ने अपना दायरा बढ़ाया है। इसके चलते जो क्षेत्र ठंड के लिए जाने जाते हैं उनमें भी पहले की अपेक्षा गर्मी का अहसास हो रहा है। इसकी जद में ग्लेशियर भी हैं। वैैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान बढ़ने से गर्म हवाएं बह रही हैं जो ग्लेशियर को पिघला रही हैं।
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एनआईएच के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोहर अरोड़ा ने बताया कि गर्म हवाएं ग्लेशियर को नुकसान पहुंचाती हैं। करीब डेढ़ साल पहले गंगोत्री में बहने वाली हवाओं के तापमान को लेकर किए गए एक अध्ययन में केटाबेटिक एवं एनाबेटिक विश्लेषण किया गया। जब ठंड बढ़ती है तो हवाएं केटाबेटिक यानी ऊपर से नीचे की ओर बहती है और जब गर्मी बढ़ती है तो हवाएं एनाबेटिक यानी नीचे से ऊपर की ओर ग्लेशियर के स्लोप में प्रवाह करती है। अध्ययन में पाया गया कि गंगोत्री ग्लेशियर में साल भर में बहने वाली अपेक्षाकृत गर्म हवाओं का रुख 60 प्रतिशत नीचे से ऊपर की ओर है। इसके मुकाबले 40 प्रतिशत हवाओं का रुख ऊपर से नीचे की ओर होता है। उन्होंने बताया कि हवा की प्रकृति का असर ग्लेशियर पर पड़ता है। हवा तेज चलने से भी ग्लेशियर पिघलते हैं और घाटी में नीचे से ऊपर की ओर बहने वाली गर्म हवाएं भी ग्लेशियर पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।
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