खतरे की जद में घाड़ क्षेत्र के गांव
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घाड़ क्षेत्र के 24 से अधिक गांव बाढ़ के मुहाने पर है। कुछ दिन पूर्व ही बिना मानसून की आई बारिश से रायघटी नदी उफान पर आई थी। उस दौरान भी इसकी बीच धारा में एक ट्रैक्टर ट्राली फंस गई थी। करीब एक घंटे बाद जेसीबी की मदद से ट्रॉली व चालक को बमुश्किल से निकाला गया था। खनन सामग्री से लदा एक ट्रक भी पलट गया था। इसके अलावा सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न होने से सब्जी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। बाढ़ से सुरक्षा के लिए करीब एक दर्जन गांवों को तटबंध की सख्त जरूरत है। लेकिन इसके प्रति प्रदेश सरकार गंभीर नहीं दिखती। पिछली बरसात में भी क्षेत्र में बाढ़ ने कहर बरपाया था। लेकिन सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए। जिन जगहों पर सिंचाई विभाग की ओर से छोटे-छोटे तटबंध भी बनाए गए थे। उनमें से अधिकतर तटबंधों के पत्थर खनन माफिया निकालकर ले गए हैं। ऐसे में घाड़ क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलता है हरिपुर टोंगिया गांव
रुड़की/बुग्गावाला। घाड़ क्षेत्र का हरिपुर टोंगिया गांव हर साल बाढ़ की विभिषिका झेलता है। जब सोलानी नदी उफान पर आती है तो इसका पानी न केवल गांव की आबादी में घुसकर तबाही मचाता है बल्कि सैकड़ों बीघा कृषि भूमि को भी बर्बाद कर देता है। यही हाल तेलपुरा, हसनावाला, गांजा सहित तमाम गांवों का है।
घाड़ क्षेत्र में शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाले मोहंड रो, रजवा, रायघटी, धूलिया और सोलानी नदी बरसात के दिनों में अपने प्रचंड रूप में आती है। खतरे की बात यह है कि पहाड़ों से पानी आने के कारण इसका बहाव तेज होता है। नदियों पर तटबंध न होने के कारण पानी दर्जनों गांवों और सैकड़ों बीघा कृषि भूमि को अपनी आगोश में ले लेता है। पिछले साल भी कई गांवों को बाढ़ की मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। हरिपुर टोंगिया में बाढ़ का सबसे ज्यादा खतरा बना रहता है। इसी गांव में पिछले साल लोगों को बाढ़ के चलते छतों पर रात गुजारनी पड़ी। घर में रखा सारा सामान तबाह हो गया था। गन्ना, मक्का और धान सहित सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गई थी। कमोबेश यही स्थित औरंगजेब गांव और इसके आसपास के क्षेत्र की है। अब फिर से मानसून की दस्तक के साथ ही गांव के लोगों की धड़कनें बढ़ने लग लगी हैं। इसके अलावा तेलपुरा, बुग्गावाला, गांजा, हसनावाला आदि दर्जनों गांव पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इस समस्या से निजात के लिए मोहंड रो, रजवा, सोलानी, बीन, रायघटी और धूलिया नदी में तटबंध बनाए जाने की सख्त जरूरत है।
यहां तटबंधों की ज्यादा जरूरत
-मोहंड और रजवा नदी में तेलपुरा के पास पांच किलोमीटर लंबे तटबंध की सख्त जरूरत है। इसके अलावा रजवा नदी में बुग्गावाला मार्ग, गांजा और हसनवाला के समीप तटबंध जरूरी है। बुग्गावाला में धूलिया नदी पर भी तटबंध की मांग लंबे समय से ग्रामीण कर रहे हैं। कुल 15 किलोमीटर तटबंध बनाकर क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित किया जा सकता है। हालांकि बादीवाला और नौकराग्रंट में करीब दस किलोमीटर तटबंध बन गए हैं। इससे करीब छह गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है।
छोटे तटबंध बने, माफिया उखाड़ ले गए पत्थर
-सिंचाई विभाग ने क्षेत्र में जगह-जगह तीन-तीन मीटर के तटबंध बनाए थे। इस पर लाखों रुपये खर्च हुआ था। लेकिन खनन माफिया खनन के लालच में अधिकतर तटबंधों से पत्थर उखाड़ कर ले गए हैं। अब फिर गांवों और खेतों में बाढ़ का पानी घुसने का खतरा बना हुआ है। खेड़ी शिकोहपुर गांव किनारे 25 छोटे तटबंध बनाए गए थे। बंजारे वाला में 60, औरंगजेबपुर में 40, हसनावाला में 30 के करीब छोटे-छोटे मुंडेर की तरह के तटबंध बनाए गए थे। इनमें लगे पत्थरों को तारों से बांधा गया था। लेकिन खनन माफिया इन्हें उखाड़कर पत्थर ले गया है।
इनका कहना है
केंद्र की ओर से पर्याप्त सहयोग न मिलने के कारण प्रदेश सरकार को विकास कार्यों को अमल में लाने के कारण दिक्कतें आ रही है। बावजूद इसके कुछ जगहों पर तटबंध का निर्माण कराया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में क्षेत्र में कई जगहों के लिए तटबंध निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी है। जल्द इन पर काम शुरू कराया जाएगा।
-ममता राकेश, विधायक खानपुर
बाढ़ के मद्देनजर तटबंध बनाने के लिए सरकार को इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। बजट जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद है। जहां छोटे तटबंधों पर खनन माफिया की ओर से पत्थर उखाड़ कर चोरी कर लिए गए हैं। उनकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-विकास कौशिक, जेई सिंचाई विभाग