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बारिश का मौसम बिगड़ेगा फसलों का मिजाज
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नारसन क्षेत्र में गन्ने की बुआई के तैयार किए गए खेत में भरा बारिश का पानी।
- फोटो : ROORKEE
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बेमौसमी बारिश फसलों को प्रभावित कर सकती है। सब्जियों की फसलों पर बारिश की मार ज्यादा पड़ने के आसार नजर आ रहे हैं। इस समय सब्जियों की बुआई चरम पर है लेकिन तापमान गिरने से बीजों को अंकुरित होने में ज्यादा समय लगेगा। इससे सब्जियों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ना तय है।
कुछ दिन से निकल रही तेज धूप और मौसम में आए परिवर्तन के चलते किसानों ने मौसमी सब्जियों की बुआई की तैयारी शुरू कर दी थी। इस समय भिंडी, तोरी, करेला, लौकी, शिमला मिर्च, टिंडे की बुआई का समय चल रहा है। किसान बुआई के लिए खेतों में दिन-रात जुटे हैं। वहीं शनिवार को हुए मौसम में बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी हैं। शनिवार को कुछ इलाकों में बूंदाबांदी हुई। इससे तापमान में गिरावट आई है। तापमान की ये गिरावट मौसमी सब्जियों की बुआई पर बुरा असर डालेगी। किसान रघुवीर सिंह, संतराम, नाथू सिंह, महिपाल, शाहबाद, सत्यनारायण आदि का कहना है कि वे सब्जियों की बुआई की तैयारी कर रहे हैं लेकिन शनिवार की बारिश ने उनकी बुआई कम से कम पांच दिन पीछे हटा दी है। वहीं इस बारिश से मौसम में ठंडक बढ़ गई है जो सब्जियों की बुआई के लिए नुकसानदायक साबित होगी।
उद्यान अधिकारी राजेश प्रसाद जसोला का कहना कि इस समय की बारिश से तापमान में गिरावट आ जाएगी। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत सब्जियों के बीज अंकुरित होने में आएगी। ठंडा मौसम होने के चलते बीज अंकुरित होने में ज्यादा समय लेगा। वहीं जो बीज अंकुरित हो चुके हैं उनके ठंडे मौसम के चलते खराब होने का भी डर बना रहेगा।
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फलों की पैदावार पर भी पड़ेगा असर
इस समय हरिद्वार में करीब 11 हजार हेक्टेयर में विभिन्न फलों की बागवानी हो रही है। सात हजार हेक्टेयर में केवल आम के ही बाग हैं हैं। लीची 900 हेक्टेयर में है। इस समय जो बारिश के चलते मौसम परिवर्तन हुआ है इसका असर आम और लीची की पैदावार पर भी पड़ेगा। कुछ दिन लगातार हुई गर्मी के चलते आम के पेड़ों पर बौर आना शुरू हो गया था। ये प्रक्रिया भी अब धीमी पड़ जाएगी।
क्षेत्र में रात से हो रही बूंदाबांदी से खेती किसानी के काम प्रभावित हो गए हैं। गन्ना कोल्हुओं का ईंधन भीगने से गन्ना पेराई का काम बंद हो गया है। वहीं सरसों की कटाई व गन्ने की वसंत कालीन बुआई भी बाधित हो गई है। बेमौसमी बारिश किसानों के लिए आफत बनकर बरस रही है। इकबालपुर, झबरेड़ा क्षेत्र में शुक्रवार रात से बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। शनिवार सुबह हुई बारिश ने किसानों के खेत खलिहानों के सब कार्य ठप कर दिए हैं। ईंधन भीगने से कोल्हुओं के पहिए थम गए हैं। सहायक कृषि विकास अधिकारी सतेन्द्र कुमार ने बताया कि बारिश से फायदा कम नुकसान ज्यादा है। गेहूं व सरसों के खेतों में बारिश के पानी की निकासी का प्रबंधन जरूर रखें।
बारिश और हवा से गेहूं की फसल को नुकसान
नारसन। शुक्रवार देर रात क्षेत्र में कहीं हल्की तो कहीं जमकर बारिश हुई। किसानों का कहना है कि तेज हवा और बारिश से गेहूं की अगेती फसल जमीन पर बिछ गई है। किसान प्रमोद कुमार, अंकित, सुरेश, किरणपाल, संजीव, राम कुमार का कहना है कि तेज बारिश के करण गन्ना बुआई के लिए तैयार खेत जलमग्न हो गए। बुआई के लिए तैयार खेत में पानी आने से गन्ने की बुआई में देरी होगी। किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल बिछ गई है।
गहराया चारे का संकट
इस बार फरवरी में अधिक बरसात होने के चलते पशु चारे के लिए खेतों में खड़ी बरसीम की बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। साथ ही जनवरी में चारे के लिए बोई जाने वाली मक्का और सरसों की भी बुवाई नहीं हो पाई है। इस बार भूसे के दाम भी और वर्षों के मुकाबले 2 गुना बढ़े हुए हैं। पशुपालक रकम सिंह, दिनेश कुमार, मनोज कुमार, समय सिंह, संदीप सैनी, राजकुमार, प्रदीप कुमार, सोमपाल सिंह आदि का कहना है कि कभी सूखा तो कभी भारी बरसात ने खेतों में फसलें उगाना मुश्किल कर दिया है। वहीं इस बार जनवरी-फरवरी में भूसे के दाम 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिल जाता था लेकिन इस बार 1300 रुपये प्रति क्विंटल हो रहा है।
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कुछ दिन से निकल रही तेज धूप और मौसम में आए परिवर्तन के चलते किसानों ने मौसमी सब्जियों की बुआई की तैयारी शुरू कर दी थी। इस समय भिंडी, तोरी, करेला, लौकी, शिमला मिर्च, टिंडे की बुआई का समय चल रहा है। किसान बुआई के लिए खेतों में दिन-रात जुटे हैं। वहीं शनिवार को हुए मौसम में बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी हैं। शनिवार को कुछ इलाकों में बूंदाबांदी हुई। इससे तापमान में गिरावट आई है। तापमान की ये गिरावट मौसमी सब्जियों की बुआई पर बुरा असर डालेगी। किसान रघुवीर सिंह, संतराम, नाथू सिंह, महिपाल, शाहबाद, सत्यनारायण आदि का कहना है कि वे सब्जियों की बुआई की तैयारी कर रहे हैं लेकिन शनिवार की बारिश ने उनकी बुआई कम से कम पांच दिन पीछे हटा दी है। वहीं इस बारिश से मौसम में ठंडक बढ़ गई है जो सब्जियों की बुआई के लिए नुकसानदायक साबित होगी।
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उद्यान अधिकारी राजेश प्रसाद जसोला का कहना कि इस समय की बारिश से तापमान में गिरावट आ जाएगी। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत सब्जियों के बीज अंकुरित होने में आएगी। ठंडा मौसम होने के चलते बीज अंकुरित होने में ज्यादा समय लेगा। वहीं जो बीज अंकुरित हो चुके हैं उनके ठंडे मौसम के चलते खराब होने का भी डर बना रहेगा।
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फलों की पैदावार पर भी पड़ेगा असर
इस समय हरिद्वार में करीब 11 हजार हेक्टेयर में विभिन्न फलों की बागवानी हो रही है। सात हजार हेक्टेयर में केवल आम के ही बाग हैं हैं। लीची 900 हेक्टेयर में है। इस समय जो बारिश के चलते मौसम परिवर्तन हुआ है इसका असर आम और लीची की पैदावार पर भी पड़ेगा। कुछ दिन लगातार हुई गर्मी के चलते आम के पेड़ों पर बौर आना शुरू हो गया था। ये प्रक्रिया भी अब धीमी पड़ जाएगी।
क्षेत्र में रात से हो रही बूंदाबांदी से खेती किसानी के काम प्रभावित हो गए हैं। गन्ना कोल्हुओं का ईंधन भीगने से गन्ना पेराई का काम बंद हो गया है। वहीं सरसों की कटाई व गन्ने की वसंत कालीन बुआई भी बाधित हो गई है। बेमौसमी बारिश किसानों के लिए आफत बनकर बरस रही है। इकबालपुर, झबरेड़ा क्षेत्र में शुक्रवार रात से बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। शनिवार सुबह हुई बारिश ने किसानों के खेत खलिहानों के सब कार्य ठप कर दिए हैं। ईंधन भीगने से कोल्हुओं के पहिए थम गए हैं। सहायक कृषि विकास अधिकारी सतेन्द्र कुमार ने बताया कि बारिश से फायदा कम नुकसान ज्यादा है। गेहूं व सरसों के खेतों में बारिश के पानी की निकासी का प्रबंधन जरूर रखें।
बारिश और हवा से गेहूं की फसल को नुकसान
नारसन। शुक्रवार देर रात क्षेत्र में कहीं हल्की तो कहीं जमकर बारिश हुई। किसानों का कहना है कि तेज हवा और बारिश से गेहूं की अगेती फसल जमीन पर बिछ गई है। किसान प्रमोद कुमार, अंकित, सुरेश, किरणपाल, संजीव, राम कुमार का कहना है कि तेज बारिश के करण गन्ना बुआई के लिए तैयार खेत जलमग्न हो गए। बुआई के लिए तैयार खेत में पानी आने से गन्ने की बुआई में देरी होगी। किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल बिछ गई है।
गहराया चारे का संकट
इस बार फरवरी में अधिक बरसात होने के चलते पशु चारे के लिए खेतों में खड़ी बरसीम की बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। साथ ही जनवरी में चारे के लिए बोई जाने वाली मक्का और सरसों की भी बुवाई नहीं हो पाई है। इस बार भूसे के दाम भी और वर्षों के मुकाबले 2 गुना बढ़े हुए हैं। पशुपालक रकम सिंह, दिनेश कुमार, मनोज कुमार, समय सिंह, संदीप सैनी, राजकुमार, प्रदीप कुमार, सोमपाल सिंह आदि का कहना है कि कभी सूखा तो कभी भारी बरसात ने खेतों में फसलें उगाना मुश्किल कर दिया है। वहीं इस बार जनवरी-फरवरी में भूसे के दाम 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिल जाता था लेकिन इस बार 1300 रुपये प्रति क्विंटल हो रहा है।