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गजब : 151 का आरोपी का बना मित्र पुलिस का ‘सारथी’
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की/बुग्गावाला। बुग्गावाला थाने में मित्र पुलिस का नया कारनामा सामने आया है। दरअसल, 151 के जिस आरोपी को पेशी पर ले जाने के लिए वाहन की पिछली सीट पर बैठाना था, पुलिस ने उसे ही अपना ‘सारथी’ बना लिया और बगल में बैठा सिपाही तमाशबीन बनकर यह नजारा देखता रहा। मीडियाकर्मियों को इसकी भनक लगी तो आननफानन में आरोपी को चालक की सीट से उतारकर पीछे बैठाया गया। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस गलती से उसके चालक की सीट पर बैठने का बहाना बना रही है।
पुलिस अधिकारी लगातार अधीनस्थों को ड्यूटी में लापरवाही न बरतने का फरमान जारी करते हैं, लेकिन अधीनस्थों को न अधिकारियों का डर है और न ही कानून व्यवस्था बिगड़ने का। ऐसा ही एक मामला सोमवार को बुग्गावाला थाने में देखने को मिला। दरअसल, क्षेत्र के गांव गोकलवाला में ग्राम समाज की भूमि कब्जाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों में जमकर गालीगलौज हुई और नौबत मारपीट तक जा पहुंची। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के 15 लोगों अब्दुल कादिर, साजिद, नाजिर, रिजवान, जुबैर, अजीम, फरमान, शाहवान, गुलशेर, मोबिन, हसन, राकिब, अब्दुल, दिलशाद, सावे, वसीम के खिलाफ शांतिभंग में कार्रवाई की। इसके बाद आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के लिए पुलिस ने एक प्राइवेट गाड़ी को थाने मंगवाया।
गाड़ी में सभी आरोपियों को बैठाया गया, लेकिन वाहन चलाने के लिए किसी पुलिसकर्मी या चालक की बजाय वसीम नामक आरोपी को ही ड्राइविंग सीट पर बैठा दिया। उसके बगल में बैठा एक सिपाही तमाशबीन बनकर पूरा नजारा देखता रहा। आरोपी ने जैसे ही गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा, तभी कुछ मीडियाकर्मी वहां पहुंच गए। जिस शख्स पर पुलिस ने कार्रवाई की, उसे गाड़ी चलाता देख मीडियाकर्मियों ने सवाल किए तो पुलिस में अफरातफरी मच गई। तुरंत उसे चालक की सीट से हटाकर पीछे बैठाया गया, लेकिन इस कारनामे ने सुरक्षा संबंधी तमाम सवालों को लेकर पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह भी है कि क्या पुलिस खुद ही सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है? या अधीनस्थों के लिए आला अधिकारियों के आदेश कोई मायने नहीं रखते हैं, खुद वाहन चलाकर आरोपी फरार भी हो सकता था।
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आरोपी गलती से चालक की सीट पर बैठ गया था। जानकारी होने पर उसे तुरंत चालक की सीट से नीचे उतारकर पीछा बैठाया गया। -नंद किशोर ग्वाड़ी, एसओ बुग्गावाला
सिपाही को गाड़ी चलानी नहीं आती है तो जो भी गाड़ी चलाना जानता है, वह चलाकर ले जा सकता है, इसमें कुछ गलत नहीं है। फिर भी मामले की जानकारी ली जाएगी। -जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी, एसएसपी, हरिद्वार
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पुलिस अधिकारी लगातार अधीनस्थों को ड्यूटी में लापरवाही न बरतने का फरमान जारी करते हैं, लेकिन अधीनस्थों को न अधिकारियों का डर है और न ही कानून व्यवस्था बिगड़ने का। ऐसा ही एक मामला सोमवार को बुग्गावाला थाने में देखने को मिला। दरअसल, क्षेत्र के गांव गोकलवाला में ग्राम समाज की भूमि कब्जाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों में जमकर गालीगलौज हुई और नौबत मारपीट तक जा पहुंची। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के 15 लोगों अब्दुल कादिर, साजिद, नाजिर, रिजवान, जुबैर, अजीम, फरमान, शाहवान, गुलशेर, मोबिन, हसन, राकिब, अब्दुल, दिलशाद, सावे, वसीम के खिलाफ शांतिभंग में कार्रवाई की। इसके बाद आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के लिए पुलिस ने एक प्राइवेट गाड़ी को थाने मंगवाया।
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गाड़ी में सभी आरोपियों को बैठाया गया, लेकिन वाहन चलाने के लिए किसी पुलिसकर्मी या चालक की बजाय वसीम नामक आरोपी को ही ड्राइविंग सीट पर बैठा दिया। उसके बगल में बैठा एक सिपाही तमाशबीन बनकर पूरा नजारा देखता रहा। आरोपी ने जैसे ही गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा, तभी कुछ मीडियाकर्मी वहां पहुंच गए। जिस शख्स पर पुलिस ने कार्रवाई की, उसे गाड़ी चलाता देख मीडियाकर्मियों ने सवाल किए तो पुलिस में अफरातफरी मच गई। तुरंत उसे चालक की सीट से हटाकर पीछे बैठाया गया, लेकिन इस कारनामे ने सुरक्षा संबंधी तमाम सवालों को लेकर पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह भी है कि क्या पुलिस खुद ही सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है? या अधीनस्थों के लिए आला अधिकारियों के आदेश कोई मायने नहीं रखते हैं, खुद वाहन चलाकर आरोपी फरार भी हो सकता था।
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आरोपी गलती से चालक की सीट पर बैठ गया था। जानकारी होने पर उसे तुरंत चालक की सीट से नीचे उतारकर पीछा बैठाया गया। -नंद किशोर ग्वाड़ी, एसओ बुग्गावाला
सिपाही को गाड़ी चलानी नहीं आती है तो जो भी गाड़ी चलाना जानता है, वह चलाकर ले जा सकता है, इसमें कुछ गलत नहीं है। फिर भी मामले की जानकारी ली जाएगी। -जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी, एसएसपी, हरिद्वार