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शहर और देहात में खुलेआम बिक रहा मौत का सामान
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चीनी मांझा लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बनता जा रहा है। प्रतिबंध के बाद भी शहर और देहात में इसकी खुलेआम बिक्री की जा रही है। ऐसे में आए दिन लोग चीनी मांझे की चपेट में आकर मौत के द्वार तक पहुंच रहे हैं।
चीनी मांझे के खतरे को देखते हुए जुलाई 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देशभर में इसपर बैन लगा दिया था लेकिन दुकानदार मोटे मुनाफे के फेर में खुलेआम इसे बेच रहे हैं। रुड़की से लेकर मंगलौर, लक्सर, झबरेड़ा समेत अन्य स्थानों पर चीनी मांझे को खुलेआम बेचा जा रहा है। शहर में मेन बाजार, बीटी गंज में धड़ल्ले से इसकी बिक्री की जा हरी है।
300 ग्राम मांझे की कीमत 200 से 400 रुपये तक
दुकानदार मांझे से मोटी कमाई कर रहे हैं। 300 ग्राम मांझे की कीमत 200 से 400 रुपये तक है। इसे गोदाम में छिपाकर रखा जाता है। पुलिस और प्रशासन ने कई बार अभियान भी चलाया है। उसके बाद भी चीनी मांझा बेरोकटोक बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं देहात के गांवों में भी चीनी मांझा बिक रहा है। दुकानदारों की मानें तो वह सहारनपुर से चीनी मांझा और पतंग खरीदकर लाते हैं।
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ये हैं प्रमुख घटनाएं-
लक्सर में वसंत पंचमी पर चीनी मांझे की चपेट में आकर बसेड़ी खादर गांव निवासी फुरकान अहमद और फरमान घायल हो गए थे। इसके अलावा बिरला फैक्टरी का एक कर्मचारी भी ड्यूटी से लौटते समय मांझे की चपेट में आने से घायल हो गया था। सुल्तानपुर में रिश्तेदारी में आया मुजफ्फरनगर निवासी युवक भी फ्लाईओवर के ऊपर से मांझे की चपेट में आकर घायल हो गया था। सिमली निवासी रमन भी मांझे से बुरी तरह लहूलुहान हो गया था। वहीं, रुड़की में बाइक सवार युवक मांझे की चपेट में आकर घायल हो गया था जबकि फायर ब्रिगेड के पीछे एक पेड़ पर पक्षी फंस कर बुरी तरह घायल हो गया था। शनिवार को मंगलौर के पास दो बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
चीनी मांझे के खिलाफ जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। पुलिस को मांझे की बिक्री करने वाले दुकानदारों को चिह्नित करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद इन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -प्रमेंद्र सिंह डोबाल, एसपी देहात
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चीनी मांझे के खतरे को देखते हुए जुलाई 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देशभर में इसपर बैन लगा दिया था लेकिन दुकानदार मोटे मुनाफे के फेर में खुलेआम इसे बेच रहे हैं। रुड़की से लेकर मंगलौर, लक्सर, झबरेड़ा समेत अन्य स्थानों पर चीनी मांझे को खुलेआम बेचा जा रहा है। शहर में मेन बाजार, बीटी गंज में धड़ल्ले से इसकी बिक्री की जा हरी है।
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300 ग्राम मांझे की कीमत 200 से 400 रुपये तक
दुकानदार मांझे से मोटी कमाई कर रहे हैं। 300 ग्राम मांझे की कीमत 200 से 400 रुपये तक है। इसे गोदाम में छिपाकर रखा जाता है। पुलिस और प्रशासन ने कई बार अभियान भी चलाया है। उसके बाद भी चीनी मांझा बेरोकटोक बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं देहात के गांवों में भी चीनी मांझा बिक रहा है। दुकानदारों की मानें तो वह सहारनपुर से चीनी मांझा और पतंग खरीदकर लाते हैं।
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ये हैं प्रमुख घटनाएं-
लक्सर में वसंत पंचमी पर चीनी मांझे की चपेट में आकर बसेड़ी खादर गांव निवासी फुरकान अहमद और फरमान घायल हो गए थे। इसके अलावा बिरला फैक्टरी का एक कर्मचारी भी ड्यूटी से लौटते समय मांझे की चपेट में आने से घायल हो गया था। सुल्तानपुर में रिश्तेदारी में आया मुजफ्फरनगर निवासी युवक भी फ्लाईओवर के ऊपर से मांझे की चपेट में आकर घायल हो गया था। सिमली निवासी रमन भी मांझे से बुरी तरह लहूलुहान हो गया था। वहीं, रुड़की में बाइक सवार युवक मांझे की चपेट में आकर घायल हो गया था जबकि फायर ब्रिगेड के पीछे एक पेड़ पर पक्षी फंस कर बुरी तरह घायल हो गया था। शनिवार को मंगलौर के पास दो बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
चीनी मांझे के खिलाफ जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। पुलिस को मांझे की बिक्री करने वाले दुकानदारों को चिह्नित करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद इन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -प्रमेंद्र सिंह डोबाल, एसपी देहात