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...तो नहीं मिले सकेगा मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Wed, 26 Apr 2017 10:54 PM IST
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तेज हवाओं के साथ बारिश एवं ओलावृष्टि से बर्बाद हुई गेहूं की फसलों का मुआवजा मिलने की आस लगाए बैठे किसानों के लिए बुरी खबर है कि उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। दरअसल, सर्वे रिपोर्ट में औसतन 25 प्रतिशत तक ही गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। जबकि मुआवजा 33 प्रतिशत नुकसान होने पर ही मिलता है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 46 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर गेहूं की बुआई की गई थी। इस बार गेहूं की फसल पर रोग भी अधिक नहीं लगे थे। ऐसे में किसानों को बंपर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन पिछले दिनों बारिश एवं हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को तबाह कर दिया था। किसान संगठनों एवं किसानों ने मुआवजे के लिए धरना एवं ज्ञापन भी सीएम को भेजे थे। तब प्रशासन एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने गांव-गांव जाकर नष्ट हुई फसलों का सर्वे किया था। भगवानपुर तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो रमेश प्रसाद ने बताया कि अब तक जो रिपोर्ट आई है उसमें 20 से 25 प्रतिशत तक नुकसान होना आया है। भगवानपुर के कानूनगो राजपाल जैन ने बताया कि उनके क्षेत्र में गेहूं की फसल को 25 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है। वहीं रुड़की तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो राजेश ने बताया कि उनके क्षेत्र में दस से 15 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है।
हरिद्वार तहसील के नायब तहसीलदार धनीराम सैनी ने बताया कि सर्वे में औसतन 20 प्रतिशत नुकसान सामने आया है। चूंकि 33 प्रतिशत नुकसान होने पर मुआवजा देने का प्रावधान है। ऐसे में किसानों को मुआवजा मिलना मुश्किल है। हालांकि रिपोर्टशासन को भेज दी जाएगी।
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लक्सर में नहीं हुआ कोई खास नुकसान
लक्सर (ब्यूरो)। डीएम एसए मुरुगेशन की ओर से दिए गए निर्देश पर हुए सर्वे में लक्सर क्षेत्र में गेहूं की फसल को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा का कहना है कि लेखपालों को गांव-गांव भेजकर सर्वे कराया गया था। जो सर्वे रिपोर्ट आई है, उसमें कोई खास नुकसान नहीं हुआ है।
अधिकारियों का कहना है
नुकसान की जो सर्वे रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार मुआवजा मिलने के बारे में भी तहसीलों से ही पूछा जा सकता है। - एसए मुरुगेशन, डीएम, हरिद्वार
अभी मैं अवकाश पर हूं, इसलिए कुछ नहीं कह सकता। मेरा चार्ज एडीएम अभिषेक त्रिपाठी के पास है, उनसे ही पूछ लो। - ललित मिश्रा, एडीएम वित्त, हरिद्वार
मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। दिपेंद्र नेगी के पास रिपोर्ट पहुंची होगी। उनसे जानकारी ले लो।
अभिषेक त्रिपाठी, एडीएम, प्रशासन, हरिद्वार
सर्वे रिपोर्ट के बाद मुआवजा मिलने के क्या मानक हैं, वह आरके विभाग वाले बता सकते हैं।
मंजीत सिंह गिल, तहसीलदार रुड़की
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 46 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर गेहूं की बुआई की गई थी। इस बार गेहूं की फसल पर रोग भी अधिक नहीं लगे थे। ऐसे में किसानों को बंपर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन पिछले दिनों बारिश एवं हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को तबाह कर दिया था। किसान संगठनों एवं किसानों ने मुआवजे के लिए धरना एवं ज्ञापन भी सीएम को भेजे थे। तब प्रशासन एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने गांव-गांव जाकर नष्ट हुई फसलों का सर्वे किया था। भगवानपुर तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो रमेश प्रसाद ने बताया कि अब तक जो रिपोर्ट आई है उसमें 20 से 25 प्रतिशत तक नुकसान होना आया है। भगवानपुर के कानूनगो राजपाल जैन ने बताया कि उनके क्षेत्र में गेहूं की फसल को 25 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है। वहीं रुड़की तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो राजेश ने बताया कि उनके क्षेत्र में दस से 15 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है।
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हरिद्वार तहसील के नायब तहसीलदार धनीराम सैनी ने बताया कि सर्वे में औसतन 20 प्रतिशत नुकसान सामने आया है। चूंकि 33 प्रतिशत नुकसान होने पर मुआवजा देने का प्रावधान है। ऐसे में किसानों को मुआवजा मिलना मुश्किल है। हालांकि रिपोर्टशासन को भेज दी जाएगी।
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लक्सर में नहीं हुआ कोई खास नुकसान
लक्सर (ब्यूरो)। डीएम एसए मुरुगेशन की ओर से दिए गए निर्देश पर हुए सर्वे में लक्सर क्षेत्र में गेहूं की फसल को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा का कहना है कि लेखपालों को गांव-गांव भेजकर सर्वे कराया गया था। जो सर्वे रिपोर्ट आई है, उसमें कोई खास नुकसान नहीं हुआ है।
अधिकारियों का कहना है
नुकसान की जो सर्वे रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार मुआवजा मिलने के बारे में भी तहसीलों से ही पूछा जा सकता है। - एसए मुरुगेशन, डीएम, हरिद्वार
अभी मैं अवकाश पर हूं, इसलिए कुछ नहीं कह सकता। मेरा चार्ज एडीएम अभिषेक त्रिपाठी के पास है, उनसे ही पूछ लो। - ललित मिश्रा, एडीएम वित्त, हरिद्वार
मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। दिपेंद्र नेगी के पास रिपोर्ट पहुंची होगी। उनसे जानकारी ले लो।
अभिषेक त्रिपाठी, एडीएम, प्रशासन, हरिद्वार
सर्वे रिपोर्ट के बाद मुआवजा मिलने के क्या मानक हैं, वह आरके विभाग वाले बता सकते हैं।
मंजीत सिंह गिल, तहसीलदार रुड़की