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आंखें मूंद कर जारी हो रहे जाति प्रमाणपत्र

Mon, 01 Feb 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की Updated Mon, 01 Feb 2016 12:02 AM IST
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रुड़की। पंचायत चुनाव में भले ही आरक्षण तय किए गए हों, लेकिन रहमतपुर में ओबीसी के एक प्रत्याशी  ने एससी सीट पर भी चुनाव लड़ लिया। ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए कागजों में कूट रचना कर आरक्षण का लाभ लेने के लिए अन्य पिछड़ी जाति की श्रेणी के इस व्यक्ति ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र हासिल कर लिया। हद तो यह हुई कि तमाम अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बावजूद पूरी नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह अलग बात है कि वह चुनाव हार गया।

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मामला गांव रहमतपुर का है। यहां हाल में हुए चुनाव में प्रधान की सीट एससी के लिए आरक्षित थी। गांव के मनोज ने एससी जाति का लाभ लेने के लिए अपने मूल दस्तावेजों में कूट रचना कर स्वयं को एससी का दर्शा दिया, जबकि वह ओबीसी वर्ग में आता है। तहसील के कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने भी एक के बाद एक करके प्रमाण पत्र को अग्रसित करते हुए आंख मीचकर एससी का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। एससी का प्रमाण पत्र मिलते ही मनोज ने आरक्षण के अनुसार ग्राम प्रधान का पर्चा भर दिया। चुनाव अधिकारियों ने भी तहसील के प्रमाण पत्र को आरक्षण का आधार मानकर मनोज का नामांकन स्वीकृत कर लिया और प्रधान का चुनाव लड़ने का हक दे दिया। हालांकि इस दौरान गांव के दूसरे पक्ष के लोगों ने मनोज को ओबीसी का साबित करने के लिए अनेकों दस्तावेजों के साथ नामांकन को निरस्त करने के लिए चुनाव अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक  शिकायत की, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी, लेकिन अब मामले की शिकायत सीडीओ एवं उप जिला निर्वाचन पंचायत अधिकारी सोनिका से की। उनके आदेश पर जांच की गई तो सामने आया कि मनोज हिंदू जुलाहा कबीर बंशी है, जो राज्य की अनुसूचित जाति में नहीं आता है, जबकि उसने कोरी जाति बताकर एससी का प्रमाण पत्र लिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जो जांच अब की गई वह प्रमाण पत्र बनाते समय क्यों नहीं की गई जो यह गड़बड़ झाला अब सामने आ रहा है, या फिर जानबूझकर ऐसा किया गया, ताकि वह मनोज चुनाव लड़ सके। ऐसे अनेकों सवाल तहसील प्रशासन को भी सवालों के घेरे में खड़े कर रहे हैं।
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तहसील का सहारा, जनता ने नकारा
तहसील के कर्मचारियों-अधिकारियों ने तो मनोज को फर्जी कागजों पर चुनाव लड़ने का सर्टीफिकेट जारी करने में सहारा दे दिया। जिससे मनोज ने फर्जी प्रमाण पत्र तो बनवा लिया और प्रधानी के लिए चुनावी मैदान में कूद गया, लेकिन उसे गांव की जनता ने नकारते हुए चुनाव हरा दिया।
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इनका कहना है
अभी जांच उनके पास नहीं पहुंची है, लेकिन मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मंगेश घिल्डियाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, रुड़की

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