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आजाद की प्रतिमा को लेकर फिर गरमाई राजनीति
Updated Sat, 17 Mar 2018 12:20 AM IST
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रुड़की। शहर में लंबे समय तक विवाद का कारण बने रहे चंद्रशेखर आजाद चौक को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमाने लगी है। विधायक प्रदीप बत्ता और मेयर यशपाल राणा के खेमों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक और मुद्दा मिल गया है। हाईकोर्ट के आदेश को मेयर खेमे की बड़ी जीत माना जा रहा है।
शहर में नगर निगम चौक को आजाद चौक के नाम से भी जाना जाता है। यहां लगी क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को पिछले साल सितंबर-अक्तूबर के दौरान हटाकर पास में ही बनाए गए एक चबूतरे पर लगा दिया गया था। विधायक प्रदीप बत्ता और उनके समर्थकों का कहना था कि शहर के इस अति व्यस्ततम चौराहे पर यातायात की व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए प्रतिमा का स्थान बदला गया है। जबकि ब्राह्मण समाज तथा नगर निगम के मेयर यशपाल राणा के समर्थकों ने इसे शहीद के अपमान का मुद्दा बनाकर आंदोलन का बिगुल बजा दिया था। कई दिनों तक यहां विधायक विरोधी खेमे का आंदोलन धरना-प्रदर्शन के रूप में चलता भी रहा था। शासन स्तर तक भी धमक पहुंचने पर जिलाधिकारी दीपक रावत को इस मामले की जांच सौंपी गई थी। रिपोर्ट स्पष्ट तौर पर किसी नतीजे पर अभी तक नहीं पहुंची। उधर, पूर्व पालिकाध्यक्ष दिनेश कौशिक ने क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को देश तथा ब्राह्मण समाज का गौरव बताते हुए इस मामले पर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करते हुए प्रतिमा पुराने स्थान पर ही स्थापित कराने की अपील की थी।
दिनेश कौशिक ने बताया कि उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय बैंच ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए प्रतिमा पुराने स्थान दपर ही देने के आदेश दिए हैं। हालांकि अभी तक हाईकोर्ट के आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं हो पाई है। मेयर यशपाल राणा ने भी आदेश होने की पुष्टि की है। इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर विधायक और मेयर खेमों के बीच चल रही राजनीति में एक नया मुद्दा मिल गया है। याची पूर्व पालिकाध्यक्ष दिनेश कौशिक ने कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला जनभावनाओं का सम्मान है। मेयर यशपाल राणा ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
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शहर में नगर निगम चौक को आजाद चौक के नाम से भी जाना जाता है। यहां लगी क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को पिछले साल सितंबर-अक्तूबर के दौरान हटाकर पास में ही बनाए गए एक चबूतरे पर लगा दिया गया था। विधायक प्रदीप बत्ता और उनके समर्थकों का कहना था कि शहर के इस अति व्यस्ततम चौराहे पर यातायात की व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए प्रतिमा का स्थान बदला गया है। जबकि ब्राह्मण समाज तथा नगर निगम के मेयर यशपाल राणा के समर्थकों ने इसे शहीद के अपमान का मुद्दा बनाकर आंदोलन का बिगुल बजा दिया था। कई दिनों तक यहां विधायक विरोधी खेमे का आंदोलन धरना-प्रदर्शन के रूप में चलता भी रहा था। शासन स्तर तक भी धमक पहुंचने पर जिलाधिकारी दीपक रावत को इस मामले की जांच सौंपी गई थी। रिपोर्ट स्पष्ट तौर पर किसी नतीजे पर अभी तक नहीं पहुंची। उधर, पूर्व पालिकाध्यक्ष दिनेश कौशिक ने क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को देश तथा ब्राह्मण समाज का गौरव बताते हुए इस मामले पर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करते हुए प्रतिमा पुराने स्थान पर ही स्थापित कराने की अपील की थी।
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दिनेश कौशिक ने बताया कि उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय बैंच ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए प्रतिमा पुराने स्थान दपर ही देने के आदेश दिए हैं। हालांकि अभी तक हाईकोर्ट के आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं हो पाई है। मेयर यशपाल राणा ने भी आदेश होने की पुष्टि की है। इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर विधायक और मेयर खेमों के बीच चल रही राजनीति में एक नया मुद्दा मिल गया है। याची पूर्व पालिकाध्यक्ष दिनेश कौशिक ने कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला जनभावनाओं का सम्मान है। मेयर यशपाल राणा ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
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