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..तो कैसे पुरा होगा शुगरमिलें का 160 दिन का पेराई सत्र
Updated Sat, 06 Jan 2018 12:09 AM IST
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रुड़की। शुगर मिलों का पेराई सत्र शुरू हुए 60 दिन ही हुए हैं कि तीनों मिलों में नो केन की स्थिति अभी से पैदा हो गई है। हालत यह है कि नए साल से इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी मिल तीन-चार घंटे के लिए प्रतिदिन बंद की जा रही है। दोनों मिल प्रबंधकों ने 160 दिन का पेराई सत्र पूरा करने के लिए विभाग से बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी है।
लिब्बरहेड़ी शुगर मिल ने 28 अक्तूबर को अपना पेराई सत्र शुरू किया है। छह नवंबर को इकबालपुर और दस नवंबर को लक्सर मिल का पेराई सत्र शुरू हुआ है लेकिन, दो माह में ही तीनों मिलों में गन्ने का संकट खड़ा हो गया है। इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी मिल में एक जनवरी को नो केन के चलते दो-दो घंटे दोनों मिलें बंद रहीं। उसके बाद से दोनों मिलों में चार-पांच घंटे नो केन के चलते बंद करनी पड़ी रही है। इकबालपुर मिल की प्रतिदिन 55 हजार क्विंटल पेराई की क्षमता है। जबकि इसे मात्र 30 हजार क्विंटल गन्ना मिल रहा है। लिब्बरहेड़ी मिल की पेराई क्षमता 50 हजार क्विंटल है। इसे मात्र 35-36 हजार क्विंटल गन्ना मिल रहा है। यही हाल लक्सर मिल का भी है। इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी मिल अधिकारियों ने गन्ना आयुक्त को पत्र लिखकर 160 दिन का पेराई सत्र पूरा करने के लिए बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी है लेकिन, विभाग ने फिलहाल अनुमति नहीं दी है।
कोट
इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी शुगर मिल को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रहा है। जिसके चलते दोनों मिलों ने गन्ना आयुक्त से बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी है।
-डीसीओ, आशीष नेगी
कोट
यदि मिलों में नो केन की स्थिति है तो वह बाहरी गन्ना खरीद सकते हैं लेकिन, मिल प्रबंधन को पहले स्थानीय किसानों के गन्ने को प्राथमिकता देनी चाहिए। - संजय चौधरी, अध्यक्ष, भाकियू टिकैत के मंडल
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कोट
बाहरी गन्ना खरीदने को गन्ना एक्ट के अनुसार नहीं खरीदा जा सकता। क्षेत्र में अब भी पर्याप्त गन्ना है। यदि मिलें गन्ना न मिलने का दावा कर रही हैं तो इन्हें अपने-अपने क्षेत्र का सर्वे करवाना चाहिए।
महकार सिंह, अध्यक्ष, जिला उत्तराखंड किसान मोर्चा
कोट
इस समय आपूर्ति के सापेक्ष आधा गन्ना भी नहीं मिल रहा है। जिसके चलते मिल में नो केन की स्थिति बन रही है।
लोकेंद्र लांबा, महाप्रबंधक, उत्तम शुगर मिल
कोट
इस समय ठंड के कारण मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रहा है। पिछले वर्ष बाहरी गन्ना मिलने के कारण मिलों ने अपना पेराई सत्र पूरा कर कर लिया था।
पवन तोमर, जनसंपर्क अधिकारी, इकबालपुर मिल
गन्ना तौल केंद्रों पर घटतौली
रुड़की। राष्ट्रीय किसान संगम उत्तराखंड की मासिक बैठक में गन्ना तौल केंद्रों पर हो रही घटतौली समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। साथ ही किसान नेताओं ने गन्ना केंद्रों पर हो रही घटतौली पर तुरंत रोक लगाने की मांग अधिकारियों से की है।
शुक्रवार को राष्ट्रीय किसान संगम पदाधिकारियों की मासिक बैठक रुड़की के प्रशासनिक भवन में हुई। इस दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि गन्ना तौल केंद्रों पर चार-पांच प्रतिशत की घटतौली की जा रही है लेकिन, इस और न गन्ना विभाग के अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है। बैठक में पदाधिकारियों ने भुगतान आदि के मुद्दों पर भी चर्चा की। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार 14-15 दिन में गन्ना भुगतान होना चाहिए लेकिन, मिलें नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। पदाधिकारियों ने अधिकारियों से मांग की कि वह नियमों के अनुसार भुगतान कराएं साथ ही घटतौली पर रोक लगाएं। बैठक में डॉ सुशील कुमार चौहान, रणवीर सैनी, विवेक वर्मा, डॉ. अशोक चौहान, भोपाल गिरी, चौधरी कंवर पाल, जगत सिंह, इंद सिंह, बलदेव आर्य, सुबोध शर्मा, किशन लाल, रामनाथ आर्य आदि मौजूद रहे।
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लिब्बरहेड़ी शुगर मिल ने 28 अक्तूबर को अपना पेराई सत्र शुरू किया है। छह नवंबर को इकबालपुर और दस नवंबर को लक्सर मिल का पेराई सत्र शुरू हुआ है लेकिन, दो माह में ही तीनों मिलों में गन्ने का संकट खड़ा हो गया है। इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी मिल में एक जनवरी को नो केन के चलते दो-दो घंटे दोनों मिलें बंद रहीं। उसके बाद से दोनों मिलों में चार-पांच घंटे नो केन के चलते बंद करनी पड़ी रही है। इकबालपुर मिल की प्रतिदिन 55 हजार क्विंटल पेराई की क्षमता है। जबकि इसे मात्र 30 हजार क्विंटल गन्ना मिल रहा है। लिब्बरहेड़ी मिल की पेराई क्षमता 50 हजार क्विंटल है। इसे मात्र 35-36 हजार क्विंटल गन्ना मिल रहा है। यही हाल लक्सर मिल का भी है। इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी मिल अधिकारियों ने गन्ना आयुक्त को पत्र लिखकर 160 दिन का पेराई सत्र पूरा करने के लिए बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी है लेकिन, विभाग ने फिलहाल अनुमति नहीं दी है।
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इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी शुगर मिल को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रहा है। जिसके चलते दोनों मिलों ने गन्ना आयुक्त से बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी है।
-डीसीओ, आशीष नेगी
कोट
यदि मिलों में नो केन की स्थिति है तो वह बाहरी गन्ना खरीद सकते हैं लेकिन, मिल प्रबंधन को पहले स्थानीय किसानों के गन्ने को प्राथमिकता देनी चाहिए। - संजय चौधरी, अध्यक्ष, भाकियू टिकैत के मंडल
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बाहरी गन्ना खरीदने को गन्ना एक्ट के अनुसार नहीं खरीदा जा सकता। क्षेत्र में अब भी पर्याप्त गन्ना है। यदि मिलें गन्ना न मिलने का दावा कर रही हैं तो इन्हें अपने-अपने क्षेत्र का सर्वे करवाना चाहिए।
महकार सिंह, अध्यक्ष, जिला उत्तराखंड किसान मोर्चा
कोट
इस समय आपूर्ति के सापेक्ष आधा गन्ना भी नहीं मिल रहा है। जिसके चलते मिल में नो केन की स्थिति बन रही है।
लोकेंद्र लांबा, महाप्रबंधक, उत्तम शुगर मिल
कोट
इस समय ठंड के कारण मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रहा है। पिछले वर्ष बाहरी गन्ना मिलने के कारण मिलों ने अपना पेराई सत्र पूरा कर कर लिया था।
पवन तोमर, जनसंपर्क अधिकारी, इकबालपुर मिल
गन्ना तौल केंद्रों पर घटतौली
रुड़की। राष्ट्रीय किसान संगम उत्तराखंड की मासिक बैठक में गन्ना तौल केंद्रों पर हो रही घटतौली समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। साथ ही किसान नेताओं ने गन्ना केंद्रों पर हो रही घटतौली पर तुरंत रोक लगाने की मांग अधिकारियों से की है।
शुक्रवार को राष्ट्रीय किसान संगम पदाधिकारियों की मासिक बैठक रुड़की के प्रशासनिक भवन में हुई। इस दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि गन्ना तौल केंद्रों पर चार-पांच प्रतिशत की घटतौली की जा रही है लेकिन, इस और न गन्ना विभाग के अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है। बैठक में पदाधिकारियों ने भुगतान आदि के मुद्दों पर भी चर्चा की। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार 14-15 दिन में गन्ना भुगतान होना चाहिए लेकिन, मिलें नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। पदाधिकारियों ने अधिकारियों से मांग की कि वह नियमों के अनुसार भुगतान कराएं साथ ही घटतौली पर रोक लगाएं। बैठक में डॉ सुशील कुमार चौहान, रणवीर सैनी, विवेक वर्मा, डॉ. अशोक चौहान, भोपाल गिरी, चौधरी कंवर पाल, जगत सिंह, इंद सिंह, बलदेव आर्य, सुबोध शर्मा, किशन लाल, रामनाथ आर्य आदि मौजूद रहे।