{"_id":"58a730604f1c1bab19d84e3c","slug":"228-crore-choked-mills","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिलों ने दबा लिया 228 करोड़ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिलों ने दबा लिया 228 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Fri, 17 Feb 2017 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चुनावी शोर में फिलहाल किसानों का गन्ना भुगतान गुम हो गया। मिलों ने चुनाव का फायदा उठाकर किसानों का भुगतान ही नहीं किया। मिलों पर अब किसानों का सवा दो सौ करोड़ रुपये बकाया हो गया।
शुगर मिलों की ओर से समय पर भुगतान नहीं करने पर किसानों को आंदोलनों का सहारा लेना पड़ता है। उसके बाद ही शुगर मिल कुछ भुगतान करती है। इस बार चुनाव में तो शुगर मिलों की मौज ही आ गई। एक तरफ जहां सभी राजनीति दल गन्ना भुगतान समय पर दिलाने के वादे करते रहे, वहीं मिलों की ओर से अधिकारियों की व्यस्तता के बहाने मिलों ने किसानों को भुगतान नहीं किया। जबकि किसान मिलों को गन्ना तो बेचते रहे, लेकिन मिलों की ओर से भुगतान करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। लक्सर, इकबालपुर एवं लिब्बरहेड़ी शुगर मिल पर किसानों का चालू सत्र का 228 करोड़ 36 लाख रुपये बकाया गन्ना भुगतान हो गया। इनमें सबसे अधिक बकाया गन्ना भुगतान लक्सर मिल पर हो चुका है। कम गन्ना खरीदने के बावजूद इकबालपुर शुगर मिल दूसरे नंबर पर किसानों के पैसे पर कुंडली मारे बैठा है। लिब्बरहेड़ी मिल सबसे कम गन्ना भुगतान की देनदार है।
भुगतान की मिलवार स्थिति
मिल का नाम -बकाया भुगतान
लक्सर -90.04 करोड़
इकबालपुर -85.43 करोड़
लिब्बरहेड़ी -5289 करोड़
---------------
कुल-228 करोड़ 36 लाख रुपये
-----------
किसान संगठन भी रहे शांत
चुनाव के शोर-शराबे में किसान संगठन भी शांत रहे, जबकि किसानों की ओर से आम दिनों में बकाया भुगतान के लिए आंदोलन किए जाते रहते हैं। आचार संहिता लगने के बाद किसान नेता भी चुप बैठे रहे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि किसान संगठन मतदान समाप्त होने से गन्ने भुगतान के लिए आंदोलन चलाएंगे।
विज्ञापन
मिलों में बंपर मात्रा में पहुंच रहा बाहरी गन्ना
शुगर मिलों की ओर से स्थानीय किसानों का बकाया गन्ना भुगतान तो दिया ही नहीं जा रहा है, लेकिन बाहरी गन्ना मिलों की ओर से जमकर खरीदा जा रहा है। मिलों में हरियाणा, पंजाब और यूपी का गन्ना ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पहुंच रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब मिलों पर स्थानीय किसानों का गन्ना भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है तो बाहरी गन्ने के लिए पैसा कहां से आ रहा है।
किसानों का कहना है
मिलों की ओर से भुगतान नहीं करने पर अब मोर्चा आंदोलन की रणनीति बनाएगा। इस संबंध में पहले मिल एवं अधिकारियों से मिला जाएगा। इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
- महकार सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तराखंड किसान मोर्चा
शुगर मिलों की ओर से भुगतान करने में मनमानी की जा रही है, लेकिन अब मिलों की मोनोपॉली को किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा। यूनियन प्रबंधकों से वार्ता कर भुगतान दिलाएगी। अन्यथा आंदोलन किया जाएगा।
विजय कुमार शास्त्री, प्रदेश प्रवक्ता, भाकियू
चुनाव में व्यस्ता होने से गन्ना भुगतान पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा सका, लेकिन अब शुगर मिलों से भुगतान दिलाने के लिए कार्रवाई की जाएगी।
आशीष नेगी, सहायक गन्ना आयुक्त, हरिद्वार
शुगर मिलों की ओर से समय पर भुगतान नहीं करने पर किसानों को आंदोलनों का सहारा लेना पड़ता है। उसके बाद ही शुगर मिल कुछ भुगतान करती है। इस बार चुनाव में तो शुगर मिलों की मौज ही आ गई। एक तरफ जहां सभी राजनीति दल गन्ना भुगतान समय पर दिलाने के वादे करते रहे, वहीं मिलों की ओर से अधिकारियों की व्यस्तता के बहाने मिलों ने किसानों को भुगतान नहीं किया। जबकि किसान मिलों को गन्ना तो बेचते रहे, लेकिन मिलों की ओर से भुगतान करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। लक्सर, इकबालपुर एवं लिब्बरहेड़ी शुगर मिल पर किसानों का चालू सत्र का 228 करोड़ 36 लाख रुपये बकाया गन्ना भुगतान हो गया। इनमें सबसे अधिक बकाया गन्ना भुगतान लक्सर मिल पर हो चुका है। कम गन्ना खरीदने के बावजूद इकबालपुर शुगर मिल दूसरे नंबर पर किसानों के पैसे पर कुंडली मारे बैठा है। लिब्बरहेड़ी मिल सबसे कम गन्ना भुगतान की देनदार है।
विज्ञापन
भुगतान की मिलवार स्थिति
मिल का नाम -बकाया भुगतान
लक्सर -90.04 करोड़
इकबालपुर -85.43 करोड़
लिब्बरहेड़ी -5289 करोड़
---------------
कुल-228 करोड़ 36 लाख रुपये
-----------
किसान संगठन भी रहे शांत
चुनाव के शोर-शराबे में किसान संगठन भी शांत रहे, जबकि किसानों की ओर से आम दिनों में बकाया भुगतान के लिए आंदोलन किए जाते रहते हैं। आचार संहिता लगने के बाद किसान नेता भी चुप बैठे रहे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि किसान संगठन मतदान समाप्त होने से गन्ने भुगतान के लिए आंदोलन चलाएंगे।
विज्ञापन
मिलों में बंपर मात्रा में पहुंच रहा बाहरी गन्ना
शुगर मिलों की ओर से स्थानीय किसानों का बकाया गन्ना भुगतान तो दिया ही नहीं जा रहा है, लेकिन बाहरी गन्ना मिलों की ओर से जमकर खरीदा जा रहा है। मिलों में हरियाणा, पंजाब और यूपी का गन्ना ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पहुंच रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब मिलों पर स्थानीय किसानों का गन्ना भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है तो बाहरी गन्ने के लिए पैसा कहां से आ रहा है।
किसानों का कहना है
मिलों की ओर से भुगतान नहीं करने पर अब मोर्चा आंदोलन की रणनीति बनाएगा। इस संबंध में पहले मिल एवं अधिकारियों से मिला जाएगा। इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
- महकार सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तराखंड किसान मोर्चा
शुगर मिलों की ओर से भुगतान करने में मनमानी की जा रही है, लेकिन अब मिलों की मोनोपॉली को किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा। यूनियन प्रबंधकों से वार्ता कर भुगतान दिलाएगी। अन्यथा आंदोलन किया जाएगा।
विजय कुमार शास्त्री, प्रदेश प्रवक्ता, भाकियू
चुनाव में व्यस्ता होने से गन्ना भुगतान पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा सका, लेकिन अब शुगर मिलों से भुगतान दिलाने के लिए कार्रवाई की जाएगी।
आशीष नेगी, सहायक गन्ना आयुक्त, हरिद्वार