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एक माह से कार्रवाई का इंतजार करते रहे प्रधान और ग्रामीण

Thu, 14 Feb 2019 11:56 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 14 Feb 2019 11:56 PM IST
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एक माह से कार्रवाई का इंतजार करते रहे प्रधान और ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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ग्रामीण पुलिस और अधिकारियों से शिकायत करते थे, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी। ग्रामीणों की ओर से लगाए जा रहे इस तरह के आरोप नाथूखेड़ी गांव के प्रधान और अन्य ग्रामीणों की ओर से ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को दी गई लिखित शिकायत से साबित हो रहे हैं। शिकायत में गांव के नौ लोगों पर शराब कारोबार करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन एक माह बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नारसन ब्लॉक की नाथूखेड़ी ग्राम पंचायत की प्रधान पिंकी देवी समेत गांव के सतपाल, राजपाल और मेहंद्र समेत करीब 21 ग्रामीणों की ओर से आठ जनवरी 2019 को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल को शिकायती पत्र सौंपा गया था। इसमें गांव के ही नौ लोगों पर शराब कारोबार करने की जानकारी दी गई थी। शिकायत में बताया गया है कि सभी आरोपी प्रतिदिन गांव में शराब बेचने का काम करते हैं। वे आए दिन शराब पीकर गांव के रास्तों पर गाली गलौच करते हैं। इससे महिलाओं और लड़कियों का रास्तों से निकलना मुश्किल हो गया है। आरोपियों का विरोध करते हैं तो वे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। इस संबंध में ग्रामीणों ने एक पत्र 11 दिसंबर को एसपी देहात कार्यालय में भी दिया है। ग्रामीण जेएम कार्यालय से रिसीव हुए पत्र को लिए घूमते रहे। ग्रामीण एक माह तक कार्रवाई का इंतजार करते रहे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस तरह की न जाने कितनी चिट्ठियां सरकारी दफ्तरों में धूल फांकती रहीं, लेकिन ठोस कार्रवाई कभी नहीं हुई। लिहाजा यह कारोबार फलता फूलता रहा। अब प्रशासनिक मशीनरी का यही ढुलमुल रवैया सैकड़ों लोगों की जान ले चुका है। विगत बुधवार को बिंडुखड़क गांव पहुंचे समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य के सामने भी ग्रामीणों ने इसी तरह के आरोप लगाए थे कि पुलिस शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रही थी। इस बाबत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि उनके कार्यालय में इस तरह की शिकायत रिसीव हुई है तो निश्चित रूप से संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया होगा। उन्होंने बताया कि प्रशासन को जो भी शिकायत मिलती है, उसे संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा जाता है। कार्रवाई नहीं होने पर समय-समय पर समीक्षा की जाती है।
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