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सीएमएस ने गर्भवती महिला को खुन नहीं चढ़ाने का महिला चिकित्सक को दोषी पाया
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
सिविल अस्पताल में उपचार कराने पहुंची एक गर्भवती को खून चढ़ाने से मना करने के मामले में महिला चिकित्सक को दोषी पाए जाने पर कार्रवाई के लिए सीएमओ हरिद्वार को पत्र भेजा है। वहीं, गर्भवती का अन्य महिला चिकित्सक की देखरेख में अस्पताल में भर्ती कराकर उपचार कराया जा रहा है।
गुरुकुल नारसन निवासी तैय्यब अपनी गर्भवती भाभी का उपचार कराने के लिए मंगलौर सामुदायिक स्वास्य केंद्र पर लेकर गया था। यहां खून की कमी के चलते उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। तैय्यब के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने खून की कमी के चलते उनकी भाभी को रुड़की के सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया था। ऐसे में वह भाभी को लेकर बुधवार को सिविल अस्पताल पहुंचे थे। सिविल अस्पताल में खून की जांच कराने पर महिला में हिमोग्लोबिन पांच ग्राम पाया गया। इस पर परिजनों ने गर्भवती को अस्पताल की एक महिला चिकित्सक को दिखाया था, लेकिन महिला चिकित्सक ने खून चढ़ाने से उसे मना कर दिया। तैय्यब ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत अस्पताल के सीएमएस डॉ. डीके चक्रपाणि से की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएस ने भी महिला चिकित्सक को खून चढ़ाने के लिए कहा था, लेकिन चिकित्सक ने सीएमएस के आदेशों को दरकिनार कर खून चढ़ाने से इनकार कर दिया। पीड़ित परिजनों के अनुसार उन्होंने सीएमएस से गर्भवती को किसी अन्य चिकित्सक को दिखाने की गुहार लगाई। इसके बाद सीएमएस ने अन्य महिला चिकित्सक की देखरेख में गर्भवती को अस्पताल में भर्ती कराया।
मामले में सीएमएस डॉ. डीके चक्रपाणि ने बताया कि महिला चिकित्सक को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है। साथ ही अन्य महिला चिकित्सक से गर्भवती का खून चढ़वाया गया है। उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सक के खिलाफ पहले भी कई मामले प्रकाश में आए हैं। जिनकी जांच की जाएगी। महिला डॉक्टर पर मरीजों को अस्पताल से बाहर की दवाइयां लिखने का भी आरोप है, उसकी भी जांच पड़ताल की जा रही है।
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सिविल अस्पताल में उपचार कराने पहुंची एक गर्भवती को खून चढ़ाने से मना करने के मामले में महिला चिकित्सक को दोषी पाए जाने पर कार्रवाई के लिए सीएमओ हरिद्वार को पत्र भेजा है। वहीं, गर्भवती का अन्य महिला चिकित्सक की देखरेख में अस्पताल में भर्ती कराकर उपचार कराया जा रहा है।
गुरुकुल नारसन निवासी तैय्यब अपनी गर्भवती भाभी का उपचार कराने के लिए मंगलौर सामुदायिक स्वास्य केंद्र पर लेकर गया था। यहां खून की कमी के चलते उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। तैय्यब के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने खून की कमी के चलते उनकी भाभी को रुड़की के सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया था। ऐसे में वह भाभी को लेकर बुधवार को सिविल अस्पताल पहुंचे थे। सिविल अस्पताल में खून की जांच कराने पर महिला में हिमोग्लोबिन पांच ग्राम पाया गया। इस पर परिजनों ने गर्भवती को अस्पताल की एक महिला चिकित्सक को दिखाया था, लेकिन महिला चिकित्सक ने खून चढ़ाने से उसे मना कर दिया। तैय्यब ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत अस्पताल के सीएमएस डॉ. डीके चक्रपाणि से की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएस ने भी महिला चिकित्सक को खून चढ़ाने के लिए कहा था, लेकिन चिकित्सक ने सीएमएस के आदेशों को दरकिनार कर खून चढ़ाने से इनकार कर दिया। पीड़ित परिजनों के अनुसार उन्होंने सीएमएस से गर्भवती को किसी अन्य चिकित्सक को दिखाने की गुहार लगाई। इसके बाद सीएमएस ने अन्य महिला चिकित्सक की देखरेख में गर्भवती को अस्पताल में भर्ती कराया।
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मामले में सीएमएस डॉ. डीके चक्रपाणि ने बताया कि महिला चिकित्सक को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है। साथ ही अन्य महिला चिकित्सक से गर्भवती का खून चढ़वाया गया है। उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सक के खिलाफ पहले भी कई मामले प्रकाश में आए हैं। जिनकी जांच की जाएगी। महिला डॉक्टर पर मरीजों को अस्पताल से बाहर की दवाइयां लिखने का भी आरोप है, उसकी भी जांच पड़ताल की जा रही है।
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