{"_id":"598f4fc44f1c1b966c8b4bb1","slug":"101502564292-roorkee-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जन्माष्टमी के संयोग और नक्षत्र गड़बड़ाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जन्माष्टमी के संयोग और नक्षत्र गड़बड़ाए
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
लक्सर। जन्माष्टमी के लिए शहर से देहात तक बाजार कान्हा के रंग में रंगने लगा है। स्कूलों में कार्यक्रमों की धूम है तो घरों में लड्डूु गोपाल का इंतजार है। इस बार योग और नक्षत्र वैसे नहीं हैं, जैसे कृष्ण के जन्म के समय में थे। 30 साल पहले जन्माष्टमी के दिन जो संयोग था वह इस बार 15 अगस्त को पड़ रहे हैं। हालांकि गृहस्थ के लिए (स्मार्त) जन्माष्टमी 14 अगस्त को मनाई जाएगी, जबकि साधु संन्यासी (वैष्णव) 15 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि अष्टमी की बेला में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, लेकिन इस बार दोनों योग नहीं हैं। रोहिणी नक्षत्र 16 अगस्त को सुबह 2.32 बजे से होगा। इस बार 14 अगस्त की शाम 7 बजकर 48 मिनट पर अष्टमी तिथि का प्रवेश है जो मंगलवार शाम 5 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। ऐसे में अधिकतर लोग 14 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे। वैष्णवजन सूर्योदय तिथि अष्टमी वाले दिन यानी 15 अगस्त को कृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे। खास बात यह है कि 15 अगस्त की मध्यरात्रि में कृष्ण जन्म के समय न अष्टमी तिथि होगी और न रोहिणी नक्षत्र। ज्योतिषाचार्य संदीप भारद्वाज ने बताया कि इस साल जन्माष्टमी पर विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे संयोग सदियों में कुछ बार ही आते हैं। इससे पहले वर्ष 1865 में राहु और शनि का ऐसा योग बना था। कृष्ण जन्मोत्सव के साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह से रात 2.30 बजे तक रहेगा। यह योग श्रेष्ठता लेकर आएगा। चंद्रमा भी वृष राशि में, केंद्र में बुध व त्रिकोण में बृहस्पति रहेगा, जो आमजन व व्यापारी के लिए मिश्रित फलदायी रहेगा। इससे पहले वर्ष 2014 में भी रोहिणी के बजाय कृतिका नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाई थी।
ऐसे खुश होंगे कान्हा
>> भगवान को पीले पुष्प अर्पित करें तो आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
>> दक्षिणा वर्णी शंख में जल भरकर श्रीकृष्ण का अभिषेक से मनोकामनाएं पूरी होंगी।
>> श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
>> गरीबों और असहायों को फलाहार कराने से रोगों का नाश होगा।
>> जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की आराधना का विशेष महत्व होता है।
विज्ञापन
लक्सर। जन्माष्टमी के लिए शहर से देहात तक बाजार कान्हा के रंग में रंगने लगा है। स्कूलों में कार्यक्रमों की धूम है तो घरों में लड्डूु गोपाल का इंतजार है। इस बार योग और नक्षत्र वैसे नहीं हैं, जैसे कृष्ण के जन्म के समय में थे। 30 साल पहले जन्माष्टमी के दिन जो संयोग था वह इस बार 15 अगस्त को पड़ रहे हैं। हालांकि गृहस्थ के लिए (स्मार्त) जन्माष्टमी 14 अगस्त को मनाई जाएगी, जबकि साधु संन्यासी (वैष्णव) 15 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि अष्टमी की बेला में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, लेकिन इस बार दोनों योग नहीं हैं। रोहिणी नक्षत्र 16 अगस्त को सुबह 2.32 बजे से होगा। इस बार 14 अगस्त की शाम 7 बजकर 48 मिनट पर अष्टमी तिथि का प्रवेश है जो मंगलवार शाम 5 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। ऐसे में अधिकतर लोग 14 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे। वैष्णवजन सूर्योदय तिथि अष्टमी वाले दिन यानी 15 अगस्त को कृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे। खास बात यह है कि 15 अगस्त की मध्यरात्रि में कृष्ण जन्म के समय न अष्टमी तिथि होगी और न रोहिणी नक्षत्र। ज्योतिषाचार्य संदीप भारद्वाज ने बताया कि इस साल जन्माष्टमी पर विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे संयोग सदियों में कुछ बार ही आते हैं। इससे पहले वर्ष 1865 में राहु और शनि का ऐसा योग बना था। कृष्ण जन्मोत्सव के साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह से रात 2.30 बजे तक रहेगा। यह योग श्रेष्ठता लेकर आएगा। चंद्रमा भी वृष राशि में, केंद्र में बुध व त्रिकोण में बृहस्पति रहेगा, जो आमजन व व्यापारी के लिए मिश्रित फलदायी रहेगा। इससे पहले वर्ष 2014 में भी रोहिणी के बजाय कृतिका नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाई थी।
विज्ञापन
ऐसे खुश होंगे कान्हा
>> भगवान को पीले पुष्प अर्पित करें तो आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
>> दक्षिणा वर्णी शंख में जल भरकर श्रीकृष्ण का अभिषेक से मनोकामनाएं पूरी होंगी।
>> श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
>> गरीबों और असहायों को फलाहार कराने से रोगों का नाश होगा।
>> जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की आराधना का विशेष महत्व होता है।