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आपका आहार ही आपकी औषधि है : एम्स
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ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में विश्व खाद्य दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में मरीजों और तीमारदारों को विश्व खाद्य दिवस विस्तृत जानकारियां दी गई। मरीजों और उनके तीमारदारों ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के समक्ष अपनी समस्याएं रखी, चिकित्सकों ने उनकी समस्याओं का समाधान किया।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. किरन मीणा ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। हरी सब्जी, दाल और मौसमी फलों का संतुलित आहार से हम जीवन में स्वस्थ रह सकते हैं। हमें बाजार में उपलब्ध भोजन को खाने की बजाए घर में बने भोजन का सेवन करना चाहिए। दुनिया में भूखमरी की समस्या को मद्देनजर हमें भोजन को खराब होने से बचाने के लिए आवश्यकता अनुसार ही अपनी थाली में भोजन परोसना चाहिए। किसी बड़ी पार्टी या समारोह में अक्सर अवशेष रहने वाले भोजन को स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाना चाहिए।
संस्थान के एनाटॉमी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर रश्मि मल्होत्रा ने कहा कि आपका आहार ही आपकी औषधि है। साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति व आयुर्वेद में आहार, विहार व आचार के लिए तय नियमों व खानपान से जुड़ी प्राचीन परंपराओं का अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वर्तमान जीवनशैली व फास्टफूड के अत्यधिक बढ़ते चलन से हमारे शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है और हम स्वस्थ जीवन नहीं जी पा रहे हैं। इस मौके पर बॉयो कैमेस्ट्री विभाग की प्रोफेसर सत्यावती राणा आदि शामिल थे।
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शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. किरन मीणा ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। हरी सब्जी, दाल और मौसमी फलों का संतुलित आहार से हम जीवन में स्वस्थ रह सकते हैं। हमें बाजार में उपलब्ध भोजन को खाने की बजाए घर में बने भोजन का सेवन करना चाहिए। दुनिया में भूखमरी की समस्या को मद्देनजर हमें भोजन को खराब होने से बचाने के लिए आवश्यकता अनुसार ही अपनी थाली में भोजन परोसना चाहिए। किसी बड़ी पार्टी या समारोह में अक्सर अवशेष रहने वाले भोजन को स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाना चाहिए।
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संस्थान के एनाटॉमी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर रश्मि मल्होत्रा ने कहा कि आपका आहार ही आपकी औषधि है। साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति व आयुर्वेद में आहार, विहार व आचार के लिए तय नियमों व खानपान से जुड़ी प्राचीन परंपराओं का अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वर्तमान जीवनशैली व फास्टफूड के अत्यधिक बढ़ते चलन से हमारे शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है और हम स्वस्थ जीवन नहीं जी पा रहे हैं। इस मौके पर बॉयो कैमेस्ट्री विभाग की प्रोफेसर सत्यावती राणा आदि शामिल थे।
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