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हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान हुई तीर्थनगरी

Sat, 07 Aug 2021 01:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 07 Aug 2021 01:45 AM IST
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The pilgrimage city resonated with the hymns of Har Har Mahadev
नीलकंठ महादेव मंदिर से जलाभिषेक कर लौटते शिवभक्त। - फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। श्रावण शिवरात्रि पर तीर्थनगरी के नीलकंठ धाम, चंद्रेश्वर महादेव मंदिर, सोमेश्वर महादेव मंदिर, वीरभद्र महादेव मंदिर के शिवालयों में जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह चार बजे से देर शाम तक शिवालयों में पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही है। शिवभक्तों ने मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की भी जमकर धज्जियां उड़ी। शिवभक्त में मास्क पहनने को लेकर भी लापरवाह नजर आए।
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शुक्रवार को श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर तीर्थनगरी पूरी तरह सो शिवमय नजर आई। नीलकंठ पैदल और मोटर मार्ग सुबह से ही हर हर महादेव और बम बम भोले के जयघोष से गूंजने लगा। शिवभक्तों ने त्रिवेणी घाट स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला से समेते विभिन्न घाटों पर गंगा स्नान किया। इसके बाद श्रद्धालु गंगा जल और पूजन सामाग्री लेकर नीलकंठ महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए पहुंचे । वहीं चंद्रेश्वर महादेव मंदिर, सोमेश्वर महादेव मंदिर, वीरभद्र महादेव मंदिर में भी स्थानीय शिवभक्तों ने शिवलिंग का जलाभिषेक किया। नीलकंठ धाम में देर शाम तक पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु की लंबी कतार लगी रही है। शिवभक्तों ने शिवलिंग पर बेल पत्र, दूध, शहद, घी और जल अर्पित कर मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान शंकर से प्रार्थना की। शिवालयों में जबरदस्त भीड़ के चलते सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियम भी टूट गए। कई भक्तों ने मास्क भी नहीं पहने थे। हालांकि नीलंकठ पुलिस ने मास्क न पहनने वाले पर्यटकों के चालान भी किए। जबकि बिना बाहरी राज्यों से बिना कोविड रिपोर्ट के नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को वापस भी लौटाया गया।
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प्लास्टिक कैन से अटा नीलकंठ धाम
नीलकंठ महादेव मंदिर में जलाभिषेक के बाद शिवभक्तों ने प्लास्टिक की कैन मंदिर में ही छोड़ दी। शाम तक मंदिर परिसर में प्लास्टिक की कैनियों का ढेर लग गया है। मंदिर के सफाई कर्मचारी लगातार सफाई करते रहे। लेकिन अमर उजाला प्लास्टिक की कैनियों का ढेर था कि कम होने का नाम हीं नहीं ले रहा था। मंदिर प्रबंधन समिति लगातार लाउडस्पीकर पर अनाउसमेंट कर शिवभक्तों से कोविड नियमों के पालन और कैनियों को मंदिर परिसर में न फेंकने की अपील करती रही।
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ऋषिकुमारों ने रोपे रुद्राक्ष के पौधे
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर ऋषिकुमारों ने मिलकर वैदिक मंत्रों के साथ शिवाभिषेक कर रूद्राक्ष के पौधे रोपे गए। विश्व शांति हवन का आयोजन किया गया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंनद सरस्वती ने कहा कि शिवरात्रि, शिव और शक्ति का प्रतीक है। भगवान शिव संहारक भी है और सजृन कर्ता भी है। शिव करुणा और दयालुता के प्रतीक हैं और महाशिवरात्रि तो शून्यता से विशालता के दर्शन कराती है। श्रावण माह प्रकृति और पर्यावरण की समृद्धि का प्रतीक है। यह दिव्य माह हमें नैसर्गिक सौंदर्य के संवर्धन और संतुलित जीवन का संदेश देता है। हम सभी को शिवाभिषेक के साथ धराभिषेक भी करना होगा। इस मानसून में कम से कम पांच पौधों का रोपण अवश्य करें।

 चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते शिवभक्त।

चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते शिवभक्त।- फोटो : RISHIKESH

सोमेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते शिवभक्त।

सोमेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते शिवभक्त।- फोटो : RISHIKESH

 नीलकंठ महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते शिवभक्त।

नीलकंठ महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते शिवभक्त।- फोटो : RISHIKESH

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