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Rishikesh News: गरीब बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठा रहे गोविंद
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गरीब छात्रों की खुद जमा करते हैं फीस, 500 छात्रों को मुहैया करा चुके हैं पठन-पाठन सामग्री
शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिल चुके हैं पुरस्कार
शिक्षक का कार्य सिर्फ विद्यालय आने वाले छात्रों को पढ़ाना ही नहीं बल्कि किन्हीं कारणों से पढ़ाई से दूर हो रहे बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना भी है। श्री भरत मंदिर इंटर काॅलेज के प्रधानाचार्य गोविंद सिंह रावत इसका उदाहरण हैं। गोविंद सिंह 39 सालों से छात्रों को पढ़ाने के साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। कई छात्रों की हर माह फीस भी देते हैं।
गोविंद सिंह रावत 25 सितंबर 1989 से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 25 सितंबर 1989 को श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में अध्यापन की शुरुआत की। रावत कहते हैं कई बार परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं। जिसका खामियाजा समाज को भी भुगतना पड़ता है। समाज एक अच्छी प्रतिभा को खो देता है।
उनका उद्देश्य है कि हर बच्चा पढ़ाई पूरी कर सके। रावत अपने सेवाकाल के 39 वर्षों में 500 से अधिक छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री देने के साथ ही शिक्षा शुल्क भी देते आ रहे हैं। इतना ही नहीं वह सामाजिक संस्थाओं जैसे टीएचडीसी, रोटरी क्लब, लॉयन क्लब आदि के सहयोग से भी छात्र छात्राओं को मदद दिलाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके बेहतरीन कार्य को देखते हुए वर्ष 2007-08 में दीन दयाल शैक्षिक उत्कृष्ठता पुरस्कार और वर्ष 2017-18 शैलेश मटियानी पुरस्कार भी मिल चुका है।
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शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिल चुके हैं पुरस्कार
शिक्षक का कार्य सिर्फ विद्यालय आने वाले छात्रों को पढ़ाना ही नहीं बल्कि किन्हीं कारणों से पढ़ाई से दूर हो रहे बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना भी है। श्री भरत मंदिर इंटर काॅलेज के प्रधानाचार्य गोविंद सिंह रावत इसका उदाहरण हैं। गोविंद सिंह 39 सालों से छात्रों को पढ़ाने के साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। कई छात्रों की हर माह फीस भी देते हैं।
गोविंद सिंह रावत 25 सितंबर 1989 से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 25 सितंबर 1989 को श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में अध्यापन की शुरुआत की। रावत कहते हैं कई बार परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं। जिसका खामियाजा समाज को भी भुगतना पड़ता है। समाज एक अच्छी प्रतिभा को खो देता है।
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उनका उद्देश्य है कि हर बच्चा पढ़ाई पूरी कर सके। रावत अपने सेवाकाल के 39 वर्षों में 500 से अधिक छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री देने के साथ ही शिक्षा शुल्क भी देते आ रहे हैं। इतना ही नहीं वह सामाजिक संस्थाओं जैसे टीएचडीसी, रोटरी क्लब, लॉयन क्लब आदि के सहयोग से भी छात्र छात्राओं को मदद दिलाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके बेहतरीन कार्य को देखते हुए वर्ष 2007-08 में दीन दयाल शैक्षिक उत्कृष्ठता पुरस्कार और वर्ष 2017-18 शैलेश मटियानी पुरस्कार भी मिल चुका है।
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