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शासन ने निगम को दिया झटका, शहरवासियों की टूटी उम्मीद

Sat, 05 Mar 2022 12:08 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 05 Mar 2022 12:08 AM IST
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The government gave a blow to the corporation, the city residents lost hope
नगर निगम ऋषिकेश ने कोरोना महामारी का हवाला देते हुए गृहकर की पुरानी व्यवस्था को यथावत रखने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। व्यापारियों और आम लोगों ने निगम के इस कदम की सराहना की थी। वहीं मेयर अनीता ममगाईं का अभिनंदन भी किया था लेकिन अब शासन के प्रस्ताव को सिरे से नकारने के बाद व्यापारी और आम वर्ग निराश है। व्यापारियों और आम जनता का कहना है कोरोना काल और महंगाई के चरम पर होने से घर का बजट पहले से गड़बड़ा गया है। बिजली, पानी और बच्चों की स्कूल फीस के भुगतान में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में स्वकर प्रणाली से अधिक गृहकर का भुगतान करना पड़ेगा, जिससे आम वर्ग को आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
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कोरोनाकाल में मंदी के चलते व्यापारियों को पहले ही नुकसान उठाना पड़ा था। बढ़ती महंगाई के चलते व्यापारियों को दोहरा आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। व्यापारी बिजली, पानी के बिल और बच्चों की स्कूल फीस का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। अब बढ़ी हुई दरों पर व्यापारी गृहकर का भुगतान कैसे कर पाएंगे। नई सरकार के गठन के बाद गृहकर में राहत के लिए व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलेगा।
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- ललित मोहन मिश्रा, अध्यक्ष, नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल
व्यापारी शुरूआत से नई गृहकर प्रणाली के विरोध में है। पहले शासन स्तर पर मामला विचाराधीन था, लेकिन अब शासन ने अपना रुख साफ कर दिया है तो व्यापारी विरोध को लेकर रूपरेखा तैयार करेंगे। मेयर से भी मुलाकात कर पुरानी गृहकर व्यवस्था को लागू करने की मांग की जाएगी।
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- प्रतीक कालिया, महामंत्री, नगर उद्योग व्यापारी प्रतिनिधि मण्डल
- पिछले दो सालों से व्यापारी पहले लॉकडाउन और फिर मंदी की मार झेल रहे हैं। अब गृहकर की बढ़ी हुई दरों पर भुगतान करना पड़ेगा। व्यापारियों पर कई महीनों के बिजली और पानी के बिलों का बकाया है। व्यापारियों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गृहकर का भुगतान व्यापारी कैसे कर पाएगा।
प्रिंस मनचंदा, व्यापारी
नगर निगम ने शहर हित में निर्णय लिया था। कोरोना काल और बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार से भी गृहकर में राहत देने की उम्मीद थी, लेकिन शासन ने जनहित से ज्यादा राजस्व बढ़ाने की तरजीह दी। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

- सोनिया तिवारी, गृहणी
नगर निगम के निर्णय से राहत की उम्मीद जगी थी। लेकिन शासन ने आम लोगों की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया। समझ नहीं आ रहा कि इस मंहगाई के दौर बढ़ी हुई दरों को गृहकर का भुगतान कैसे करेंगे।
- सीमा शर्मा, गृहणी
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