{"_id":"6532c6e6d4a789b8e00bd787","slug":"the-five-day-maa-shabari-ramlila-mahotsav-has-started-rishikesh-news-c-5-1-drn1032-270977-2023-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rishikesh News: परमार्थ गंगा तट पर मां शबरी रामलीला महोत्सव का आगाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rishikesh News: परमार्थ गंगा तट पर मां शबरी रामलीला महोत्सव का आगाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Iमध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़िसा आदि प्रांतों के जनजाति व आदिवासी कलाकारों ने रामलीला मंचनI
परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर पांच दिवसीय मां शबरी रामलीला महोत्सव का आगाज हो गया। रामलाली का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, स्वामी चिदानंद सरस्वती, डॉ.शक्ति बख्शी व विश्व मोहन ने किया। जिसमें स्पेन, अमेरिका, इंग्लैंड, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, दुबई, फ्रांस, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्रजलैंड, इटली, कनाडा, ऑस्ट्रिया आदि देशों के श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया।
भारतीय संस्कृति और विरासत का अद्भुत आध्यात्मिक ग्रंथ महाकाव्य रामायण का मंचन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा आदि प्रांतों के जनजाति, आदिवासी कलाकार कर रहे हैं। रामलीला का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त भेदभाव, ऊंच-नीच और अस्पृश्यता को पूरी तरह से समाप्त करना है। साथ ही भगवान श्रीराम के जीवन की घटनाओं, अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के दर्शन कराना है।
स्वामी चिदानंद ने कहा कि मां गंगा के तट पर रामलीला के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का मंचन किया जा रहा है। जिससे रामायण में निहित मूल्यों, ज्ञान, संबंधों के महत्व और शिक्षाओं को वर्तमान पीढ़ी जान सके।
विज्ञापन
कैबिनेट मंत्री अग्रवाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता पूरी दुनिया में सबसे पुरानी जीवंत सभ्यताओं में से एक है, जो वर्तमान समय में भी ज्ञान और भक्ति का सर्वश्रेष्ठ संदेश देती है। प्रभु श्रीराम का चरित्र सभी को एक नई ऊर्जा और नूतन विचार प्रदान करता है। रामलीला वर्तमान पीढ़ी को मातृभाषा और पूर्वजों के संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देती है। इस दौरान स्वामी चिदानंद ने मंत्री अग्रवाल सहित विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों को रूद्राक्ष की पौध भेंट की।
विज्ञापन
परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर पांच दिवसीय मां शबरी रामलीला महोत्सव का आगाज हो गया। रामलाली का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, स्वामी चिदानंद सरस्वती, डॉ.शक्ति बख्शी व विश्व मोहन ने किया। जिसमें स्पेन, अमेरिका, इंग्लैंड, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, दुबई, फ्रांस, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्रजलैंड, इटली, कनाडा, ऑस्ट्रिया आदि देशों के श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया।
भारतीय संस्कृति और विरासत का अद्भुत आध्यात्मिक ग्रंथ महाकाव्य रामायण का मंचन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा आदि प्रांतों के जनजाति, आदिवासी कलाकार कर रहे हैं। रामलीला का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त भेदभाव, ऊंच-नीच और अस्पृश्यता को पूरी तरह से समाप्त करना है। साथ ही भगवान श्रीराम के जीवन की घटनाओं, अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के दर्शन कराना है।
विज्ञापन
स्वामी चिदानंद ने कहा कि मां गंगा के तट पर रामलीला के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का मंचन किया जा रहा है। जिससे रामायण में निहित मूल्यों, ज्ञान, संबंधों के महत्व और शिक्षाओं को वर्तमान पीढ़ी जान सके।
विज्ञापन
कैबिनेट मंत्री अग्रवाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता पूरी दुनिया में सबसे पुरानी जीवंत सभ्यताओं में से एक है, जो वर्तमान समय में भी ज्ञान और भक्ति का सर्वश्रेष्ठ संदेश देती है। प्रभु श्रीराम का चरित्र सभी को एक नई ऊर्जा और नूतन विचार प्रदान करता है। रामलीला वर्तमान पीढ़ी को मातृभाषा और पूर्वजों के संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देती है। इस दौरान स्वामी चिदानंद ने मंत्री अग्रवाल सहित विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों को रूद्राक्ष की पौध भेंट की।