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Rishikesh News: चेक बाउंस के अभियुक्त को एक वर्ष की कैद
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न्यायालय सिविल जज न्यायिक मजिस्ट्रेट विशाल वशिष्ठ की अदालत ने चेक बाउंस के अभियुक्त को दोष सिद्ध पाते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त को 10 लाख 50 हजार की धनराशि प्रतिकर के तौर पर परिवादी को देने के आदेश भी दिए हैं।
राहुल देव सेमवाल निवासी आदर्श नगर जौलीग्रांट ने 14 मई 2019 को न्यायालय में वाद दायर किया था। राहुल देव ने न्यायालय को बताया कि मधुर विहार अजबुपर खुर्द बंजारावाला निवासी दिनेश प्रकाश बहुगुणा ने आईएसबीटी के समीप एमडीडीए का एक फ्लैट उसे बेचने की बात कही थी।
फरवरी 2016 में फ्लैट का सौदा 15 लाख में तय किया गया था। राहुल ने बताया कि अग्रिम राशि के तौर पर उसने दिनेश प्रकाश को 7 लाख का भुगतान किया। लेकिन काफी समय बाद भी दिनेश ने फ्लैट पर कब्जा नहीं दिलाया। राहुल ने बताया कि 24 फरवरी 2019 को जब उसने दिनेश से अपनी अग्रिम भुगतान की गई 7 लाख की धनराशि वापस मांगी तो दिनेश ने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के कारगी चौक शाखा का 7 लाख का चेक दिया।
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जब चेक खाते में जमा कराया गया तो बैंक ने अपर्याप्त धनराशि कह कर चेक वापस लौटा दिया। इसकी जानकारी दिनेश प्रकाश को भी दी गई। बावजूद इसके दिनेश ने धनराशि वापस नहीं की। जिस पर उसे मजबूरन कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय सिविल जज न्यायिक मजिस्ट्रेट विशाल वशिष्ठ की अदालत ने दिनेश प्रकाश बहुगुणा को दोष सिद्ध पाते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त को 10 लाख 50 हजार की धनराशि प्रतिकर के तौर पर परिवादी को देने के आदेश भी दिए हैं।
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राहुल देव सेमवाल निवासी आदर्श नगर जौलीग्रांट ने 14 मई 2019 को न्यायालय में वाद दायर किया था। राहुल देव ने न्यायालय को बताया कि मधुर विहार अजबुपर खुर्द बंजारावाला निवासी दिनेश प्रकाश बहुगुणा ने आईएसबीटी के समीप एमडीडीए का एक फ्लैट उसे बेचने की बात कही थी।
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फरवरी 2016 में फ्लैट का सौदा 15 लाख में तय किया गया था। राहुल ने बताया कि अग्रिम राशि के तौर पर उसने दिनेश प्रकाश को 7 लाख का भुगतान किया। लेकिन काफी समय बाद भी दिनेश ने फ्लैट पर कब्जा नहीं दिलाया। राहुल ने बताया कि 24 फरवरी 2019 को जब उसने दिनेश से अपनी अग्रिम भुगतान की गई 7 लाख की धनराशि वापस मांगी तो दिनेश ने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के कारगी चौक शाखा का 7 लाख का चेक दिया।
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जब चेक खाते में जमा कराया गया तो बैंक ने अपर्याप्त धनराशि कह कर चेक वापस लौटा दिया। इसकी जानकारी दिनेश प्रकाश को भी दी गई। बावजूद इसके दिनेश ने धनराशि वापस नहीं की। जिस पर उसे मजबूरन कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय सिविल जज न्यायिक मजिस्ट्रेट विशाल वशिष्ठ की अदालत ने दिनेश प्रकाश बहुगुणा को दोष सिद्ध पाते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त को 10 लाख 50 हजार की धनराशि प्रतिकर के तौर पर परिवादी को देने के आदेश भी दिए हैं।