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Rishikesh News: चेक बाउंस के अभियुक्त को पांच महीने का सश्रम कारावास
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Iअभियुक्त पर 24 लाख 50 हजार का अर्थदंड लगाया
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Iन्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने सुनाया फैसलाI
न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने चेक बाउंस के अभियुक्त को दोष सिद्ध पाते हुए पांच महीने की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त पर 24 लाख 50 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है। जिसमें 24 लाख 48 हजार रुपये की धनराशि परिवादी को प्रतिकर के रूप में देनी होगी। जबकि दो हजार की धनराशि अर्थदंड के रूप में राजकोष में जमा करनी होगी।
नेहरुग्राम निवासी अजय बिष्ट ने 21 जनवरी 2019 को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया था। अजय बिष्ट ने बताया कि उसने अभियुक्त बसंत कुमाईं के साथ विदेशी मदिरा और फुटकर बीयर का पार्टनरशिप में काम शुरू किया था। अजय बिष्ट ने बताया कि उसने कारोबार शुरू करने के लिए 48 लाख 72 हजार 649 लगाए थे। कारोबारी फर्म ने 19 जुलाई 2018 को 30 लाख 50 हजार की धनराशि दी। इसके बाद फर्म ने उसे कोई भी धनराशि नहीं दी।
अजय ने बताया कि जब उसने हिसाब किताब किया तो बसंत कुमांई पर 24 लाख 10 हजार की देनदारी निकली। जिस पर बसंत कुमांई ने उक्त धनराशि का पीएनबी श्यामपुर का चेक दिया। जब उक्त चेक को बैंक में लगाया गया तो बैंक ने खाते में धनराशि कम होने चेक लौटा दिया। अजय बिष्ट ने कहा कि चेक लौटाने की सूचना बसंत कुमांई को दी गई। लेकिन उसने धनराशि नहीं लौटाई। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने फैसला सुनाया।
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Iन्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने सुनाया फैसलाI
न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने चेक बाउंस के अभियुक्त को दोष सिद्ध पाते हुए पांच महीने की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त पर 24 लाख 50 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है। जिसमें 24 लाख 48 हजार रुपये की धनराशि परिवादी को प्रतिकर के रूप में देनी होगी। जबकि दो हजार की धनराशि अर्थदंड के रूप में राजकोष में जमा करनी होगी।
नेहरुग्राम निवासी अजय बिष्ट ने 21 जनवरी 2019 को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया था। अजय बिष्ट ने बताया कि उसने अभियुक्त बसंत कुमाईं के साथ विदेशी मदिरा और फुटकर बीयर का पार्टनरशिप में काम शुरू किया था। अजय बिष्ट ने बताया कि उसने कारोबार शुरू करने के लिए 48 लाख 72 हजार 649 लगाए थे। कारोबारी फर्म ने 19 जुलाई 2018 को 30 लाख 50 हजार की धनराशि दी। इसके बाद फर्म ने उसे कोई भी धनराशि नहीं दी।
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अजय ने बताया कि जब उसने हिसाब किताब किया तो बसंत कुमांई पर 24 लाख 10 हजार की देनदारी निकली। जिस पर बसंत कुमांई ने उक्त धनराशि का पीएनबी श्यामपुर का चेक दिया। जब उक्त चेक को बैंक में लगाया गया तो बैंक ने खाते में धनराशि कम होने चेक लौटा दिया। अजय बिष्ट ने कहा कि चेक लौटाने की सूचना बसंत कुमांई को दी गई। लेकिन उसने धनराशि नहीं लौटाई। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने फैसला सुनाया।
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