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टीबी उन्मूलन के लिए जांच, उपचार और जनभागीदारी जरूरी: राज्यपाल
Fri, 09 Oct 2026 08:56 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 09 Oct 2026 08:56 PM IST
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-एम्स ऋषिकेश में राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद, दूरस्थ क्षेत्रों तक दवाएं पहुंचाने में ड्रोन तकनीक को बताया अहम
टीबी उन्मूलन के लिए जांच, उपचार और जनभागीदारी जरूरी: राज्यपाल
ऋषिकेश। टीबी के खिलाफ जंग केवल दवाओं से नहीं, बल्कि समय पर जांच, पोषण, जनजागरूकता और सामाजिक भागीदारी से जीती जा सकती है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने शुक्रवार को एम्स ऋषिकेश में आयोजित टीबी पर राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद में यह बात कही। उन्होंने टीबी मरीजों के प्रति भेदभाव खत्म करने और आधुनिक तकनीक के जरिए दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों में दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में एम्स ऋषिकेश की ओर से ड्रोन तकनीक के माध्यम से टीबी की दवाएं पहुंचाने की पहल महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि मरीज की पहचान कितनी जल्दी हुई और उसका उपचार कब शुरू हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान, निक्षय पोषण योजना और निक्षय मित्र पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, निक्षय मित्रों और समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। टीबी मरीजों को भेदभाव नहीं, बल्कि सम्मान और सहयोग मिलना चाहिए। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह, पॉलिसी रेजीलेंस फाउंडेशन के निदेशक नंदीश आर. पैठानी, आयोजन अध्यक्ष डॉ. प्रतिमा गुप्ता और डॉ. गिरीश सिंधवानी सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
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टीबी उन्मूलन के लिए जांच, उपचार और जनभागीदारी जरूरी: राज्यपाल
ऋषिकेश। टीबी के खिलाफ जंग केवल दवाओं से नहीं, बल्कि समय पर जांच, पोषण, जनजागरूकता और सामाजिक भागीदारी से जीती जा सकती है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने शुक्रवार को एम्स ऋषिकेश में आयोजित टीबी पर राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद में यह बात कही। उन्होंने टीबी मरीजों के प्रति भेदभाव खत्म करने और आधुनिक तकनीक के जरिए दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों में दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में एम्स ऋषिकेश की ओर से ड्रोन तकनीक के माध्यम से टीबी की दवाएं पहुंचाने की पहल महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि मरीज की पहचान कितनी जल्दी हुई और उसका उपचार कब शुरू हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान, निक्षय पोषण योजना और निक्षय मित्र पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, निक्षय मित्रों और समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। टीबी मरीजों को भेदभाव नहीं, बल्कि सम्मान और सहयोग मिलना चाहिए। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह, पॉलिसी रेजीलेंस फाउंडेशन के निदेशक नंदीश आर. पैठानी, आयोजन अध्यक्ष डॉ. प्रतिमा गुप्ता और डॉ. गिरीश सिंधवानी सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
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