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आठ माह में चार दिन कॉलेज आई शिक्षिका
ब्यूरो, अमर उजाला/ऋषिकेश
Updated Wed, 23 Dec 2015 01:45 AM IST
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राजकीय इंटर कॉलेज गंगाभोगपुर में तैनात रसायन विज्ञान की प्रवक्ता पूरे साल में अधिकतर समय अवकाश पर रही। पिछले आठ माह में केवल चार दिन ही शिक्षिका स्कूल आईं। रसायन विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय के शिक्षक के लगातार दो शिक्षण सत्रों में विभिन्न चरणों में अवकाश के लिए विभागीय स्तर पर आवेदन किया है।
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अवकाश स्वीकृति देने से पहले महकमे के जिम्मेदार अफसरों ने विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के भविष्य की चिंता नहीं की। वैकल्पिक शिक्षक की तैनाती नहीं होने से विद्यालय में रसायन विज्ञान पढ़ने वाले बच्चे परेशान हैं। शिक्षिका बीते शिक्षण सत्र में एक अप्रैल 2014 से 25 मई 2015 में चार महीने से अधिक समय तक अवकाश पर रहीं।
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चालू शिक्षण सत्र 2015-16 में अब तक केवल चार दिन स्कूल आई और लगभग आठ महीने अवकाश ले चुकी हैं। बीते सत्र के कक्षा 11 और 12 विज्ञान वर्ग के बच्चों को तो नुकसान उठाना ही पड़ा, चालू सत्र में यहां अध्ययनरत 24 बच्चों का भविष्य भी अंधकार में हैं। छुट्टी की संस्तुति देने वाले प्रधानाचार्य से लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी तक किसी ने छात्रों की दिक्कत नहीं देखी। वैकल्पिक शिक्षक की तैनाती नहीं की।
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18 जनवरी से 24 मई तक फिर आवेदन
रसायन प्रवक्ता जुलाई-2014 से अब तक पांच से अधिक बार लंबी छुट्टियां ले चुकी हैं। जिनमें न्यूनतम 29 और अधिकतम 53 दिन की छुट्टियां शामिल हैं। बीते महीने नवंबर 17 से अवकाश पर हैं और 30 दिसंबर तक स्कूल नहीं आएंगी। अब उन्होंने अगले साल के अवकाश की प्लानिंग भी कर दी है।
करीब महीनेभर पहले विद्यालय को मिले उनके अवकाश के आवेदन पत्र में उन्होंने 18 जनवरी से 24 मई तक लगभग साढ़े चार महीने की लंबी छुट्टी मांगी है। इसके बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो जाएगा।
पीटीए ने अपने खर्च में रखा है शिक्षक
कक्षा 11 के 14 और 12वीं के 11 बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक अभिभावक संघ ने प्राइवेट अध्यापक रखा है। पीटीए अध्यक्ष संजय कुकरेती ने बताया कि एसोसिएशन ने निजी खर्च पर आठ हजार रुपये में शिक्षक को तैनात किया है। उनका कहना है कि विभाग को महत्वपूर्ण विषय के शिक्षक को इतना लंबा अवकाश नहीं देना चाहिए। अवकाश देना जरूरी है तो वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
अफसरों की सुनिए
मैंने विद्यालय में दो माह पहले ही ज्वाइनिंग ली है। शिक्षक लंबे समय से अवकाश पर हैं जिससे पठन-पाठन बाधित हो रहा है। शिक्षक की ओर से एक महीने पहले ही जनवरी से मई तक अग्रिम अवकाश का आवेदन किया है। जिसे आपत्ति प्रमाण-पत्र के साथ विभाग को अग्रसारित किया गया है।-हीरामणि बडोनी, प्रधानाचार्य।
मैंने डिलीवरी के समय मातृत्व अवकाश लिया था। उसके बाद सीसीएल के तहत अवकाश स्वीकृत कराया। मेरी बड़ी बेटी विकलांग है। उसकी देखभाल के लिए छुट्टी ली है। विभाग में उक्त दोनों अवकाश का प्रावधान है। मैं मानती हूं कि मेरे लंबे अवकाश पर होने से पठन-पाठन कार्य प्रभावित हो रहा होगा, इसकी व्यवस्था विभाग या विद्यालय प्रशासन को करनी चाहिए, जिससे बच्चों की पढ़ाई ठीक से हो सके।-सुमन धूलिया, प्रवक्ता रसायन विज्ञान।