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सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को 13.50 लाख देने के दिए आदेश
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सुप्रीम कोर्ट ने यूनाइटेड इंडिया बीमा कंपनी को जेेसीबी स्वामी को 13.50 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। मामला 13 साल पुराना है। जेसीबी स्वामी जिला और राज्य उपभोक्ता फोरम में जीत गए। लेकिन आदेश के विरुद्ध बीमा कंपनी राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत चली गई और जीत गई। जेसीबी स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया दिया।
अधिवक्ता क्रांति भंडारी ने बताया कि वर्ष 2009 में शारदा एसोसिएट के मालिक बीएन कोटियाल ने एक जेसीबी खरीदी थी। जिसका बीमा उन्होंने यूनाइटेड इंडिया बीमा कंपनी से कराया था। कुछ समय काम करने के दौरान जेसीबी मशीन क्षतिग्रस्त हो गई। बीएन कोटियाल ने बीमा कंपनी से मशीन की क्षति का भुगतान करने का दावा किया, लेकिन बीमा कंपनी ने दावा अस्वीकार कर दिया गया।
बीमा कंपनी के सर्वेयरों का कहना था कि जेसीबी पलट गई थी जो बीमा पॉलिसी के तहत कवर नहीं है। ऐसी दुर्घटना को कवर करने के लिए अतिरिक्त प्रीमियम देना था। दावा खारिज होने के बाद बीएन कोटियाल ने जिला व राज्य उपभोक्ता फोरम की अदालत में गए। जहां दोनों अदालतों ने पक्ष में फैसला देते हुए बीमा कंपनी को दावे का भुगतान करने के आदेश दिए। लेकिन बीमा कंपनी मामले को राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में ले गई। जहां राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया। जिसके बाद जेसीबी मालिक ने राष्ट्रीय उपभोक्ता के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
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अधिवक्ता क्रांति विक्रम सिंह भंडारी ने बताया उन्होंने और साथी अधिवक्ता जयदीप सिंह ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम के आदेश को उलट दिया। जेसीबी मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 13 लाख 50 हजार रुपये ब्याज के साथ देने के आदेश दिए।
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अधिवक्ता क्रांति भंडारी ने बताया कि वर्ष 2009 में शारदा एसोसिएट के मालिक बीएन कोटियाल ने एक जेसीबी खरीदी थी। जिसका बीमा उन्होंने यूनाइटेड इंडिया बीमा कंपनी से कराया था। कुछ समय काम करने के दौरान जेसीबी मशीन क्षतिग्रस्त हो गई। बीएन कोटियाल ने बीमा कंपनी से मशीन की क्षति का भुगतान करने का दावा किया, लेकिन बीमा कंपनी ने दावा अस्वीकार कर दिया गया।
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बीमा कंपनी के सर्वेयरों का कहना था कि जेसीबी पलट गई थी जो बीमा पॉलिसी के तहत कवर नहीं है। ऐसी दुर्घटना को कवर करने के लिए अतिरिक्त प्रीमियम देना था। दावा खारिज होने के बाद बीएन कोटियाल ने जिला व राज्य उपभोक्ता फोरम की अदालत में गए। जहां दोनों अदालतों ने पक्ष में फैसला देते हुए बीमा कंपनी को दावे का भुगतान करने के आदेश दिए। लेकिन बीमा कंपनी मामले को राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में ले गई। जहां राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया। जिसके बाद जेसीबी मालिक ने राष्ट्रीय उपभोक्ता के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
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अधिवक्ता क्रांति विक्रम सिंह भंडारी ने बताया उन्होंने और साथी अधिवक्ता जयदीप सिंह ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम के आदेश को उलट दिया। जेसीबी मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 13 लाख 50 हजार रुपये ब्याज के साथ देने के आदेश दिए।