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सत्यापन के लिए अलग पुलिस अधीक्षक की हो तैनाती
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रानीपोखरी में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या की घटना से स्थानीय लोग सहमे हुए हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस के सत्यापन अभियान पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही जिले में सत्यापन के लिए एसपी स्तर के अधिकारी की तैनाती करने की मांग की है।
स्थानीय निवासी अतुल मोहन सकलानी और पूूूर्णानंद तिवारी ने बताया कि छह साल में उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों के कई लोगों ने रानीपोखरी, भोगपुर, थानो, घमंडपुर, भानियावाला में भूमि खरीदी और मकान बनाए। साथ ही दूसरे राज्यों के कई लोग यहां किराये पर रह रहे हैं। इनमें कई लोगों की गतिविधि संदिग्ध है, लेकिन पुलिस इनका सत्यापन नहीं करती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक बांग्लादेशी महिला ऋषिकेश आवास विकास में सात साल से रह रही थी, पुलिस को उसका पता नहीं चला। उसी प्रकार रानीपोखरी, भानियावाला, डोईवाला आदि क्षेत्रों कई संदिग्ध रह रहे हैं। रानीपोखरी की शांति नगर कॉलोनी में बाहरी लोगों ने ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर झुग्गी झोपड़ियां बना दी हैं। यहां भी कई संदिग्ध लोग रह रहे हैं। इन लोगों की आजीविका कैसे चलती है किसी को पता नहीं है। बताया कि पुलिस की ओर से केवल रस्म अदायगी के लिए दो दिन सत्यापन अभियान चलाया जाता है। इसलिए सत्यापन अभियान प्रभावी ढंग से चलाने के लिए एसपी स्तर के अधिकारी की तैनाती होनी चाहिए। इसके लिए अलग से टास्क फोर्स भी बननी चाहिए, जो केवल किरायेदारों, बाहरी लोगों का सत्यापन का ही काम करे।
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स्थानीय निवासी अतुल मोहन सकलानी और पूूूर्णानंद तिवारी ने बताया कि छह साल में उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों के कई लोगों ने रानीपोखरी, भोगपुर, थानो, घमंडपुर, भानियावाला में भूमि खरीदी और मकान बनाए। साथ ही दूसरे राज्यों के कई लोग यहां किराये पर रह रहे हैं। इनमें कई लोगों की गतिविधि संदिग्ध है, लेकिन पुलिस इनका सत्यापन नहीं करती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक बांग्लादेशी महिला ऋषिकेश आवास विकास में सात साल से रह रही थी, पुलिस को उसका पता नहीं चला। उसी प्रकार रानीपोखरी, भानियावाला, डोईवाला आदि क्षेत्रों कई संदिग्ध रह रहे हैं। रानीपोखरी की शांति नगर कॉलोनी में बाहरी लोगों ने ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर झुग्गी झोपड़ियां बना दी हैं। यहां भी कई संदिग्ध लोग रह रहे हैं। इन लोगों की आजीविका कैसे चलती है किसी को पता नहीं है। बताया कि पुलिस की ओर से केवल रस्म अदायगी के लिए दो दिन सत्यापन अभियान चलाया जाता है। इसलिए सत्यापन अभियान प्रभावी ढंग से चलाने के लिए एसपी स्तर के अधिकारी की तैनाती होनी चाहिए। इसके लिए अलग से टास्क फोर्स भी बननी चाहिए, जो केवल किरायेदारों, बाहरी लोगों का सत्यापन का ही काम करे।
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