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Rishikesh News: जनजातीय संगीत परंपराओं को विद्यार्थियों ने जाना
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स्पिक मैके ने एसआरएचयू जौलीग्रांट में बस्तर बैंड की सांस्कृतिक प्रस्तुति का आयोजन किया। कलाकारों ने बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संगीत परंपराओं से छात्रों को परिचित कराया।
बृहस्पतिवार को एसआरएचयू के हिमालयन रिक्रिएशन क्लब एंड वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फेमस बस्तर बैंड की सांस्कृतिक प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कलाकारों ने छात्र-छात्राओं को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय संगीत परंपराओं से रूबरू कराया।
एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम से छात्र-छात्राओं को जनजातीय संगीत परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिला है। पद्मश्री अनूप रंजन पांडे ने बस्तर बैंड के बारे में जानकारी दी। कहा कि बैंड में मुरिया, डंडामी मड़िया, धुर्वा, भत्रा, मुंडा और हल्बा जैसे जनजातीय समुदाय के कलाकार जुड़े हैं। अब तक यह बैंड करीब 52 ग्राम कला समूहों से 10,000 से अधिक कलाकारों को जोड़ चुका है। देवी-देवताओं के स्वागत के लिए गाया जाने वाला गीत डोंकी पाटा की प्रस्तुति दी गई। इस दौरान रिक्रिएशन क्लब की ओर से डॉ. हर्ष बहादुर, रूपेश महरोत्रा, अमरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को एसआरएचयू के हिमालयन रिक्रिएशन क्लब एंड वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फेमस बस्तर बैंड की सांस्कृतिक प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कलाकारों ने छात्र-छात्राओं को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय संगीत परंपराओं से रूबरू कराया।
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एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम से छात्र-छात्राओं को जनजातीय संगीत परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिला है। पद्मश्री अनूप रंजन पांडे ने बस्तर बैंड के बारे में जानकारी दी। कहा कि बैंड में मुरिया, डंडामी मड़िया, धुर्वा, भत्रा, मुंडा और हल्बा जैसे जनजातीय समुदाय के कलाकार जुड़े हैं। अब तक यह बैंड करीब 52 ग्राम कला समूहों से 10,000 से अधिक कलाकारों को जोड़ चुका है। देवी-देवताओं के स्वागत के लिए गाया जाने वाला गीत डोंकी पाटा की प्रस्तुति दी गई। इस दौरान रिक्रिएशन क्लब की ओर से डॉ. हर्ष बहादुर, रूपेश महरोत्रा, अमरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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