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आरटीई : 20 दिनों में सौंपे दाखिला लेने वाले बच्चों की रिपोर्ट
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तहसील में आयोजित बैठक में फटकार लगाती बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी।
- फोटो : RISHIKESH
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शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत दाखिलों में हुई गड़बड़ी पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग की अध्यक्ष ने बैठक कर लेखपाल को फटकार लगाते हुए 20 दिनों के भीतर ऋषिकेश के स्कूलों में आरटीई के तहत शिक्षा ले रहे बच्चों की रिपोर्ट सौंपने को कहा है। साथ ही प्रत्येक स्कूल में आरटीई के तहत कितने बच्चों को लाभ मिल रहा है, का आंकड़ा भी उपलब्ध कराने को कहा है।
सोमवार को बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ऋषिकेश तहसील पहुंची। यहां उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनी। यहां एक युवती ने आयोग की अध्यक्ष के समक्ष आय प्रमाणपत्र जारी न किए जाने का मुद्दा रखा। उन्होंने कहा कि एक महिला का पति ढाबे में काम करता है, उसका लेखपाल सतीश चंद जोशी ने आय प्रमाण जारी नहीं किया। यही नहीं लेखपाल ने किसी से भी शिकायत करने की बात कही। युवती ने आरोप लगाया कि अन्य लोगों के आय प्रमाणपत्र बिना किसी जांच के जारी कर दिए गए। लेखपाल ने आईफोन रखने वाले के प्रमाणपत्र जारी किए तथा क्षेत्र में जाकर स्वयं वेरिफिकेशन नहीं किया, बल्कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से इसकी जांच करवाई। जब उन्होंने मामला आयोग के सामने उठाया तो उक्त महिलाएं उनके घर आकर धमकी दे रही हैं।
इस पर आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने तहसीलदार रेखा आर्य से जवाब मांगा। तहसीलदार ने बताया कि आय प्रमाणपत्र बनाने वाले लोग अपनी मासिक आय 4000 रुपये ही बताते हैं, उनका तर्क होता है कि क्या जब वह कच्चे मकानों में रहेंगे तभी उन्हें निर्धन माना जाएगा। तहसीलदार ने कहा कि पटवारी क्षेत्र पर जाकर वेरिफिकेशन नहीं करते हैं। इस पर उषा नेगी ने कहा कि तहसीलदार भी मौके पर जाकर सत्यापन करें।
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काम नहीं हो रहा तो घर बैठें
आयोग अध्यक्ष उषा नेगी ने लेखपाल सतीश चंद जोशी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आपको सरकार काम करने की एवज में वेतन दे रही है। यदि काम नहीं हो रहा है तो घर बैठें। कम से कम गरीब बच्चों का अधिकार न छीने। उन्होंने कहा कि क्या आपने क्षेत्र में जाकर सत्यापन किया। यदि किया और घोषणापत्र गलत पाया गया तो फिर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने 20 दिन के भीतर ऋषिकेश के स्कूलों में आरटीई के तहत शिक्षा ले रहे बच्चों की रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
भरत मंदिर स्कूल प्रबंधन को भेजा जाएगा नोटिस
बैठक में भरत मंदिर पब्लिक स्कूल की ओर से किसी के भी न पहुंचने पर प्रबंधन के खिलाफ नोटिस भेजा जाएगा। यह बात आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने कही। लेखपाल सतीश चंद जोशी ने बताया कि भरत मंदिर के प्रधानाचार्य को सूचना दी गई थी, लेकिन प्रधानाचार्य की तबीयत ठीक न होने के कारण वह उपस्थित नहीं हो सके। इस पर आयोग ने नाराजगी जताई और कहा कि यदि प्रधानाचार्य अस्वस्थ हैं तो क्या सभी लोग बीमार हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए भरत मंदिर प्रबंधन को बाल संरक्षण आयोग की ओर से नोटिस भेजा जाएगा।
बच्चों के साथ हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार
इस दौरान तपोवन से रमन सेवा समिति की ओर से शिकायत रखी गई कि उनके स्कूल के समीप ही एक होटल बना हुआ है, जिसकी 11 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन स्कूल की दीवार के ऊपर से गुजर रही है। उन्होंने लाइन के कनेक्शन को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए। इस पर होटल संचालक विवेक नंदा को आयोग ने पूछा कि यदि बच्चों के साथ कोई भी हादसा होता है, तो क्या आप उनकी जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए विद्युत विभाग से भी जवाब मांगा जाएगा।
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सोमवार को बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ऋषिकेश तहसील पहुंची। यहां उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनी। यहां एक युवती ने आयोग की अध्यक्ष के समक्ष आय प्रमाणपत्र जारी न किए जाने का मुद्दा रखा। उन्होंने कहा कि एक महिला का पति ढाबे में काम करता है, उसका लेखपाल सतीश चंद जोशी ने आय प्रमाण जारी नहीं किया। यही नहीं लेखपाल ने किसी से भी शिकायत करने की बात कही। युवती ने आरोप लगाया कि अन्य लोगों के आय प्रमाणपत्र बिना किसी जांच के जारी कर दिए गए। लेखपाल ने आईफोन रखने वाले के प्रमाणपत्र जारी किए तथा क्षेत्र में जाकर स्वयं वेरिफिकेशन नहीं किया, बल्कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से इसकी जांच करवाई। जब उन्होंने मामला आयोग के सामने उठाया तो उक्त महिलाएं उनके घर आकर धमकी दे रही हैं।
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इस पर आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने तहसीलदार रेखा आर्य से जवाब मांगा। तहसीलदार ने बताया कि आय प्रमाणपत्र बनाने वाले लोग अपनी मासिक आय 4000 रुपये ही बताते हैं, उनका तर्क होता है कि क्या जब वह कच्चे मकानों में रहेंगे तभी उन्हें निर्धन माना जाएगा। तहसीलदार ने कहा कि पटवारी क्षेत्र पर जाकर वेरिफिकेशन नहीं करते हैं। इस पर उषा नेगी ने कहा कि तहसीलदार भी मौके पर जाकर सत्यापन करें।
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काम नहीं हो रहा तो घर बैठें
आयोग अध्यक्ष उषा नेगी ने लेखपाल सतीश चंद जोशी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आपको सरकार काम करने की एवज में वेतन दे रही है। यदि काम नहीं हो रहा है तो घर बैठें। कम से कम गरीब बच्चों का अधिकार न छीने। उन्होंने कहा कि क्या आपने क्षेत्र में जाकर सत्यापन किया। यदि किया और घोषणापत्र गलत पाया गया तो फिर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने 20 दिन के भीतर ऋषिकेश के स्कूलों में आरटीई के तहत शिक्षा ले रहे बच्चों की रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
भरत मंदिर स्कूल प्रबंधन को भेजा जाएगा नोटिस
बैठक में भरत मंदिर पब्लिक स्कूल की ओर से किसी के भी न पहुंचने पर प्रबंधन के खिलाफ नोटिस भेजा जाएगा। यह बात आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने कही। लेखपाल सतीश चंद जोशी ने बताया कि भरत मंदिर के प्रधानाचार्य को सूचना दी गई थी, लेकिन प्रधानाचार्य की तबीयत ठीक न होने के कारण वह उपस्थित नहीं हो सके। इस पर आयोग ने नाराजगी जताई और कहा कि यदि प्रधानाचार्य अस्वस्थ हैं तो क्या सभी लोग बीमार हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए भरत मंदिर प्रबंधन को बाल संरक्षण आयोग की ओर से नोटिस भेजा जाएगा।
बच्चों के साथ हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार
इस दौरान तपोवन से रमन सेवा समिति की ओर से शिकायत रखी गई कि उनके स्कूल के समीप ही एक होटल बना हुआ है, जिसकी 11 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन स्कूल की दीवार के ऊपर से गुजर रही है। उन्होंने लाइन के कनेक्शन को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए। इस पर होटल संचालक विवेक नंदा को आयोग ने पूछा कि यदि बच्चों के साथ कोई भी हादसा होता है, तो क्या आप उनकी जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए विद्युत विभाग से भी जवाब मांगा जाएगा।