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Rishikesh News: सिलक्यारा रेस्क्यू में मददगार हो रहा नाइट लैंडिंग सिस्टम

Sun, 26 Nov 2023 11:20 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 26 Nov 2023 11:20 PM IST
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Rescue is being carried out to take out the workers
Iरेस्क्यू उपकरण लेकर एयरपोर्ट पर रात में लैंड हो रहे सेना और दूसरे व्यावसायिक विमान
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Iएयरपोर्ट से सिलक्यारा भेजे जा चुके हैं कई रेस्क्यू उपकरणI

सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू में देहरादून एयरपोर्ट और एयरपोर्ट पर लगाया गया नाइट लैंडिंग सिस्टम मददगार साबित हो रहा है। देहरादून एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट का मूवमेंट सुबह आठ बजे से लेकर रात साढे सात बजे तक रहता है। इसके बाद एयरपोर्ट को बंद कर दिया जाता है। लेकिन वर्तमान में सिलक्यारा ऑपरेशन में एयरपोर्ट के नाइट लैंडिंग सिस्टम से रेस्क्यू में पूरी मदद मिल रही है। सिलक्यारा में टनल हादसे के बाद से लेकर अब तक दर्जनों मशीनें और उपकरणों को सैन्य और दूसरे विमानों से एयरपोर्ट पर उतारकर मौके पर पहुंचाया जा चुका है।

व्यावसायिक फ्लाइट, चार्टर्ड विमानों और हेलिकॉप्टरों की आवाजाही से दिन में एयरपोर्ट पर हवाई यातायात का दबाव काफी अधिक होता है। जिस कारण रेस्क्यू के लिए मशीनें लाने वाले सैन्य विमानों को जीरो जोन होने पर रात्रि में उतारा जाता है। यदि एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग सिस्टम नहीं होता तो इससे रेस्क्यू कार्य पर असर पड़ सकता था। अब तक सी-17 ग्लोबमास्टर, हरक्यूलिस और दूसरे विमान देर रात कई बार उड़ान भरकर रेस्क्यू उपकरणों को उतार चुके हैं। उपकरणों को सिलक्यारा भिजवाया जा चुका है। जिससे सामरिक और आपदा के दृष्टि से अतिसंवेदनशील प्रदेश उत्तराखंड में रेस्क्यू के लिए देहरादून एयरपोर्ट का महत्व काफी बढ़ गया है।
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Iफरवरी 2012 में मिली थी मंजूरीI

जौलीग्रांट में नाइट लैंडिंग उपकरण स्थापित किए जाने के बाद फरवरी 2012 में डीजीसीए से मंजूरी दी गई थी। जिसके बाद मार्च-अप्रैल के दौरान यहां विमानों ने नाइट लैंडिंग का सफल ट्रायल किया था।
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Iऐसे कराई जाती है नाइट लैंडिंगI

एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस), डॉप्लर वेरी हाई फ्रीक्वेंसी ओमनी रेंज (डीवीओआर) एप्रोच लाइट, रनवे लाइट, पॉज इंडिकेटर और दूसरे उपकरण मिलकर कार्य करते हैं। जो सभी विमानों को एयरपोर्ट के पास लाने और रनवे की सेंटर लाइन दिखाने आदि का कार्य करते हैं। इन सभी उपकरणों को रात के अलावा कम विजुअलिटी या खराब मौसम के दौरान भी लैंडिंग के दौरान काम में लाया जाता है।
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