{"_id":"6aa55348bae508a46507e1b0","slug":"rare-confluence-of-haritalika-teej-and-ganesh-chaturthi-rishikesh-news-c-38-1-rks1008-146303-2026-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rishikesh News: हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी पर बन रहा दुर्लभ संयोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rishikesh News: हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी पर बन रहा दुर्लभ संयोग
Sat, 12 Sep 2026 06:57 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 12 Sep 2026 06:57 PM IST
विज्ञापन
- दोनों पर्वों के एक ही दिन होने से प्राप्त होगा पूजा-अर्चना का विशेष फल
ऋषिकेश। हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों मुख्य त्योहार एक ही दिन 14 सितंबर सोमवार को मनाए जाएंगे। हिंदू पंचांग में तिथियों के घट-बढ़ यानी क्षय तिथि के कारण दोनों पर्व का एक ही दिन होने से अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज पाठक के अनुसार, एक ही दिन दोनों पर्व आने से पूजा-अर्चना का विशेष फल प्राप्त होगा।
पं. मनोज पाठक ने बताया कि हरितालिका तीज का पूजन सुबह 06:05 बजे से 07:06 बजे तक तृतीया तिथि में शिव-पार्वती की आराधना के लिए सबसे उत्तम रहेगा। इसके बाद गणेश चतुर्थी की मूर्ति स्थापना और पूजन का मध्याह्न मुहूर्त दोपहर 10:00 बजे से 01:31 बजे तक रहेगा जो चतुर्थी तिथि के दौरान गणपति स्थापना के लिए अत्यंत शुभ समय है। जो महिलाएं हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखती हैं, वह सुबह के मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजन संपन्न कर सकती हैं। तीज की पूजा पूरी करने के बाद मध्याह्न मुहूर्त में घर में श्री गणेश जी की नई प्रतिमा स्थापित की जा सकती है और उन्हें मोदक व दुर्वा अर्पित करके आरती उतारी जा सकती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश का आगमन होता है, इसलिए दोनों त्योहारों का एक दिन पड़ना अत्यंत कल्याणकारी और मंगलकारी माना जा रहा है।
विज्ञापन
ऋषिकेश। हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों मुख्य त्योहार एक ही दिन 14 सितंबर सोमवार को मनाए जाएंगे। हिंदू पंचांग में तिथियों के घट-बढ़ यानी क्षय तिथि के कारण दोनों पर्व का एक ही दिन होने से अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज पाठक के अनुसार, एक ही दिन दोनों पर्व आने से पूजा-अर्चना का विशेष फल प्राप्त होगा।
पं. मनोज पाठक ने बताया कि हरितालिका तीज का पूजन सुबह 06:05 बजे से 07:06 बजे तक तृतीया तिथि में शिव-पार्वती की आराधना के लिए सबसे उत्तम रहेगा। इसके बाद गणेश चतुर्थी की मूर्ति स्थापना और पूजन का मध्याह्न मुहूर्त दोपहर 10:00 बजे से 01:31 बजे तक रहेगा जो चतुर्थी तिथि के दौरान गणपति स्थापना के लिए अत्यंत शुभ समय है। जो महिलाएं हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखती हैं, वह सुबह के मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजन संपन्न कर सकती हैं। तीज की पूजा पूरी करने के बाद मध्याह्न मुहूर्त में घर में श्री गणेश जी की नई प्रतिमा स्थापित की जा सकती है और उन्हें मोदक व दुर्वा अर्पित करके आरती उतारी जा सकती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश का आगमन होता है, इसलिए दोनों त्योहारों का एक दिन पड़ना अत्यंत कल्याणकारी और मंगलकारी माना जा रहा है।
विज्ञापन