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बापूग्राम जनसभा : घर बचाने की मुहिम में एकजुट हुए लोग

Sun, 18 Jan 2026 02:32 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Updated Sun, 18 Jan 2026 02:32 AM IST
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People united in the campaign to save their homes
बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति की ओर से आयोजित जनसभा में उमड़ी लोगों की भीड़। स्रोत जागरूक पाठक। - फोटो : अमर उजाला
ऋषिकेश के बापूग्राम स्थित भूमियाल देवता मंदिर के समीप बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति की जनसभा आयोजित की गई। इस सभा में बापूग्राम, बीसबीघा, मीरानगर और गीतानगर समेत विभिन्न क्षेत्रों के निवासियों ने भारी संख्या में शिरकत की। जनसभा का मुख्य केंद्र वन भूमि प्रकरण रहा, जहां जनप्रतिनिधियों ने इन बस्तियों के अस्तित्व को बचाने और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा की। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यूपीए सरकार ने वर्ष 2006 में देश के इतिहास का सबसे क्रांतिकारी अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 पारित किया था। इस कानून की मूल भावना यही थी कि जो लोग पीढ़ियों से वनों में या वन भूमि पर रह रहे हैं, उन्हें अपराधी न माना जाए, बल्कि उन्हें उस जमीन का मालिकाना हक दिया जाए। लेकिन उत्तराखंड में इस केंद्रीय कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बापूग्राम और पशुलोक के हजारों परिवार इस कानून के तहत अन्य परंपरागत वन निवासी की श्रेणी में आते हैं, हम यहां 13 दिसंबर 2005 से नहीं, बल्कि 1947 से बसे हुए हैं, जो कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 लागू होने से भी दशकों पहले का समय है। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने न तो यहां वनाधिकारों की प्रक्रिया शुरू की और न ही इस आबादी वाले क्षेत्र को वन भूमि से डी-नोटिफाई करके राजस्व ग्राम घोषित किया है। ऋषिकेश के बापूग्राम, पशुलोक और शिवाजी नगर जैसे पुराने बसे हुए क्षेत्रों को वन कानूनों के दायरे से बाहर निकालकर उन्हें तत्काल राजस्व ग्राम घोषित करना चाहिए। वन विभाग का कानून घने जंगलों के लिए है, न कि 75 साल पुरानी पक्की बस्तियों, बाजारों और स्कूलों के लिए है।
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