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Rishikesh News: गुणकारी आंवले के अचार के दीवाने हुए लोग
Sat, 15 Feb 2025 01:21 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 15 Feb 2025 01:21 AM IST
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गुणकारी आंवले के अचार को लोग खूब पसंद रहे हैं। आलम यह है कि बीते चार महीनों में चौदहबीघा स्थित फल संरक्षण केंद्र में स्थानीय निवासियों ने छह क्विंटल से अधिक आंवले का अचार बनवाया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है।
चौदहबीघा स्थित फल संरक्षण केंद्र में हर दिन बड़ी संख्या में लोग अचार, जूस, मुरब्बा, जैम व जेली आदि बनवाने के लिए आ रहे हैं। इस बार लोगों की पहली पसंद आंवले का अचार बना हुआ है। विभागीय कर्मियों के अनुसार बीते नवंबर माह से अब तक 600 किलो से अधिक आंवले का अचार बनाया जा चुका है। जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 300 किलो था।
विभागीय कर्मियों का कहना है कि इस बार आंवले की बंपर फसल हुई है। जंगलों में भी खूब आंवला हुआ है। लोग जंगली आंवला लेकर भी अचार बनवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
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इन क्षेत्रों से पहुंचते हैं केंद्र पर लोग
फल संरक्षण केंद्र पर भानियावाला, रानीपोखरी, रायवाला, श्यामपुर, ऋषिकेश, मुनि की रेती, तपोवन, स्वर्गाश्रम आदि क्षेत्रों के लोग अचार आदि बनवाने के लिए पहुंचते हैं। केंद्र पर प्रतिवर्ष छह टन से अधिक मुरब्बा, अचार, जैम, जेली आदि बनाई जाती है। यहां एक केंद्र प्रभारी, एक पर्यवेक्षक व दो अनुचर तैनात हैं।
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प्रति किलो 15 रुपये हैं शुल्क
अचार, जैम, जेली व मुरब्बा आदि सभी को बनवाने का शुल्क प्रति किलो 15 रुपये है। इसके अलावा अन्य सामग्री स्वयं ही देनी पड़ती है।
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- इस बार आंवले की फसल अच्छी हुई है। इसलिए लोग बड़ी संख्या में आंवले का अचार आदि बनवाने के लिए ला रहे हैं। अब तक छह क्विंटल से अधिक आंवले का अचार बनाया जा चुका है। जो पिछले वर्ष की तुलना दुगना है। - जगदीश पुरोहित, केंद्र प्रभारी
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चौदहबीघा स्थित फल संरक्षण केंद्र में हर दिन बड़ी संख्या में लोग अचार, जूस, मुरब्बा, जैम व जेली आदि बनवाने के लिए आ रहे हैं। इस बार लोगों की पहली पसंद आंवले का अचार बना हुआ है। विभागीय कर्मियों के अनुसार बीते नवंबर माह से अब तक 600 किलो से अधिक आंवले का अचार बनाया जा चुका है। जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 300 किलो था।
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विभागीय कर्मियों का कहना है कि इस बार आंवले की बंपर फसल हुई है। जंगलों में भी खूब आंवला हुआ है। लोग जंगली आंवला लेकर भी अचार बनवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
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इन क्षेत्रों से पहुंचते हैं केंद्र पर लोग
फल संरक्षण केंद्र पर भानियावाला, रानीपोखरी, रायवाला, श्यामपुर, ऋषिकेश, मुनि की रेती, तपोवन, स्वर्गाश्रम आदि क्षेत्रों के लोग अचार आदि बनवाने के लिए पहुंचते हैं। केंद्र पर प्रतिवर्ष छह टन से अधिक मुरब्बा, अचार, जैम, जेली आदि बनाई जाती है। यहां एक केंद्र प्रभारी, एक पर्यवेक्षक व दो अनुचर तैनात हैं।
प्रति किलो 15 रुपये हैं शुल्क
अचार, जैम, जेली व मुरब्बा आदि सभी को बनवाने का शुल्क प्रति किलो 15 रुपये है। इसके अलावा अन्य सामग्री स्वयं ही देनी पड़ती है।
- इस बार आंवले की फसल अच्छी हुई है। इसलिए लोग बड़ी संख्या में आंवले का अचार आदि बनवाने के लिए ला रहे हैं। अब तक छह क्विंटल से अधिक आंवले का अचार बनाया जा चुका है। जो पिछले वर्ष की तुलना दुगना है। - जगदीश पुरोहित, केंद्र प्रभारी