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Rishikesh: कनासर रेंज में अवैध कटान की चर्चा, सेब के बगीचे में मिले प्रतिबंधित प्रजाति के देवदार के 52 स्लीपर

Wed, 18 Oct 2023 03:39 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Wed, 18 Oct 2023 03:39 PM IST
सार

सहायक वन संरक्षक मुकुल कुमार को मुखबिर से सूचना मिली कि एक बगीचे में स्लीपर छिपा कर रखे गए हैं। जिस पर उन्होंने रेंज अधिकारी कनासर को टीम गठित कर कांबिंग के निर्देश दिए।

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Rishikesh News 52 sleepers of banned species of cedar found in apple orchard in Kanasar range
स्लीपर मिले - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चकराता वन प्रभाग के कोटी कनासर में सेब के बगीचे से प्रतिबंधित प्रजाति देवदार के 52 स्लीपर बरामद हुए हैं। जिससे एक बार फिर अवैध कटान का मामला चर्चा में आ गया है। वन विभाग ने लकड़ी को जब्त कर लिया है। पूर्व में रेंज से करीब 4500 स्लीपर बरामद हुए थे। वन विभाग ने मामले में 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

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मंगलवार को सहायक वन संरक्षक मुकुल कुमार को मुखबिर से सूचना मिली कि एक बगीचे में स्लीपर छिपा कर रखे गए हैं। जिस पर उन्होंने रेंज अधिकारी कनासर को टीम गठित कर कांबिंग के निर्देश दिए। वन दरोगा गौतम क्षेत्री, मेहरबान सिंह बिष्ट, प्रमोद प्रसाद, प्रदीप गुसाई ने बगीचों में कांबिंग शुरू की। एक बगीचे में घास के ढेर के नीचे छिपा कर रखे गए स्लीपर बरामद हुए। जिन्हें जब्त कर दिया गया।
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सहायक वन संरक्षक ने बताया कि जिस व्यक्ति के बगीचे से लकड़ी बरामद हुई है, उसने इसे माफी की बताया है। जिस पर उससे माफी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर मुकदमा दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाएंगी।

बता दें कि बीते जुलाई माह में भाजपा नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने कनासर रेंज में बड़े पैमाने पर अवैध कटान की शिकायत वन मंत्री सुबोध उनियाल से की थी। जिस पर वन मंत्री ने जांच के आदेश दिए थे। तत्कालीन डीएफओ कल्याणी के नेतृत्व में करीब 15 दिन तक सघन कांबिंग अभियान चलाया गया गया था।


कोटी कनासर और बिनसौन में पूर्व माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय, पंचायत भवन, घरों, दुकानों, खेत खलिहानों में बड़े पैमाने पर स्लीपर बरामद हुए थे। मामले में लापरवाही बरतने पर डीएफओ को मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। रेंज अधिकारी समेत रेंज में तैनात छह वन कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। मामले की जांच अब भी जारी है।

ब्रिटिश काल में शुरू की गई माफी की लकड़ी की व्यवस्थाI
संरक्षित वन बाहुल्य परगना जौनसार बावर के अंतर्गत वनों के संरक्षण एवं संवर्धन में स्थानीय समुदाय के सहयोग दिए जाने के फलस्वरूप ब्रिटिश काल से माफी की लकड़ी व्यवस्था चली आ रही है। ग्रामीणों को उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए प्रत्येक वर्ष ग्राम वार सूखे पड़े वृक्षों का आवंटन किया जाता है। पन्नालाल एक्ट के तहत मात्र घरेलू उपयोग के लिए दिए जाने वाले इस लकड़ी को स्थानीय भाषा में हक हकूक अथवा माफी की लकड़ी भी कहा जाता है। इस व्यवस्था के तहत वन विभाग तथा ग्राम पंचायत के आपसी तालमेल से ग्राम वार कुछ वृक्षों का आवंटन होता है। संबंधित ग्रामों के ग्रामीण आपसी सहमति से प्रति परिवार लकड़ी का बंटवारा करते हैं। लकड़ी का व्यावसायिक रूप से उपयोग किसी भी दशा में नहीं किया जा सकता।

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