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यूक्रेन के हालातों को भांपकर एक दिन पहले ही निकल आई थी नेहा
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01 यूक्रेन से रूसी हमले से एक दिन पहले लौटी मेडिकल स्टूडेंट नेहा सिंह।
- फोटो : RISHIKESH
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यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही विस्थापित क्षेत्र सुनार गांव की नेहा सिंह देश के हालातों को भांपकर रूसी सेना के हमले से एक दिन पहले घर के लिए निकल गई थीं। कई दिनों से चल रहे हालातों को भांपकर अपने परिजनों से चर्चा करने के बाद भारत के लिए निकली नेहा अभी दुबई तक ही पहुंची थीं कि रूसी सेना के हमले की खबर आ गई।
डोईवाला के सुनार गांव की नेहा सिंह युमनाम यूक्रेन में टरनोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा हैं। वह बीते दिसंबर में ही अध्ययन के लिए यूक्रेन चली गई थीं। अभी तक पूरी तरह से पढ़ाई शुरू भी नहीं हुई थी कि यूक्रेन के हालात बदलने लगे। नेहा 24 फरवरी को हुए रूसी हमले से ठीक एक दिन पहले माहौल को भांपकर भारत के लिए रवाना हो गई थीं। बीते शुक्रवार को घर लौटी नेहा सिंह ने यूक्रेन के माहौल को बताया। उन्होंने बताया कि कई दिनों से यूक्रेन के हालात ठीक नहीं थे। जब अमेरिकी एंबेसी ने अपने नागरिकों को यूक्रेन से निकलने की सलाह दी तो उन्हें लगा कि संभवतया हालात और खराब हो सकते हैं। इंडियन एंबेसी से भी संकेत मिला था कि जो भारतीय जाना चाहे वह जा सकते हैं। हालांकि युद्ध जैसे हालात को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं था, लेकिन फिर भी परदेश में अजीबोगरीब परिस्थितियों का आना दूसरे देशों के नागरिक महसूस करने लगे थे। लिहाजा उन्होंने अपने वतन लौटने का मन बनाया। हिमालयन अस्पताल में कार्यरत उनके पिता राबिन सिंह ने भी उन्हें वापस लौटने के लिए प्रेरित किया तो उन्होंने फ्लाइट की टिकट बुक करा दी। वह फ्लाइट से अभी दुबई तक ही पहुंची थीं कि रूसी सेना के हमले की जानकारी मिली। यदि एक दिन का भी विलंब होता तो वह भी वहीं फंस सकती थीं। उनके सकुशल घर आ जाने से परिजन चिंतामुक्त हो गए।
परिचित नमन से नहीं हो पा रहा संपर्क ंनेहा सिंह ने बताया उनका एक साथी आगरा निवासी नमन कीव में फंस गया है। पिछले कुछ दिनों तक उससे संपर्क होता रहा। अब फोन सेवा भी लड़खड़ाने लगी है। नमन ने उन्हें बताया कि वह एक विद्यालय के भवन में है। कुछ लोगों को बंकरों में भी रखा जा रहा है। किसी तरह से निकलने के लिए पोलैंड और रोमानिया तक पहुंचने का प्रयास हो रहा है। अपने कई साथियों के यूक्रेन में फंसे रहने की चिंता उनको है। नेहा बताती हैं कि वह प्रार्थना कर रही हैं कि सभी सकुशल देश वापस पहुंच जाएं।
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डोईवाला के सुनार गांव की नेहा सिंह युमनाम यूक्रेन में टरनोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा हैं। वह बीते दिसंबर में ही अध्ययन के लिए यूक्रेन चली गई थीं। अभी तक पूरी तरह से पढ़ाई शुरू भी नहीं हुई थी कि यूक्रेन के हालात बदलने लगे। नेहा 24 फरवरी को हुए रूसी हमले से ठीक एक दिन पहले माहौल को भांपकर भारत के लिए रवाना हो गई थीं। बीते शुक्रवार को घर लौटी नेहा सिंह ने यूक्रेन के माहौल को बताया। उन्होंने बताया कि कई दिनों से यूक्रेन के हालात ठीक नहीं थे। जब अमेरिकी एंबेसी ने अपने नागरिकों को यूक्रेन से निकलने की सलाह दी तो उन्हें लगा कि संभवतया हालात और खराब हो सकते हैं। इंडियन एंबेसी से भी संकेत मिला था कि जो भारतीय जाना चाहे वह जा सकते हैं। हालांकि युद्ध जैसे हालात को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं था, लेकिन फिर भी परदेश में अजीबोगरीब परिस्थितियों का आना दूसरे देशों के नागरिक महसूस करने लगे थे। लिहाजा उन्होंने अपने वतन लौटने का मन बनाया। हिमालयन अस्पताल में कार्यरत उनके पिता राबिन सिंह ने भी उन्हें वापस लौटने के लिए प्रेरित किया तो उन्होंने फ्लाइट की टिकट बुक करा दी। वह फ्लाइट से अभी दुबई तक ही पहुंची थीं कि रूसी सेना के हमले की जानकारी मिली। यदि एक दिन का भी विलंब होता तो वह भी वहीं फंस सकती थीं। उनके सकुशल घर आ जाने से परिजन चिंतामुक्त हो गए।
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परिचित नमन से नहीं हो पा रहा संपर्क ंनेहा सिंह ने बताया उनका एक साथी आगरा निवासी नमन कीव में फंस गया है। पिछले कुछ दिनों तक उससे संपर्क होता रहा। अब फोन सेवा भी लड़खड़ाने लगी है। नमन ने उन्हें बताया कि वह एक विद्यालय के भवन में है। कुछ लोगों को बंकरों में भी रखा जा रहा है। किसी तरह से निकलने के लिए पोलैंड और रोमानिया तक पहुंचने का प्रयास हो रहा है। अपने कई साथियों के यूक्रेन में फंसे रहने की चिंता उनको है। नेहा बताती हैं कि वह प्रार्थना कर रही हैं कि सभी सकुशल देश वापस पहुंच जाएं।
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