{"_id":"682608d6a414ec3d190306c7","slug":"need-to-develop-patient-safety-culture-in-every-hospital-rishikesh-news-c-38-1-sdrn1040-127201-2025-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rishikesh News: प्रत्येक अस्पताल में रोगी सुरक्षा संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rishikesh News: प्रत्येक अस्पताल में रोगी सुरक्षा संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। एम्स में रोगी सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य सेवा में रोगी सुरक्षा के जोखिम प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक अस्पताल में रोगी सुरक्षा संस्कृति विकसित करने के साथ इलाज के दौरान अनावश्यक शल्य क्रियाओं और शल्य चिकित्सा से बचने की आवश्यकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग और एम्स ऋषिकेश के संयुक्त पहल पर बृहस्पतिवार को एम्स में रोगी सुरक्षा सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि और महानिदेशक, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय डाॅ. सुजाता चौधरी और एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने किया। डॉ. सुजाता चौधरी ने कहा कि रोगी सुरक्षा एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता को विशेष जिम्मेदारी निभानी होती है। एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि रोगी की सुरक्षित और सम्मानजनक देखभाल प्रदान करना प्रत्येक अस्पताल की पहली जिम्मेदारी है।
डाॅ. अविनाश सुंथालिया ने बताया कि प्रत्येक अस्पताल में रोगी सुरक्षा संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है। कहा कि सरकार प्रत्येक अस्पताल में रोगी सुरक्षा सेल बनाने पर प्रयास कर रही है। एम्स ऋषिकेश के माध्यम से शीघ्र ही राज्य स्तर पर बेबीनार आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
विज्ञापन
कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेजों के 40 से अधिक नोडल अधिकारियों ने शिरकत की। सम्मेलन में उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा के संयुक्त निदेशक डाॅ. धनवीर रैणा, प्रो. शैलेंद्र हांडू, डाॅ. वाईएस पयाल, डाॅ. गीता नेगी, डाॅ. पुनीत धमीजा, डाॅ. पूजा भदौरिया आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
ऋषिकेश। एम्स में रोगी सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य सेवा में रोगी सुरक्षा के जोखिम प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक अस्पताल में रोगी सुरक्षा संस्कृति विकसित करने के साथ इलाज के दौरान अनावश्यक शल्य क्रियाओं और शल्य चिकित्सा से बचने की आवश्यकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग और एम्स ऋषिकेश के संयुक्त पहल पर बृहस्पतिवार को एम्स में रोगी सुरक्षा सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि और महानिदेशक, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय डाॅ. सुजाता चौधरी और एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने किया। डॉ. सुजाता चौधरी ने कहा कि रोगी सुरक्षा एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता को विशेष जिम्मेदारी निभानी होती है। एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि रोगी की सुरक्षित और सम्मानजनक देखभाल प्रदान करना प्रत्येक अस्पताल की पहली जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
डाॅ. अविनाश सुंथालिया ने बताया कि प्रत्येक अस्पताल में रोगी सुरक्षा संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है। कहा कि सरकार प्रत्येक अस्पताल में रोगी सुरक्षा सेल बनाने पर प्रयास कर रही है। एम्स ऋषिकेश के माध्यम से शीघ्र ही राज्य स्तर पर बेबीनार आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
विज्ञापन
कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेजों के 40 से अधिक नोडल अधिकारियों ने शिरकत की। सम्मेलन में उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा के संयुक्त निदेशक डाॅ. धनवीर रैणा, प्रो. शैलेंद्र हांडू, डाॅ. वाईएस पयाल, डाॅ. गीता नेगी, डाॅ. पुनीत धमीजा, डाॅ. पूजा भदौरिया आदि मौजूद रहे।