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Rishikesh News: न्यायालय ने नगर निगम के आदेश को किया खारिज
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Iनगर निगम ने भूरी देवी शंकर भवन ट्रस्ट की संपत्ति को किया था लावारिस घोषितI
न्यायालय सिविल जज सीनियर डिविजन भवदीप रावते की अदालत ने भूरी देवी शंकर भवन ट्रस्ट की संपत्ति लावारिस घोषित करने संबंधी नगर निगम के आदेश को खारिज कर दिया है। मामले में ट्रस्टी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
वर्ष 2020 में नगर निगम ने भूरी देवी शंकर भवन ट्रस्ट की संपत्ति को लावारिस घोषित कर दिया था। साथ ही निगम के अभिलेखों में उक्त संपत्ति के स्वामी के नाम के स्थान पर नगर निगम अंकित करने को आदेश पारित किया था। जिसके खिलाफ ट्रस्टी राजपाल थापा निवासी बड़कोटमाफी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
ट्रस्टी थापा ने आरोप लगाया था कि नगर निगम ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध जाकर आदेश पारित किया है। ट्रस्ट को न ताे सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही उसका पक्ष जाना गया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय सिविल जज सीनियर डिविजन भवदीप रावते की अदालत ने फैसला सुनाया। अपीलकर्ता के अधिवक्ता सुनील चंद रमोला ने बताया कि न्यायालय ने नगर निगम के आदेश को खारिज कर दिया है। अधिवक्ता सुनील चंद ने बताया कि नगर निगम में नामातंरण की जो कार्रवाई की गई है न्यायालय ने उसे पूरी तरह विधि व्यवस्था के विपरीत बताया। न्यायालय ने कहा कि नामांतरण की कार्रवाई किसी भी प्रकार से स्वामित्व का अधिकार प्रदान नहीं करती है।
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न्यायालय सिविल जज सीनियर डिविजन भवदीप रावते की अदालत ने भूरी देवी शंकर भवन ट्रस्ट की संपत्ति लावारिस घोषित करने संबंधी नगर निगम के आदेश को खारिज कर दिया है। मामले में ट्रस्टी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
वर्ष 2020 में नगर निगम ने भूरी देवी शंकर भवन ट्रस्ट की संपत्ति को लावारिस घोषित कर दिया था। साथ ही निगम के अभिलेखों में उक्त संपत्ति के स्वामी के नाम के स्थान पर नगर निगम अंकित करने को आदेश पारित किया था। जिसके खिलाफ ट्रस्टी राजपाल थापा निवासी बड़कोटमाफी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
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ट्रस्टी थापा ने आरोप लगाया था कि नगर निगम ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध जाकर आदेश पारित किया है। ट्रस्ट को न ताे सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही उसका पक्ष जाना गया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय सिविल जज सीनियर डिविजन भवदीप रावते की अदालत ने फैसला सुनाया। अपीलकर्ता के अधिवक्ता सुनील चंद रमोला ने बताया कि न्यायालय ने नगर निगम के आदेश को खारिज कर दिया है। अधिवक्ता सुनील चंद ने बताया कि नगर निगम में नामातंरण की जो कार्रवाई की गई है न्यायालय ने उसे पूरी तरह विधि व्यवस्था के विपरीत बताया। न्यायालय ने कहा कि नामांतरण की कार्रवाई किसी भी प्रकार से स्वामित्व का अधिकार प्रदान नहीं करती है।
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